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टैक्स बढ़ाने को बनाई कमेटी पर विवाद, पार्षद बोले-ये धोखा है
Updated Mon, 29 Jan 2018 09:40 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहर में प्रॉपर्टी टैक्स बढ़ाने को लेकर नगर निगम प्रशासन एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया हैं। टैक्स बढ़ाने के प्रस्ताव पर सदन में भारी विरोध होने के बाजवूद आठ सदस्यों की एक कमेटी बना दी गई है।
कमेटी तय करेगी कि कितना टैक्स बढ़ाना हैं। लेकिन अब इस कमेटी पर ही विवाद खड़ा हो गया है। डिप्टी मेयर से लेकर सदन में मौजूद रहे भाजपा, माकपा और कांग्रेस के पार्षदों का कहना है कि उनके सामने ऐसी कोई कमेटी बनाई ही नहीं गई। माकपा पार्षद शैली शर्मा का कहना है कि सदन में प्रस्ताव खारिज कर दिया था। ऐसे में चुपचाप कमेटी बनाकर निगम पार्षदों से धोखा कर रहा है। भाजपा पार्षद बिट्टु कुमार भी कमेटी गठन से हैरान हैं। कहा कि हमने सदन में टैक्स का विरोध किया। ऐसे में प्रशासन कमेटी कैसे बना सकता है। ढली से पार्षद कमलेश मेहता ने कहा कि ऐसी कोई कमेटी बनी, इसका सदन के बाद पता चल रहा है। हम इसके खिलाफ है। हालांकि, इस कमेटी के आठों सदस्य खुद निगम के पार्षद हैं। लेकिन इनको छोड़कर बाकियों को कमेटी के गठन का सदन खत्म होने के बाद पता चल रहा है।
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कोने में नहीं बनती कमेटी, सदन में चर्चा जरूरी
पार्षद अर्चना धवन का कहना है कि कमेटी पर किसी ने सहमति नहीं दी। सदन खत्म होने के बाद बचत भवन के कोने में कमेटी बनाई। हम इसे नहीं मानते। कमेटी सदन में सबकी सहमति से बनती है। यदि निगम ने अब ऐसी कोई कमेटी बनाई है तो इसका विरोध किया जाएगा।
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आठ पार्षद तय करेंगे टैक्स बढ़ोतरी
सदन में 25 से ज्यादा पार्षदों ने टैक्स का विरोध किया, लेकिन अब आठ पार्षद तय करेंगे कि टैक्स बढ़ेगा या नहीं। इनमें एफसीपीसी के सदस्य सत्या कौंडल, संजय परमार, किरण बावा, आनंद कौशल समेत शैलेंद्र चौहान, आरती चौहान, राकेश चौहान और संजीव ठाकुर शामिल हैं।
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मेयर का दावा, सदन में ही बनाई कमेटी
मेयर कुसुम सदरेट का कहना है कि कमेटी का गठन सदन में ही हुआ। बाकायदा सदस्यों के नाम कमेटी में शामिल किए। शायद कई पार्षदों ने इसे सुना नहीं होगा। सदन में प्रस्ताव का विरोध हुआ, तभी इसे लागू नहीं किया। अब यह कमेटी दूसरे शहरों के नगर निगम में जाकर टैक्स व्यवस्था देखेगी। इसकी रिपोर्ट के बाद ही टैक्स बढ़ाएंगे।
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शिमला। शहर में प्रॉपर्टी टैक्स बढ़ाने को लेकर नगर निगम प्रशासन एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया हैं। टैक्स बढ़ाने के प्रस्ताव पर सदन में भारी विरोध होने के बाजवूद आठ सदस्यों की एक कमेटी बना दी गई है।
कमेटी तय करेगी कि कितना टैक्स बढ़ाना हैं। लेकिन अब इस कमेटी पर ही विवाद खड़ा हो गया है। डिप्टी मेयर से लेकर सदन में मौजूद रहे भाजपा, माकपा और कांग्रेस के पार्षदों का कहना है कि उनके सामने ऐसी कोई कमेटी बनाई ही नहीं गई। माकपा पार्षद शैली शर्मा का कहना है कि सदन में प्रस्ताव खारिज कर दिया था। ऐसे में चुपचाप कमेटी बनाकर निगम पार्षदों से धोखा कर रहा है। भाजपा पार्षद बिट्टु कुमार भी कमेटी गठन से हैरान हैं। कहा कि हमने सदन में टैक्स का विरोध किया। ऐसे में प्रशासन कमेटी कैसे बना सकता है। ढली से पार्षद कमलेश मेहता ने कहा कि ऐसी कोई कमेटी बनी, इसका सदन के बाद पता चल रहा है। हम इसके खिलाफ है। हालांकि, इस कमेटी के आठों सदस्य खुद निगम के पार्षद हैं। लेकिन इनको छोड़कर बाकियों को कमेटी के गठन का सदन खत्म होने के बाद पता चल रहा है।
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कोने में नहीं बनती कमेटी, सदन में चर्चा जरूरी
पार्षद अर्चना धवन का कहना है कि कमेटी पर किसी ने सहमति नहीं दी। सदन खत्म होने के बाद बचत भवन के कोने में कमेटी बनाई। हम इसे नहीं मानते। कमेटी सदन में सबकी सहमति से बनती है। यदि निगम ने अब ऐसी कोई कमेटी बनाई है तो इसका विरोध किया जाएगा।
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आठ पार्षद तय करेंगे टैक्स बढ़ोतरी
सदन में 25 से ज्यादा पार्षदों ने टैक्स का विरोध किया, लेकिन अब आठ पार्षद तय करेंगे कि टैक्स बढ़ेगा या नहीं। इनमें एफसीपीसी के सदस्य सत्या कौंडल, संजय परमार, किरण बावा, आनंद कौशल समेत शैलेंद्र चौहान, आरती चौहान, राकेश चौहान और संजीव ठाकुर शामिल हैं।
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मेयर का दावा, सदन में ही बनाई कमेटी
मेयर कुसुम सदरेट का कहना है कि कमेटी का गठन सदन में ही हुआ। बाकायदा सदस्यों के नाम कमेटी में शामिल किए। शायद कई पार्षदों ने इसे सुना नहीं होगा। सदन में प्रस्ताव का विरोध हुआ, तभी इसे लागू नहीं किया। अब यह कमेटी दूसरे शहरों के नगर निगम में जाकर टैक्स व्यवस्था देखेगी। इसकी रिपोर्ट के बाद ही टैक्स बढ़ाएंगे।