सऊदी अरब में फंसे हिमाचल के 12 युवक, बंधक बनाकर करवाई जा रही मजदूरी
विदेश जाकर पैसा कमाने की चाहत में 14 युवक कबूतरबाजी का शिकार हो गए हैं। इनमें 12 युवक मंडी और दो युवक पंजाब के नंगल और रोपड़ के हैं। इन युवकों को एजेंट धोखाधड़ी से यह कहकर सऊदी अरब टूरिस्ट वीजा पर ले गया कि वहां जाकर वर्क परमिट दिलवा देंगे।
युवकों से एजेंट ने 90-90 हजार रुपये लिए। अब तीन माह बाद न तो उन्हें वर्क परमिट दिया जा रहा है और न ही वापस लौटने के लिए पासपोर्ट और वेतन। आरोप है कि उनसे बंधक बनाकर काम करवाया जा रहा है।
विरोध करने पर झूठे केस में फंसाने की धमकियां दी जा रही हैं। युवकों के परिजनों की शिकायत पर मंडी पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।
परिजनों ने प्रदेश व केंद्र सरकार से बच्चों की वतन वापसी की गुहार लगाई है। डीएसपी तरनजीत सिंह ने बताया कि विदेश भेजने वाले एजेंट मोहम्मद आसिफ और कादिर निवासी डुगराई को ट्रेस कर लिया गया है। उन्हें पूछताछ के लिए थाना तलब किया गया है।
यह युवक फंसे हैं सऊदी अरब में
पुलिस को सौंपी गई सूची में अश्वनी सांख्यान पुत्र हेतराम निवासी डडोह (बल्ह), तनुष कुमार पुत्र कृष्ण लाल निवासी छजवार, सुंदरनगर, ललित कुमार पुत्र रूपलाल निवासी छजवार, रविकांत पुत्र लाल सिंह निवासी गमोहू, सुंदरनगर, जोगिंद्र सिंह पुत्र रामचंद्र निवासी बनौण (बल्ह), प्रेम सिंह पुत्र रतन लाल निवासी कांगरी, सुंदरनगर, भूपेंद्र कुमार पुत्र लोभी राम निवासी जनलग, बल्ह, देवेंद्र कुमार पुत्र बृजलाल निवासी सरयून, सुंदरनगर, विक्रम चंद पुत्र रुलिया राम
निवासी बुशहर, बल्ह, श्याम लाल पुत्र टेक चंद गांव कोल्हा, सुंदरनगर, देवेंद्र कुमार पुत्र सांगूराम निवासी सिंहली, सुंदरनगर, मनोज कुमार पुत्र जयराम निवासी फागला, सुंदरनगर, ओंकार चंद पुत्र मेहर चंद निवासी मवाह, नूरपूर बेदी (पंजाब) और हरजिंद्र सिंह पुत्र दर्शन लाल गांव घोघावाल (नंगल) अस्थायी पता सुंदरनगर का भोजनगर शामिल हैं।
बीमारी की हालत में ले रहे काम
कबूतरबाजी का शिकार हुए सुंदरनगर के हरजिंद्र सिंह की पत्नी सरोज कुमारी का कहना है कि एजेंटों ने आश्वासन दिया था कि तीन माह के टूरिस्ट वीजा के बाद वहां उनके मालिक स्थायी वर्क परमिट दिला देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वहां जाने के बाद सिर्फ एक माह का ही उन्हें वेतन दिया गया।
फोन पर उनके पति ने बताया कि है कि उनसे 8 के बजाय 12 घंटे का काम लिया जाने लगा और ओवरटाइम भी नहीं दिया गया। यहां तक की बीमारी की हालत में भी उनसे काम लिया जाता रहा। अब न तो उन्हें वर्क परमिट दिया जा रहा है और न ही वापस लौटने के लिए पासपोर्ट व खर्चा।