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Rajasthan: सिंथेटिक की मात्रा ज्यादा होने के कारण साइजिंग फैक्ट्रियों में काम नहीं कर रहे श्रमिक, पावरलूम उद्योग 'ठप' 

Thu, 03 Mar 2022 07:53 PM IST
उदित दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, किशनगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, किशनगढ़ Published by: उदित दीक्षित Updated Thu, 03 Mar 2022 07:53 PM IST
सार

कॉटन यार्न में सिंथेटिक की मात्रा अधिक होने के कारण मजदूरों ने साइजिंग फैक्ट्रियों में काम करना बंद कर दिया है। इस कारण पावरलूम उद्योग को कच्चा माल नहीं मिल रहा है, इससे कपड़ा उत्पादन में बड़ी गिरावट आई है।  

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Work stopped in sizing factories powerloom industry is coming to a standstill in Kishangarh
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : Social Media

विस्तार

कोरोना काल में अपने को जीवित रख कर पटरी पर वापस आने वाले पावरलूम उद्योग का जायका एक बार फिर बिगड़ रहा है। साइजिंग फैक्ट्रियों में काम बंद होने के कारण लूमों को कच्चा माल नहीं मिल पा रहा है, इससे शहर की अधिकांश फैक्टियां बंद होने के कगार पर पहुंच गई हैं। 

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हालात यह है कि करीब 80 प्रतिशत फैक्ट्रियां एक शिफ्ट में ही संचालित हो रही हैं। कई छोटी फैक्ट्रियों ने ताले भी लगा दिए हैं। शहर में हर रोज होने वाले 80 हजार किलो कपड़े का उत्पादन घटकर सिर्फ 12 से 15 हजार किलो ही रह गया है। अगर कच्चे माल नहीं मिला तो हालात और खराब हो सकते हैं।  
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सिर्फ एक साइजिंग फक्ट्री चल रही 
पावरलूम उद्योग में कच्चा माल साइजिंग फैक्ट्रियों से आता है। यहां से आए धागे के बीम बनकर पावरलूम फैक्ट्री में लगते हैं और फिर इन्हीं सूती कपड़ा बनाया जाता है। साइजिंग फैक्ट्री में काम आने वाले यार्न में मिलाए जाने वाले विस्कोस (सिंथेटिक) की मात्रा को लेकर श्रमिकों ने अभी काम करना बंद कर रखा है।
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उनका कहना है कि सिंथेटिक की मात्रा ज्यादा होने के कारण स्वास्थ्य खराब हो रहा है। किशनगढ़ में करीब दस साइजिंग फैक्ट्रियां हैं। एक फैक्ट्री में हर महीने एक लाख से सवा लाख किलो धागे का उत्पादन होता है, लेकिन अभी हालात यह हैं कि सिर्फ एक फैक्ट्री में काम चल रहा है। इससे पावरलूम फैक्ट्रियों धागा नहीं मिल पा रहा है।  

हजारों लोगों को मिलता है रोजगार 
शहर में पांच हजार से ज्यादा पावरलूम मशीनों से हजारों लोग रोजी-रोटी कमाते हैं। कच्चा माल नहीं मिलने के कारण इन फैक्ट्रियों में तीन की जगह सिर्फ एक शिफ्ट में काम हो रहा है। इससे मजदूरों के साथ व्यवसाय से जुड़े हजारों लोग बेरोजगारी की राह पर आ गए हैं। फैक्ट्री मालिक के हालात भी चिंताजनक हैं। 

सिंथेटिक की ज्यादा मात्रा, बनी परेशानी  
जानकारी के अनुसार कॉटन यार्न में पहले 20 से 30 फीसदी सिंथेटिक मिला हुआ होता था, लेकिन अब इसकी मात्रा 50 से 60 फीसदी तक पहुंच गई है। साइजिंग श्रमिक इसका लगातार विरोध कर रहे हैं। उनकी मांग है कि साइजिंग मालिक बिना विस्कोस का माल मगाएं। ऐसा नहीं होने पर साइजिंग श्रमिकों काम बंद कर दिया। 


बैठक से जागी उम्मीद
साइजिंग फैक्ट्रियों में आने वाले कॉटन यार्न में सिंथेटिक की मात्रा ज्यादा आने को लेकर मजदूरों ने श्रम विभाग से मदद की गुहार लगाई है। साइजिंग श्रमिकों के प्रतिनिधिमंडल ने बीते दिन बुधवार को श्रम निरीक्षक मूलचंद से मिला और अपनी समस्या बताई। मूलचंद ने साइजिंग एसोसिएशन के पदाधिकारी और श्रमिकों के बीच बैठक का आयोजन किया। इस बैठक के बाद हालात सुधरने की उम्मीद जताई जा रही है। 

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