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राजस्थान: वन्यजीवों की सुरक्षा पर खर्च होंगे 1500 करोड़ रुपये, एआई से होगी निगरानी; 291 एम्बुलेंस भी तैनात

Mon, 12 Oct 2026 07:52 PM IST
प्रतीक पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: प्रतीक पांडेय Updated Mon, 12 Oct 2026 07:52 PM IST
सार

राजस्थान सरकार ने जंगलों और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए 1,500 करोड़ रुपये की पृथ्वी परियोजना शुरू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास, भोजन और पानी की उपलब्धता सुधारने के साथ एआई आधारित निगरानी व्यवस्था विकसित की जाएगी।

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Rajasthan Prithvi Project 1500 Crore Wildlife Conservation AI Monitoring 291 Ambulances Udaipur Treatment Cent
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान सरकार ने प्रदेश में जंगलों और वन्यजीवों के दीर्घकालिक संरक्षण, प्राकृतिक आवास सुधार और मानव-वन्यजीव संघर्ष को न्यूनतम करने के लिए 1,500 करोड़ रुपये की पृथ्वी परियोजना शुरू करने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने इस बड़ी परियोजना का दायरा केवल वन क्षेत्र की सामान्य सुरक्षा तक ही सीमित नहीं रखा है, बल्कि इसके अंतर्गत वन्यजीवों के लिए भोजन और पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया है। इसके अतिरिक्त, इस योजना के अंतर्गत आधुनिक तकनीक का प्रयोग करते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित निगरानी तंत्र विकसित किया जाएगा तथा घायल जीवों के लिए त्वरित बचाव और पुनर्वास की ठोस व्यवस्था की जाएगी।
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प्राकृतिक आवास और भोजन सुधार
पृथ्वी परियोजना के तहत जंगलों के भीतर प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने और वन्यजीवों को उनके मूल आवास में ही सुरक्षित वातावरण प्रदान करने का काम किया जाएगा। योजना के तहत विशेष रूप से मांसाहारी वन्यजीवों के लिए प्राकृतिक शिकार की उपलब्धता बढ़ाने के लिए प्री-बेस ऑगमेंटेशन पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इस पूरी कवायद का मुख्य ध्येय वन्यजीवों को जंगल के अंदर ही पर्याप्त भोजन और पानी उपलब्ध कराना है, जिससे वे आहार तथा पानी की तलाश में पास के गांवों, कृषि क्षेत्रों या मानव बस्तियों की तरफ न जाएं।
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एआई निगरानी और आपातकालीन सेवाएं
परियोजना के अंतर्गत संवेदनशील वन क्षेत्रों और वन्यजीवों की दैनिक गतिविधियों पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी व्यवस्था बनाई जाएगी। किसी भी आपदा या दुर्घटना में फंसे अथवा चोटिल वन्यजीवों को तत्काल सहायता पहुंचाने के लिए बचाव, उपचार और पुनर्वास सुविधाओं को मजबूत बनाया जाएगा। राज्य सरकार ने इसके लिए 25 करोड़ रुपये की लागत से 291 वन्यजीव एम्बुलेंस और रैपिड मोबिलिटी टीमों की तैनाती करने का फैसला किया है। यह टीमें वन्यजीवों के संकट में होने की सूचना पर त्वरित कार्रवाई करेंगी।
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संघर्ष निवारण और आर्द्रभूमि प्रबंधन
जंगलों की सीमाओं से सटे ग्रामीण इलाकों और कृषि क्षेत्रों में वन्यजीवों के प्रवेश से उत्पन्न होने वाली संघर्ष की घटनाओं को कम करने के लिए विशेष कॉनफ्लिक्ट मिटिगेशन इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा। साथ ही, वन्यजीवों के सटीक और आधुनिक इलाज के लिए उदयपुर में सर्वसुविधायुक्त वन्यजीव उपचार केंद्र स्थापित किया जाएगा। सरकार प्रसिद्ध मेनार आर्द्रभूमि समेत कुल 25 प्रमुख आर्द्रभूमियों के संरक्षण के लिए एकीकृत प्रबंधन योजनाएं भी तैयार करेगी। इस विशाल परियोजना का सफल क्रियान्वयन जंगलों के जलस्रोतों के संरक्षण, अवैध शिकार पर पूर्ण नियंत्रण, दावानल की रोकथाम और स्थानीय ग्रामीणों की सक्रिय सहभागिता पर टिका रहेगा।
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