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सावधान! इस बुखार को हल्के में न लें आप
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Mon, 06 Oct 2014 12:28 PM IST
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स्क्रब टायफस से अब तक आईजीएमसी अस्पताल में 11 लोगों की मौत से भी स्वास्थ्य महकमा नहीं चेता है। पिछले एक दशक में तो यह हाईग्रेड फीवर दर्जनों मरीजों के प्राण ले चुका है। हर बार की तरह इस साल भी न तो हाईग्रेड फीवर से बचाव के लिए कोई तैयारी की गई और न ही इलाज के पुख्ता प्रबंध हुए।
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इसके चलते प्रदेश के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान आईजीएमसी अस्पताल में इस साल अब तक 447 से ज्यादा मरीज आ चुके हैं। इस हाईग्रेड फीवर से मरने वालों में बच्चों से लेकर अधेड़ बुजुर्ग तक सभी शुमार हैं। इनमें महिलाओं की संख्या अधिक है।
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अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डा. रमेश ने कहा कि यहां आने वाले मरीजों को बेहतर उपचार दिया जा रहा है। उन मरीजों की मौत हुई हैं जिन्हें बहुत ही गंभीर हालत में यहां लाया था। इसमें जरा भी लापरवाही न बरतें किसी तरह के लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सक से परामर्श करें। ताकि समय रहते रोग का पता चलने पर इसका उपचार हो सके।
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ऐसे होता है स्क्रब टायफस
यह रोग एक जीवाणु (रिकेटशिया) से संक्रमित पिस्सू (माइट) के काटने से फैलता है जो खेतों, झाड़ियों और घास में रहने वाले चूहों से पनपता है। यह जीवाणु चमड़ी के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है और स्क्रब टायफस बुखार पैदा करता है।
ये हैं लक्षण
- तेज बुखार 104 से 105 तक जा सकता है
- जोड़ों में दर्द और कंपकंपी के साथ बुखार
- शरीर में ऐंठन, अकड़न या शरीर टूटा लगना
- अधिक संक्रमण में गर्दन, बाजू के नीचे गिल्टियां होना
रोकथाम
- शरीर में सफाई का ध्यान रखें
- घर और आसपास का वातावरण साफ रखें
- घर के चारों ओर घास, खरपतवार नहीं उगने दें
- कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करें