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शोध में साहित्यिक चोरी की तो रद्द होगा प्रोजेक्ट
Updated Sat, 09 Dec 2017 10:18 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। विश्वविद्यालय के साथ तमाम उच्च अध्ययन संस्थानों में अब इंटरनेट और पहले से किए गए शोध में से कुछ मैटीरियल को कट कॉपी पेस्ट कर नए नाम के साथ शोध पूरे करना अब महंगा पड़ेगा। लेबल बदल कर एमफिल, पीएचडी में शोध और असाइनमेंट, शोध पत्र, प्रोजेक्ट, कोर्स वर्क, थिसेज और डेसरटेशन जमा करवाकर डिग्री लेने, पब्लिकेशन करवाने के चलन पर अब पूरी तरह से प्रतिबंध लग गया है। ऐसी कुछ भी सामग्री और शोध पत्र प्रकाशित तक नहीं हो सकेंगे। यूजीसी ने साहित्य चोरी पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए नए रेगुलेशन-2017 लागू किया है। प्रमोशन ऑफ एकेडेमिक इंटीग्रिटी एंड प्रिवेंशन ऑफ लेजरिज्म (साहित्यिक चोरी) रेगुलेशन 2017 सितंबर में लागू किया गया है। इसमें इस तरह से साहित्य चोरी कर अपने शोध, प्रोजेक्ट, शोध पत्र पेश करने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा। इसके लिए एक खास तरह के सॉफ्टवेयर के माध्यम से यूनिवर्सिटी और उच्च अध्ययन संस्थान पता लगाएंगे। इसमें साफ मालूम पड़ेगा कि शोध या प्रोजेक्ट में कितनी सामग्री चोरी की गई है और कितना काम शोधार्थी ने अपनी मेहनत और शोध कर किया है।
यूजीसी के इस नए रेगुलेशन ने एचपीयू में शोध कर रहे करीब आठ सौ शोधार्थियों की चिंता बढ़ा दी है।
शिक्षक भी आएंगे अधिनियम के दायरे में
इस रेगुलेशन 2017 के दायरे में केवल शोधार्थी ही नहीं आएंगे। इसके दायरे में शोधपत्र प्रकाशित करने वाले, किताबें, चैप्टर सहित हर तरह के पब्लिश वर्क करने वाले शिक्षक भी आ रहे हैं।
शोधार्थी को चुकानी पड़ेगी यह कीमत
10 से 40 फीसदी तक साहित्य चोरी पर शोधार्थी को कोई क्रेडिट मार्क्स नहीं मिलेंगे। उसे छह माह में संशोधित शोध जमा करवाना होगा। 40-60 फीसदी साहित्य चोरी पर कोई मार्क्स क्रेेडिट नहीं मिलेंगे। 12 से 18 माह में संशोधित शोध जमा करवाना होगा। 60 फीसदी से अधिक वालों को कोई मार्क्स क्रेेडिट नहीं दिए जाएंगे। शोधार्थी की रजिस्ट्रेशन भी रद्द हो सकती है।
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शिक्षकों पर होगी यह कार्रवाई
साहित्य चोरी कर पेपर या शोध या अपने नाम से शोध पत्र प्रकाशित करवाने वाले शिक्षकों पर भी कार्रवाई तय होगी। इसमें 10 से 40 फीसदी साहित्य चोरी पर पब्लिकेशन को जमा करवाया मैन्यूस्क्रिप्ट लौटा कर एक साल तक पब्लिकेशन पर रोक लगेगी। 40 से 60 फीसदी वाले को मैन्यूस्क्रिप्ट लौटा कर दो साल तक पब्लिकेशन पर रोक और एक इंक्रीमेंट पर रोक लग जाएगी। वह एमफिल पीएचडी गाइड भी नहीं बन सकेगा। 60 फीसदी से अधिक साहित्य चोरी पाए जाने पर ऐसे शिक्षकों के तीन साल तक पब्लिकेशन पर रोक और दो इंक्रीमेंट नहीं दी जाएंगी। वहीं वह तीन साल तक एमफिल और पीएचडी सुपरवाइजर नहीं बन सकेगा।
