{"_id":"593ebcc41126f416468b45c7","slug":"161497283780-shimla-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रोजेक्ट निर्माण से 400 बीघा जमीन बंजर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रोजेक्ट निर्माण से 400 बीघा जमीन बंजर
Updated Mon, 12 Jun 2017 09:39 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आनी (कुल्लू)।
आनी के पास करसोग उपमंडल में बन रहे हिमाद्रि माइक्रो हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के विरोध में आवाज उठने लगी है। प्रोजेक्ट प्रभावित गांवों के दर्जनों लोगों ने शौनबिल गांव में सोमवार को बैठक आयोजित की। ग्रामीणों ने बताया कि करसोग उपमंडल में निर्माणाधीन प्रोजेक्ट की मंजूरी से लेकर आज तक प्रोजेक्ट प्रबंधन मनमानी करता आया है। जोबन दास, जीया लाल, हुकुम चंद, किशोरी लाल का आरोप है कि उस समय पंचायत प्रतिनिधियों ने गलत ढंग से एनओसी देकर उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस प्रोजेक्ट के निर्माण से उनकी 400 बीघा भूमि बंजर हो गई है। पेड़-पौधे सूखने लगे है। कई घरों में दरारें आ गई हैं। सात घराटों का अस्तित्व खतरे में है, जबकि 70 पंजीकृत मछुआरों को जीवनयापन के लाले पड़े हैं। उनका कहना है कि हालांकि अभी खड्डों का पानी टनल में नहीं गया और जब जाएगा तो क्षेत्र के सैकड़ों किसानों को खाने के लाले पड़ जाएंगे। उनका आरोप है कि जिन ग्रामीणों की जमीन इस प्रोजेक्ट से प्रभावित हो रही है उन्हें विश्वास में न लेकर उन लोगों से एनओसी ली गई है जिनकी या तो जमीन ही नहीं या फिर प्रोजेक्ट निर्माण से उन्हें फर्क नहीं पड़ने वाला है।ग्रामीणों का कहना कि उन लोगों से अनापत्ति प्रमाणपत्र पर हस्ताक्षर करवाएंगे जिनका इस प्रोजेक्ट से कोई नुकसान ही नहीं है। इसकी शिकायत मुख्यमंत्री, वन मंत्रालय, करसोग के वन विभाग, एसडीम सहित हर उच्चाधिकारी से कई बार की। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। किसानों ने चेताया है कि यदि 15 जून तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया तो निमला से निगान तक नेशनल हाईवे पर चक्का जाम करेेंगे। बैठक में मोहन लाल, बिहारी लाल, निहाल चंद, टीमा राम, प्रिया लाल, गुलाब दास, संजय कुमार, सीता राम, मोहम्मद आदि मौजूद थे। उधर, एसडीएम विवेक चौहान ने बताया कि जोबन दास ने उच्च न्यायालय में भी केस किया था। यहां से एनजीटी को ट्रांसफर हुआ था और सारे तथ्यों को खंगालने और प्रोजेक्ट क्षेत्र का दौरा करने के बाद प्रोजेक्ट डेवलपर के पक्ष में फैसला सुनाया जा चुका है। कुछ लोगों का विरोध किन्हीं अन्य निजी कारणों के हो सकता है। प्रोजेक्ट के कारण वे प्रभावित हैं, ऐसा प्रतीत नहीं होता।
विज्ञापन
आनी के पास करसोग उपमंडल में बन रहे हिमाद्रि माइक्रो हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के विरोध में आवाज उठने लगी है। प्रोजेक्ट प्रभावित गांवों के दर्जनों लोगों ने शौनबिल गांव में सोमवार को बैठक आयोजित की। ग्रामीणों ने बताया कि करसोग उपमंडल में निर्माणाधीन प्रोजेक्ट की मंजूरी से लेकर आज तक प्रोजेक्ट प्रबंधन मनमानी करता आया है। जोबन दास, जीया लाल, हुकुम चंद, किशोरी लाल का आरोप है कि उस समय पंचायत प्रतिनिधियों ने गलत ढंग से एनओसी देकर उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस प्रोजेक्ट के निर्माण से उनकी 400 बीघा भूमि बंजर हो गई है। पेड़-पौधे सूखने लगे है। कई घरों में दरारें आ गई हैं। सात घराटों का अस्तित्व खतरे में है, जबकि 70 पंजीकृत मछुआरों को जीवनयापन के लाले पड़े हैं। उनका कहना है कि हालांकि अभी खड्डों का पानी टनल में नहीं गया और जब जाएगा तो क्षेत्र के सैकड़ों किसानों को खाने के लाले पड़ जाएंगे। उनका आरोप है कि जिन ग्रामीणों की जमीन इस प्रोजेक्ट से प्रभावित हो रही है उन्हें विश्वास में न लेकर उन लोगों से एनओसी ली गई है जिनकी या तो जमीन ही नहीं या फिर प्रोजेक्ट निर्माण से उन्हें फर्क नहीं पड़ने वाला है।ग्रामीणों का कहना कि उन लोगों से अनापत्ति प्रमाणपत्र पर हस्ताक्षर करवाएंगे जिनका इस प्रोजेक्ट से कोई नुकसान ही नहीं है। इसकी शिकायत मुख्यमंत्री, वन मंत्रालय, करसोग के वन विभाग, एसडीम सहित हर उच्चाधिकारी से कई बार की। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। किसानों ने चेताया है कि यदि 15 जून तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया तो निमला से निगान तक नेशनल हाईवे पर चक्का जाम करेेंगे। बैठक में मोहन लाल, बिहारी लाल, निहाल चंद, टीमा राम, प्रिया लाल, गुलाब दास, संजय कुमार, सीता राम, मोहम्मद आदि मौजूद थे। उधर, एसडीएम विवेक चौहान ने बताया कि जोबन दास ने उच्च न्यायालय में भी केस किया था। यहां से एनजीटी को ट्रांसफर हुआ था और सारे तथ्यों को खंगालने और प्रोजेक्ट क्षेत्र का दौरा करने के बाद प्रोजेक्ट डेवलपर के पक्ष में फैसला सुनाया जा चुका है। कुछ लोगों का विरोध किन्हीं अन्य निजी कारणों के हो सकता है। प्रोजेक्ट के कारण वे प्रभावित हैं, ऐसा प्रतीत नहीं होता।
विज्ञापन