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बड़ी खबर: छोटे किसानों के अवैध कब्जे नियमित करने की नीति को मिली मंजूरी

Wed, 08 Feb 2017 08:52 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Wed, 08 Feb 2017 08:52 AM IST
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10 Bigha Land to Small Farmers in Himachal.

सरकारी भूमि पर कब्जों को लेकर गठित उच्च स्तरीय कमेटी ने अतिरिक्त मुख्य सचिव राजस्व की सब कमेटी की अंतरिम पॉलिसी को हरी झंडी दे दी है। मंगलवार को राजस्व मंत्री कौल सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में इसे मंजूरी दी गई।

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अब अंतरिम पॉलिसी को कैबिनेट बैठक में रखा जाएगा। चर्चा के बाद सुझावों को इसमें जोड़कर 28 फरवरी को हाईकोर्ट में पेश किया जाएगा। कौल सिंह ठाकुर ने कहा कि किसानों और बागवानों के आजीविका के अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार ने एक योजना का मसौदा तैयार किया है।
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कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतम पांच बीघा तक की भूमि पर मालिकाना अधिकार देने के लिए सरकार ने योजना तैयार की है। इसे इस प्रकार तैयार किया गया है कि किसी व्यक्ति की अपनी भूमि और उसे प्रदान की गई कुल भूमि दस बीघा से अधिक न हो।

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ये शर्त भी अनिवार्य

10 Bigha Land to Small Farmers in Himachal.
स्वास्थ्य एवं राजस्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर - फोटो : फाइल फोटो

साथ ही यह भी शर्त रखी गई है कि कब्जे में शामिल बाकी भूमि को उसने खाली कर दिया हो। उन्होंने कहा कि मालिकाना अधिकार न्यूनतम दरों पर प्रदान करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके लिए किसी भी व्यक्ति को संबंधित एसडीओ (सिविल) या जहां बंदोबस्त की प्रक्रिया जारी है, वहां सहायक बंदोबस्त अधिकारी के समक्ष लिखित रूप में आवेदन करना होगा।

हालांकि, गांव के आम उपयोग जैसे सड़कों, वनों, मेला मैदान आदि के लिए उपयोग में लाई जा रही भूमि को नहीं दिया जाएगा। ऐसे मामलों में जहां कब्जाधारी अंतिम निर्धारित तिथि से दो वर्षों के अंदर बेदखल हो चुका है, उस भूमि को भी प्रदान करने के योग्य माना जाएगा। इसके लिए यह शर्त रखी गई है कि ऐसे मामलों को अगस्त 2015 से पहले दर्ज किया गया हो।

किसानों को दिया जा सकता है ये विकल्प

10 Bigha Land to Small Farmers in Himachal.

कहा कि किसानों की ओर से सरकारी भूमि पर किए गए अतिक्रमण के बदले प्रदेश सरकार निजी भूमि के विनिमय को भी स्वीकृति देगी।

राजस्व मंत्री ने कहा कि उन मामलों में जिनमें वन संरक्षण अधिनियम 1980 तथा अनुसूचित जाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006 के अंतर्गत स्वीकृति अनिवार्य है उनको भारत सरकार से उठाया जाएगा, ताकि मानवीय आधार पर ऐसे मामलों में छूट मिल सके। बैठक में कमेटी के सदस्य उपस्थित रहे।

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