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Sirohi News: बीए, बीएससी और डॉक्टर समेत 100 ब्रह्मचारिणी बेटियां बनेंगी ब्रह्माकुमारी, अपनाएंगी अध्यात्म

Thu, 19 Jun 2025 10:50 PM IST
सिरोही ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिरोही
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिरोही Published by: सिरोही ब्यूरो Updated Thu, 19 Jun 2025 10:50 PM IST
सार

ब्रह्माकुमारीज से जुड़ने की शुरुआत राजयोग मेडिटेशन के सात दिवसीय कोर्स से होती है, जो संस्थान के देश-विदेश में स्थित सेवाकेंद्रों पर निःशुल्क सिखाया जाता है। राजयोग ध्यान ब्रह्माकुमारीज की शिक्षा का मुख्य आधार है।

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100 BA, BSc, Doctor Brahmacharini daughters become Brahma Kumaris and adopt path of spirituality
ब्रह्माकुमारीज संस्थान में कल शुक्रवार को अलौकिक दिव्य समर्पण समारोह।

विस्तार

उच्च शिक्षित सौ से अधिक ब्रह्मचारिणी बेटियां संयम पथ पर चलते हुए ब्रह्माकुमारी बनने जा रही हैं। देशभर से पहुंची इन बेटियों ने बीए, बीएससी, बीकॉम और डॉक्टरेट करने के बाद अध्यात्म की राह अपनाई है। ब्रह्माकुमारीज संस्थान के अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय शांतिवन के डायमंड हॉल में 20 जून को शाम 6 बजे से इन बेटियों का अलौकिक दिव्य समर्पण समारोह आयोजित किया जाएगा। इसमें सौ से अधिक बेटियां पांच हजार से अधिक लोगों की मौजूदगी में विश्व कल्याण का संकल्प लेंगी। साथ ही आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत को धारण करते हुए परमात्मा शिव को अपने जीवनसाथी के रूप में स्वीकार करेंगी।
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शाम 5 बजे से शांतिवन में शोभायात्रा निकाली जाएगी, जिसमें सज-धजकर सभी बहनें और उनके माता-पिता, परिजन शामिल होंगे। इसके बाद डायमंड हॉल में विधि-विधान से इन बेटियों के समर्पण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। समर्पण से एक दिन पूर्व अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी बीके मुन्नी दीदी व संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी बीके संतोष दीदी ने इन बेटियों और परिजनों से एक-एक कर मुलाकात की। समर्पण समारोह में इन बेटियों के माता-पिता अपनी-अपनी लाड़लियों के हाथ संस्थान की अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी मुन्नी दीदी व संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी संतोष दीदी के हाथों में सौंपेंगे। इसके बाद से इन बेटियों की जिम्मेदारी ब्रह्माकुमारीज की हो जाएगी। मन-वचन-कर्म से संपूर्ण समर्पण के साथ ईश्वरीय नियमों का पालन करते हुए वे सेवाएं प्रदान करेंगी।
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राजयोग मेडिटेशन से होती है शुरुआत
ब्रह्माकुमारीज से जुड़ने की शुरुआत राजयोग मेडिटेशन के सात दिवसीय कोर्स से होती है, जो संस्थान के देश-विदेश में स्थित सेवाकेंद्रों पर निःशुल्क सिखाया जाता है। राजयोग ध्यान ब्रह्माकुमारीज की शिक्षा का मुख्य आधार है। राजयोग की शिक्षा ही संस्था का मूल आधार और उद्देश्य है। संस्थान का मुख्य नारा है– "स्व परिवर्तन से विश्व परिवर्तन। हम बदलेंगे, जग बदलेगा।" नैतिक मूल्यों का पुनरुत्थान और भारत की पुरातन स्वर्णिम संस्कृति की स्थापना करना।

5 साल सेवाकेंद्र पर रहने के बाद होता है चयन
राजयोग मेडिटेशन कोर्स के बाद छह माह तक नियमित सत्संग, राजयोग ध्यान के अभ्यास के बाद सेंटर इंचार्ज दीदी द्वारा सेवाकेंद्र पर रहने की अनुमति दी जाती है। तीन साल तक सेवाकेंद्र पर रहने के दौरान संस्थान की दिनचर्या और गाइडलाइन का पालन करना जरूरी होता है। बहनों का आचरण, चाल-चलन, स्वभाव, व्यवहार देखा-परखा जाता है। इसके बाद ट्रायल के लिए अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय शांतिवन, आबू रोड के लिए माता-पिता की अनुमति पत्र, साइन के साथ पूरी प्रोफाइल भेजी जाती है। ट्रायल पीरियड के दो साल बाद फिर ब्रह्माकुमारी के रूप में समर्पण की प्रक्रिया पूरी की जाती है। समर्पण के बाद फिर बहनें पूर्ण रूप से सेवाकेंद्र के माध्यम से ब्रह्माकुमारी के रूप में अपनी सेवाएं देती हैं।

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अब तक 50 हजार ब्रह्माकुमारी बहनें विश्वभर में समर्पित
वर्ष 1937 में ब्रह्माकुमारीज़ की नींव रखी गई। तब से लेकर अब तक 87 वर्षों में संस्थान में 50 हजार ब्रह्माकुमारी बहनों ने अपना जीवन मानव सेवा के लिए समर्पित किया है। ये बहनें तन-मन-धन के साथ समाज सेवा, विश्व कल्याण और सामाजिक, आध्यात्मिक सशक्तिकरण के कार्य में जुटी हैं।

दो साल पूर्व हुआ था विशाल समर्पण समारोह
इसके पूर्व मुख्यालय शांतिवन में ही 29 जून 2023 को ब्रह्माकुमारीज़ के इतिहास का सबसे बड़ा समर्पण समारोह आयोजित किया गया था, जिसमें 450 बेटियों ने एक साथ अपना जीवन समर्पित किया था। इनमें कुछ बहनें सीए, एमटेक और डॉक्टरेट डिग्री धारक थीं।

सभी बहनों को कराए जाते हैं ये मुख्य तीन संकल्प
इसमें बहनें दुल्हन की तरह सज-धजकर स्टेज पर बैठती हैं, जहां उनसे वरिष्ठ दीदियां संकल्प कराती हैं। सभी को एक-एक संकल्प पत्र दिया जाता है। ये हैं तीन संकल्प... 
  • मैं आज से मन-वचन-कर्म से परमात्मा को अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर रही हूं। आज मैं परमात्मा शिव को साजन, पति के रूप में स्वीकार करती हूं। मैं यह निर्णय अपनी स्वेच्छा से ले रही हूं।
  • मैं सदा इस ईश्वरीय यज्ञ के बनाए नियम-मर्यादाओं में रहकर चलूंगी, सेवा करूंगी और सदा अपनी आध्यात्मिक उन्नति के लिए योग-साधना को अपने जीवन का लक्ष्य बनाऊंगी।
  • इस ईश्वरीय यज्ञ, परिवार की वरिष्ठ दीदियां ईश्वरीय सेवा के लिए जहां रहने, सेवा करने के लिए कहेंगी, वहां खुशी-खुशी सेवा के लिए जाने को तैयार रहूंगी। विपरीत परिस्थिति में भी खुश रहते हुए सेवा के लिए हर बात में ‘हां जी’ का पाठ पक्का करूंगी। भगवान के घर में जो खाने-पीने को मिलेगा, उसका सदा खुश रहकर स्वीकार करूंगी।
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