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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दो दर्जन होटलों, वर्कशॉपों और कार वाशिंग सेंटरों को जारी किए नोटिस

Mon, 29 Jan 2018 09:50 AM IST
Updated Mon, 29 Jan 2018 09:50 AM IST
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
अमर उजाला ब्यूरो
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शिमला। शिमला शहर में होटलों, वर्कशॉप और कार वाशिंग सेंटरों से निकलने वाले पानी के कारण जल स्रोत प्रदूषित हो रहे हैं। पानी को दूषित होने से बचाने के लिए न्यायालय के आदेशों पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दूषित पानी खुले में छोड़ने वाले व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी करने शुरू कर दिए हैं। विभाग की ओर से राष्ट्रीय राजमार्ग सहित सर्कुलर रोड पर स्थित करीब दो दर्जन होटलों, वर्कशॉपों और कार वाशिंग सेंटरों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है। बोर्ड ने सभी कारोबारियों को व्यवसायिक गतिविधियों के संचालन के लिए आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के आदेश दिए हैं, ऐसा न करने की स्थिति में काम बंद करने को चेताया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के इनवायरमेंट इंजीनियर की ओर से नोटिस जारी किए गए हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दूषित पानी को साफ करने के लिए अपने प्रतिष्ठानों में ईटीपी (एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) स्थापित करने के आदेश दिए हैं। यह प्लांट स्थापित करने के बाद व्यर्थ पानी का न सिर्फ पुन: प्रयोग किया जा सकता है बल्कि दूषित पानी से जल स्रोतों के प्रदूषित होने का खतरा भी कम हो सकता है।
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यह औपचारिकताएं हैं जरूरी
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प्रोजेक्ट रिपोर्ट
साइट लोकेशन मैप
सेल या लीज डीड
संबंधित विभाग से रजिस्ट्रेशन
नगर निगम या पंचायत की एनओसी
पीडब्ल्यूडी या नेशनल हाइवे की एनओसी
शपथ पत्र
ईटीपी की फिजिबिलिटी रिपोर्ट
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कठिन हैं औपचारिकताएं पूरी करना
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की और से मांगी गई औपचारिकताएं पूरी करना लोगों के लिए कठिन साबित हो रहा है। कारोबारियों का कहना है कि नेशनल हाइवे और पीडब्ल्यूडी से एनओसी लेना बेहद कठिन है। कई भवनों के नक्शे पास नहीं हैं। ईटीपी (एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) स्थापित करना भी खर्चे का काम है। ईटीपी स्थापित करने की लागत दो लाख रुपये तक है।
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10 हजार जुर्माना और 6 साल कैद का प्रावधान
जल प्रदूषण रोकथाम और नियंत्रण अधिनियम 1974 में नियमों की अवहेलना पर जांच के बाद दोषी पाए जाने पर 10 हजार रुपये जुर्माने और 6 साल की कैद का प्रावधान भी है। ऐसे में प्रतिष्ठान संचालक औपचारिकताएं पूरी न होने की आशंका के चलते अपना कारोबार समेटने में लग गए हैं।
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