फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   World Water Day 2025 Rajasthan Thar Desert Water Resources Preservation Supply All You Need to Know

विश्व जल दिवस विशेष: थार रेगिस्तान की गोद में सहेजी जा रही रजत बूंदें, रोज पानी जुटाना था कठिन चुनौती; जानें

Sat, 22 Mar 2025 09:51 AM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बाड़मेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बाड़मेर Published by: शबाहत हुसैन Updated Sat, 22 Mar 2025 09:51 AM IST
सार

Rajasthan: थार रेगिस्तान में पीने के पानी को अमूल्य माना जाता है, लेकिन रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी जुटाना यहां एक कठिन चुनौती थी। हालांकि वेदांता की नॉन एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर प्रिया अग्रवाल की एक पहल से ये मुश्किलें आसान हो गई हैं।

विज्ञापन
World Water Day 2025 Rajasthan Thar Desert Water Resources Preservation Supply All You Need to Know
केयर्न ऑयल एंड गैस का अथक प्रयास - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

तपती धूप और मीलों तक फैले रेतीले विस्तार के बीच थार रेगिस्तान में पीने के पानी को अमूल्य माना जाता है। भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक स्थित बाड़मेर के रोहिड़ी गांव में रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी जुटाना एक कठिन चुनौती थी। लेकिन नवाचारों और सामूहिक प्रयासों के चलते अब यहां मानव और पशुओं को पेयजल सहज रूप से उपलब्ध हो रहा है।

विज्ञापन

वेदांता की नॉन एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर प्रिया अग्रवाल ने दो साल पहले बाड़मेर प्रवास के दौरान रोहिडी गांव का दौरा किया। उन्होंने देखा कि यहां की महिलाएं हर दिन 2 से 4 किलोमीटर पैदल चलकर सैकड़ों फीट गहरे कुएं से पानी खींचती हैं। यह उनकी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा बन चुका था।

विज्ञापन

इस समस्या के समाधान के लिए जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, राजस्थान सरकार और केयर्न ऑयल एंड गैस ने मिलकर प्रयास किए। जल उपस्थिति की मैपिंग कर नवीन तकनीक के माध्यम से गांव के निकट तक पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की गई।

विज्ञापन
विज्ञापन


पढ़ें: जज्बे को सलाम: जिस उम्र में खड़े नहीं हो पाते लोग, बीकानेर की ये दादी लगाती हैं दौड़; नेशनल में जीते तीन गोल्ड

अब इन प्रयासों से न केवल ग्रामीणों को, बल्कि पशुओं को भी आसानी से पानी मिल रहा है। बाड़मेर जिले में अब तक 16 बोरवेल बनाए जा चुके हैं, जिससे 3,200 से अधिक घरों को जलापूर्ति हो रही है। काउ का खेड़ा, बांदरा, नेहरो का वास, निम्बलकोट और दौलतपुरा जैसे गाँवों में स्थायी जल स्रोतों की स्थापना से महिलाओं का श्रम भी कम हुआ है।

इसके अतिरिक्त, केयर्न ने 25 खडीनों का निर्माण कर पारंपरिक जल संरक्षण प्रणाली को पुनर्जीवित किया है। इससे भूमि की नमी बरकरार रहती है और भूजल स्तर में भी सुधार हो रहा है। इससे किसानों को अधिक उपजाऊ मिट्टी और बेहतर फसल उगाने के अवसर मिल रहे हैं। यह पहल केवल पानी की उपलब्धता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीणों के जीवट, पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक के समन्वय की सफलता की कहानी भी है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed