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भारी बारिश से अब तक 1562 करोड़ का नुकसान: मनीषा नंदा

Wed, 10 Oct 2018 06:24 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Updated Wed, 10 Oct 2018 06:24 PM IST
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1562 crore rupee loss and damage due to heavy rain in himachal pradesh: ACS manisha nanda

आपदा प्रबंधन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव मनीषा नंदा ने कहा कि प्रदेश में भारी बारिश से अभी तक 1562 करोड़ का नुकसान हो चुका है। नंदा बुधवार को होटल होलीडे होम में आपदा प्रबंधन को लेकर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रही थीं।

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सूचना एवं जन संपर्क निदेशक अनुपम कश्यप ने कहा कि बीते सितंबर में प्रदेश में सबसे बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन को लेकर ऐसी रिपोर्टिंग होनी चाहिए कि लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा न हो।
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हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष डॉ. शशिकांत ने कहा कि भूकंप की दृष्टि से हिमाचल अति संवेदनशील है। आईआईटी मुंबई की स्टडी है कि 1905 में भूकंप से बीस हजार लोग मरे थे। अब भूकंप आता है तो डेढ़ लाख लोग मरेंगे। भूकंप को लेकर लोगों और बच्चों को ज्यादा जागरूक करना होगा। नदियों के किनारे निर्माण पर नीति बनाने की बात कही थी परंतु यह बनी नहीं। मीडिया से आपदा की सूचना साझी होनी चाहिए।
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आरटीएम नागपुर विश्वविद्यालय के मास कम्युनिकेशन विभाग के सहायक प्रोफेसर मोइज मैनन हक ने कहा कि अस्सी प्रतिशत खबरें बयानों पर आधारित रहती हैं। खबर का असर क्या रहेगा, इसे ध्यान में रखा जाए। मीडिया को क्या सूचनाएं चाहिए, इसे भी ध्यान में रखना है। आपदा के दौरान देश की छवि प्रभावित न हो। हिमांशु शेखर मिश्रा ने कहा कि सुनामी में बहुत से लोग मरे तो कानून बनाया।

आपदा से प्रभावितों के लिए टीमें बनें। मौसम परिवर्तन से प्राकृतिक आपदा बढ़ी है। कश्मीर जब डूबा तो लोगों के पास हेल्पलाइन नंबर नहीं था। लोग संपर्क नहीं कर पा रहे थे। मौसम संबंधित बुलेटिन चैनल से गायब हैं। मीडिया को सूचना देना अनिवार्य है। 

आपदा प्रबंधन को मजबूत कम्युनिकेशन सिस्टम जरूरी
नंदा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि हिमाचल में आपदा प्रबंधन को मजबूत कम्युनिकेशन सिस्टम जरूरी है ताकि संकट की घड़ी में सूचनाओं का आदान-प्रदान हो सके। सरकार आम लोगों और स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से ही आपदा प्रबंधन बेहतर तरीके से कर सकती है। पिछले दिनों बारिश से प्रदेश में भारी नुकसान हुआ है।


उस समय कई स्थानों में कम्युनिकेशन में दिक्कतें जरूर आईं, लेकिन राहत कार्य तेजी से किया गया। जिन स्थानों में कम्युनिकेशन की समस्या रहती है, वहां इस प्रणाली को मजबूत किया जा रहा है। छात्रों और लोगों को नुक्कड़ नाटकों और महिला मंडलों के माध्यम से जागरूक किया जा रहा है। एनसीईआरटी की पुस्तकों में छात्रों को जागरूक करने के लिए पाठ्यक्रम शामिल किया गया है।

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