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शिमला। विश्वविद्यालय के साथ तमाम उच्च अध्ययन संस्थानों में अब इंटरनेट और पहले से किए गए शोध में से कुछ मैटीरियल को कट कॉपी पेस्ट कर नए नाम के साथ शोध पूरे करना अब महंगा पड़ेगा। लेबल बदल कर एमफिल, पीएचडी में शोध और असाइनमेंट, शोध पत्र, प्रोजेक्ट, कोर्स वर्क, थिसेज और डेसरटेशन जमा करवाकर डिग्री लेने, पब्लिकेशन करवाने के चलन पर अब पूरी तरह से प्रतिबंध लग गया है। ऐसी कुछ भी सामग्री और शोध पत्र प्रकाशित तक नहीं हो सकेंगे। यूजीसी ने साहित्य चोरी पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए नए रेगुलेशन-2017 लागू किया है। प्रमोशन ऑफ एकेडेमिक इंटीग्रिटी एंड प्रिवेंशन ऑफ लेजरिज्म (साहित्यिक चोरी) रेगुलेशन 2017 सितंबर में लागू किया गया है। इसमें इस तरह से साहित्य चोरी कर अपने शोध, प्रोजेक्ट, शोध पत्र पेश करने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा। इसके लिए एक खास तरह के सॉफ्टवेयर के माध्यम से यूनिवर्सिटी और उच्च अध्ययन संस्थान पता लगाएंगे। इसमें साफ मालूम पड़ेगा कि शोध या प्रोजेक्ट में कितनी सामग्री चोरी की गई है और कितना काम शोधार्थी ने अपनी मेहनत और शोध कर किया है।
यूजीसी के इस नए रेगुलेशन ने एचपीयू में शोध कर रहे करीब आठ सौ शोधार्थियों की चिंता बढ़ा दी है।
शिक्षक भी आएंगे अधिनियम के दायरे में
इस रेगुलेशन 2017 के दायरे में केवल शोधार्थी ही नहीं आएंगे। इसके दायरे में शोधपत्र प्रकाशित करने वाले, किताबें, चैप्टर सहित हर तरह के पब्लिश वर्क करने वाले शिक्षक भी आ रहे हैं।
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शोधार्थी को चुकानी पड़ेगी यह कीमत
10 से 40 फीसदी तक साहित्य चोरी पर शोधार्थी को कोई क्रेडिट मार्क्स नहीं मिलेंगे। उसे छह माह में संशोधित शोध जमा करवाना होगा। 40-60 फीसदी साहित्य चोरी पर कोई मार्क्स क्रेेडिट नहीं मिलेंगे। 12 से 18 माह में संशोधित शोध जमा करवाना होगा। 60 फीसदी से अधिक वालों को कोई मार्क्स क्रेेडिट नहीं दिए जाएंगे। शोधार्थी की रजिस्ट्रेशन भी रद्द हो सकती है।
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शिक्षकों पर होगी यह कार्रवाई
साहित्य चोरी कर पेपर या शोध या अपने नाम से शोध पत्र प्रकाशित करवाने वाले शिक्षकों पर भी कार्रवाई तय होगी। इसमें 10 से 40 फीसदी साहित्य चोरी पर पब्लिकेशन को जमा करवाया मैन्यूस्क्रिप्ट लौटा कर एक साल तक पब्लिकेशन पर रोक लगेगी। 40 से 60 फीसदी वाले को मैन्यूस्क्रिप्ट लौटा कर दो साल तक पब्लिकेशन पर रोक और एक इंक्रीमेंट पर रोक लग जाएगी। वह एमफिल पीएचडी गाइड भी नहीं बन सकेगा। 60 फीसदी से अधिक साहित्य चोरी पाए जाने पर ऐसे शिक्षकों के तीन साल तक पब्लिकेशन पर रोक और दो इंक्रीमेंट नहीं दी जाएंगी। वहीं वह तीन साल तक एमफिल और पीएचडी सुपरवाइजर नहीं बन सकेगा।