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राजस्थान: मंदिर मुद्दे पर संघ और सरकार आमने-सामने

Wed, 08 Jul 2015 12:23 AM IST
Updated Wed, 08 Jul 2015 12:23 AM IST
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RSS targets Rajasthan government on Temple issue.

राजस्थान में संघ और भाजपा सरकार आमने-सामने हो गए हैं। मुद्दा है पिंक सिटी के नाम से जानेजाने वाले पुराने शहर सहित पूरे जयपुर से 65 मंदिर हटाने का।

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हटाए गए मंदिर में 250 साल पुराना मंदिर तक शामिल है और कुछ 100 साल पुराने भी। संघ के सक्रिय होने के बाद अब कुछ विधायक भी विरोध कर रहे हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर कुछ दिन तक निशाने पर रहीं मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के सामने दूसरा मामला खड़ा हो गया है। उन्होंने कलक्टर, जयपुर विकास प्राधिकरण आयुक्त सहित अन्य अधिकारियों पर नाराजगी जताई कि 13 मंदिर हटाने की बात की गई थी, फिर बिना जानकारी के इतने कैसे हटा दिए?
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की राजस्थान इकाई ने विरोध में जयपुर में बृहस्पतिवार को चक्का जाम का ऐलान किया है।

इस मुद्दे पर सरकार भारी दबाव में है और निर्देश जारी किए हैं कि अब कोई भी धार्मिक स्थल स्वायत्त शासन मंत्री, स्थानीय विधायक और जनप्रतिनिधियों की मंजूरी के बिना नहीं हटाएगा। मामले के तहत भाजपा की सरकार आने के बाद से जयपुर में मैट्रो के ट्रैक के फेज वन बी के नाम पर, स्थानीय प्रशासन और जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने ट्रेफिक को सुगम बनाने व अतिक्रमण कर बनाए गए मंदिरों को हटाने के लिए 65 मंदिर दूसरे स्थानों पर शिफ्ट करवा दिए।
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सीएम भी अधिकारियों से नाराज

RSS targets Rajasthan government on Temple issue.

विरोध तब हुआ, जब मेट्रो ट्रेक के लिए चांदपोल से बड़ी चौपड़ के बीच 250 वर्ष पुराना रोजगारेश्वर मंदिर और चांदपोल स्थित 100 वर्ष पुराने दो मंदिर हटाए गए। मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा दूसरे स्थान पर करवाई गई।

हालांकि जेडीए और नगर निगम ने सूझबूझ दिखाते हुए समझौता करके मंदिर हटाए, जिससे विरोध नाम मात्र का रहा। लेकिन मेट्रो के लिए हटाए गए मंदिरों के लिए मेट्रो के अधिकारियों ने कार्रवाई से पहले किसी तरह की बातचीत नहीं की।

देरी से शुरु हुआ विरोध
मजे की बात यह रही कि मंदिरों पर करीब डेढ़-दो वर्ष से हो रही इस कार्रवाई का कोई कड़ा विरोध सामने नहीं आया।

जयपुर शहर भाजपा का गढ़ माना जाता है और इस समय यहां की सभी नौ सीटों पर भाजपा के विधायक हैं। नगर निगम में भी भाजपा का कब्जा है, लेकिन न विधायकों की तरफ से कोई विरोध हो रहा था और न ही पार्षद विरोध कर रहे थे। लेकिन सरकार के इस कदम से स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं में गुस्सा भी रहा और चिंता रही, क्योंकि शहर में धीरे-धीरे भाजपा की छवि मंदिर तोड़ने वाली पार्टी की बनती जा रही है।

कार्यकर्ताओं ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व जयपुर शहर की सीट से विधायक अशोक परनामी के सामने विरोध जताने पर भी कार्रवाई नहीं रुकी। पार्टी स्तर पर सुनवाई नहीं हुई तो बात राष्ट्रीय स्वयं संघ की प्रदेश इकाई आगे आ गई है।

विधायकों को संघ की फटकार

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संघ ने जयपुर के सभी विधायकों को फटकार लगा कर कहा है कि जयपुर में भाजपा के राज में ही इतनी बडी कार्रवाई हो गई और हैरानी रही कि सभी विधायक चुप बैठे रहे। संघ की नाराजगी देख विधायक नरपत सिंह राजवी ने सीएम को पत्र लिखकर कार्रवाई का विरोध जताया और भी संघ निष्ठ विधायकों व मंत्रियों ने सीएम के सामने कार्यकर्ताओं व संघ की भावना से अवगत करवाया।

दोषियों पर कार्रवाई की चेतावनी
नगरीय विकास मंत्री राजपाल सिंह शेखावत ने सीएम की नाराजगी देख अधिकारियों को चेतावनी दी है कि मंदिर हटाने की कार्रवाई गलत पाई गई, तो दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। उनके अनुसार दो दर्जन से अधिक मंदिर बना जानकारी के तोड़े गए हैं। कलक्टर, जेडीए आयुक्त, मेट्रो प्रशासन चुप्पी साधे है और मीडिया से बात करने से कतरा रहे हैं।

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