भारतीय जवानों की रेगिस्तान में जांबाजी देखकर हैरत में पड़ गए पाकिस्तानी रेंजर्स
फिट इंडिया अभियान’ के प्रति जागरूकता को एक नई ऊंचाई देने के लिए आईटीबीपी ने खेल मंत्रालय के साथ मिलकर जैसलमेर में ‘फिट इंडिया मिशन 200 किलोमीटर’ का आयोजन किया है...
विस्तार
आईटीबीपी डीजी एसएस देसवाल सहित केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के करीब सौ अफसरों ने शनिवार को जैसलमेर से लगे भारत-पाकिस्तान बॉर्डर के रेगिस्तान में जब चलना शुरू किया तो पाकिस्तानी रेंजर्स देखते रह गए। वे हैरान थे कि भारत के इतने अफसर, वो भी एक साथ बॉर्डर के इलाके में क्यों आए हैं। बीएसएफ, सीआरपीएफ, एनडीआरएफ, आरएएफ, असम राइफल्स, एनएसजी और राजस्थान पुलिस के अफसर तेज कदमों से आगे बढ़ रहे थे।
पाकिस्तानी रेंजर्स अपने कैमरों के जरिए सारा नजारा देख रहे थे। दरअसल, फिट इंडिया अभियान’ के प्रति जागरूकता को एक नई ऊंचाई देने के लिए आईटीबीपी ने खेल मंत्रालय के साथ मिलकर जैसलमेर में ‘फिट इंडिया मिशन 200 किलोमीटर’ का आयोजन किया है।
युवा मामले एवं खेल राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) किरण रिजिजू ने इस अभियान को फ्लैग ऑफ किया है। बॉर्डर के इलाकों में अपनी तरह के इस पहले 200 किलोमीटर के फिटनेस मार्च में एसएस देसवाल, डीजी आईटीबीपी के नेतृत्व में सीमा सुरक्षा बल, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, एनडीआरएफ, आरएएफ, असम राइफल्स, एनएसजी के अलावा राजस्थान पुलिस और मध्यप्रदेश पुलिस के सौ अधिकारी भाग ले रहे हैं।
विद्युत् जामवाल, अभिनेता, स्टंट परफॉर्मर व मार्शल आर्टिस्ट भी इस मार्च का हिस्सा हैं। फिटनेस मार्च का मकसद राष्ट्रीय एकता का संदेश देना है। इस अभियान के तहत पैदल मार्च, जैसलमेर में तनोट मंदिर के नाथुवाला गांव से शुरू होकर सकिरेवाला, भुट्टेवाला और कटोच होते हुए इंदिरा गांधी नहर के साथ-साथ 200 किलोमीटर का पैदल रास्ता तय करते हुए रिवर डिवीजन 1458 पॉइंट पर 2 नवंबर को समाप्त होगा। इस मार्ग पर 50 किलोमीटर से ज्यादा रास्ता रेत के टीलों से होकर गुजरेगा।
इस मार्ग का अधिकतर हिस्सा अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगा हुआ है। यहां कई ऐतिहासिक लड़ाई हुई हैं। रास्ते में ही किशनगढ़ का मशहूर किला भी है। रूट का दूसरा हिस्सा इंदिरा गांधी नहर के साथ-साथ चलता है। आईटीबीपी का यह फिटनेस मार्च भारत सरकार के फिट इंडिया मूवमेंट के प्रति ज्यादा से ज्यादा जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से आयोजित हो रहा है। इस साल फिट इंडिया फ्रीडम रन में आईटीबीपी को नोडल एजेंसी नामित किया गया था।
डीजी देसवाल, लगभग 2 वर्ष में इससे पहले दर्जनों ऐसे मार्च का नेतृत्व कर चुके हैं। इनमें हिमालय से लेकर रेगिस्तान और उत्तर पूर्व से समुद्र के किनारों पर आयोजित मार्च भी शामिल हैं। वे लिपुलेख, सांगला घाटी में 103 किलोमीटर, औली तपोवन, गंगोत्री तपोवन, भुज, कोणार्क पुरी, राजस्थान और पंजाब सीमा, जोधपुर बीकानेर में मिशन 100, और फूलों की घाटी में आयोजित मार्च में भाग ले चुके हैं।