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Rajasthan: 12 करोड़ का सोना और 11 लाख लूटने वाले दो आरोपी पकड़ाए, छात्र बन किराए पर रहे, रैकी कर की थी वारदात
Fri, 21 Oct 2022 10:22 PM IST
उदित दीक्षित
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, उदयपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, उदयपुर
Published by: उदित दीक्षित
Updated Fri, 21 Oct 2022 10:22 PM IST
सार
आईजी ने बताया कि बदमाशों का ग्रुप वारदात से करीब 15 दिन पहले बिहार से उदयपुर पहुंचा था। फर्जी आधार कार्ड से छात्र बनकर उन्होंने किराए पर कमरा लिया था। वारदात से पहले बदमाशों ने घटनास्थल की रेकी की थी।
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पुलिस गिरफ्त में आरोपी।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजस्थान के उदयपुर जिले के प्रताप नगर थाना पुलिस ने सुंदरवास स्थित मणप्पुरम गोल्ड लोन कंपनी में हुई लूट का खुलासा कर दिया है। 29 अगस्त को पांच हथियारबंद बदमाशों ने कंपनी से 12 करोड़ का सोना और 11 लाख रुपये की लूट की वारदात को अंजाम दिया था। मामले में पुलिस ने बिहार के रहने वाले दो आरोपी प्रिंस कुमार और फंटूश कुमार को चित्तौड़गढ़ के निंबाहेड़ा क्षेत्र से गिरफ्तार किया है।
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घटना के बाद बिहार भाग गए दोनों आरोपी राजस्थान में दूसरी वारदात को अंजाम देने के लिए रैकी करने आए थे। पुलिस की टीम दोनों आरोपियों से वारदात में शामिल अन्य आरोपियों औरे लूटे गए जेवरात व नगदी के लिए पूछताछ कर रही है।
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आईजी उदयपुर प्रफुल्ल कुमार ने बताया कि 29 अगस्त को सुंदरवास स्थित मणप्पुरम गोल्ड लोन कंपनी में डकैती की वारदात पुलिस के लिए चुनौती बन गई थी। घटना का खुलासा करने के लिए एसपी विकास शर्मा के सुपरविजन 64 पुलिसकर्मियों की एक विशेष टीम गठित की गई थी।
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टीम ने अपराधियों के घटनास्थल पर पहुंचने, वापस भागने और घटना से पूर्व आने-जाने के रास्तों का पता लगाने के लिए विभिन्न रास्तों पर लगे सीसीटीवी फुटेज व बीटीएस डिटेल का विश्लेषण किया। इस दौरान टीम उस स्थान पर पहुंची जहां आरोपी घटना से पहले किराए पर रह रहे थे। मकान में मिले सबूत जब्त कर आस-पड़ोस, मकान मालिक और दुकानदारों आदि से भी पूछताछ की गई। संदिग्ध मोबाइल नंबर का कॉल डिटेल निकाले गए।
इस दौरान आरोपियों का विहार भगाने का पता चला। जिसके बाद एक पुलिस की एक टीम को पटना भेजा गया। स्थानीय पुलिस और मुखबिरों के सहयोग से आरोपी प्रिंस कुमार और फंटूश कुमार के बारे में जानकारी मिली। पता चला कि दोनों आरोपी दूसरी वारदात की रेकी के लिए राजस्थान पहुंचे हैं। गुरुवार को टीम ने निंबाहेड़ा से दोनों आरोपियों को हथियार के साथ गिरफ्तार कर लिया।
आईजी ने बताया कि दोनों आरोपियों से पूछताछ में सामने आया कि बदमाशों का ग्रुप वारदात से करीब 15 दिन पहले बिहार से उदयपुर पहुंचा था। फर्जी आधार कार्ड से छात्र बनकर उन्होंने किराए पर कमरा लिया। इन आधार कार्ड पर पश्चिम बंगाल के मालदा से सिम कार्ड भी जारी करवाए गए। वारदात से पहले बदमाशों ने घटनास्थल की रेकी की। साथ ही वारदात को अंजाम देने के लिए जीपीएस ट्रैकर, जैमर, वाईफाई कॉलिंग और वायरलेस कम्युनिकेशन जैसे साधनों का इस्तेमाल किया था।
आईजी प्रफुल्ल कुमार ने बताया कि पकड़े गए आरोपियों से उनके साथियों के बारे में जानकारी नहीं मिल सकी है। यह दोनों उनके वास्तविक नाम और पते नहीं जानते हैं। इससे पहले आरोपियों ने 6 अगस्त को उड़ीसा के दिन ढेंकेनाल शहर में मणिपुर गोल्ड लोन कंपनी में वारदात का प्रयास किया था, लेकिन सायरन बजने से असफल हो गए। अपनी इस असफलता से सीख लेते हुए उदयपुर की वारदात में उन्होंने तकनीक का प्रयोग किया।