राजस्थान: उदयपुर जेल में बदमाश को वीआईपी सुविधाएं देने के मामले में तीन गिरफ्तार, नेटवर्क की जांच तेज
उदयपुर सेंट्रल जेल में कुख्यात हिस्ट्रीशीटर नरेश हरिजन को वीआईपी सुविधाएं देने के मामले में पुलिस ने तीन बंदियों को गिरफ्तार किया है। तलाशी में मोबाइल, टीवी और इंडक्शन मिले थे। पुलिस अब उपकरणों की सप्लाई और जेलकर्मियों की भूमिका जांच रही है।
विस्तार
सेंट्रल जेल में कुख्यात हिस्ट्रीशीटर नरेश हरिजन को वीआईपी सुविधाएं उपलब्ध कराने के मामले में पुलिस ने तीन बंदियों को गिरफ्तार किया है। भूपालपुरा थानाधिकारी रतनसिंह चौहान ने बताया कि पुलिस मामले की जांच करते हुए लगातार पूछताछ और साक्ष्य जुटा रही थी। इसी आधार पर एकलव्य कॉलोनी निवासी निखिल रावत, उसके भाई विशाल रावत और महावतवाड़ी निवासी सोहेल उर्फ अन्ना को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस को उम्मीद है कि आरोपियों से पूछताछ में जेल के भीतर चल रहे नेटवर्क और अवैध गतिविधियों से जुड़े अहम खुलासे हो सकते हैं।
तलाशी में मोबाइल, टीवी और इंडक्शन बरामद
पुलिस की कार्रवाई से जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया है। 15 सितंबर को पुलिस टीमों ने सेंट्रल जेल की विभिन्न बैरकों में अचानक सघन तलाशी अभियान चलाया था। इस दौरान कुख्यात बंदी नरेश की सेल से मोबाइल, टीवी और इंडक्शन समेत कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य सामान बरामद हुए थे। जांच में सामने आया कि जेल में बंदियों को नियमों के विरुद्ध सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही थीं। इस मामले ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
पढ़ें: जोधपुर एयरबेस पर गरजे लड़ाकू विमान, राजनाथ सिंह ने देखा भारतीय वायुसेना का दम
डेटा केबल से मोबाइल चार्ज करने का खुलासा
पूछताछ के दौरान विशाल रावत ने स्वीकार किया कि उसने अपने बिस्तर के नीचे से डेटा केबल निकालकर मोबाइल चार्ज किया था। उसने यह भी बताया कि मोबाइल मुख्य रूप से कुख्यात बदमाश नरेश का था। तलाशी के दौरान बीड़ी-सिगरेट, एक थैली में रखा इलेक्ट्रॉनिक बीपी इंस्ट्रूमेंट और एक एडाप्टर भी बरामद किया गया था। इसके अलावा, बैरक की दीवार पर एलईडी टीवी लगी मिली थी, जबकि एक प्लेटफॉर्म पर इंडक्शन रखा हुआ था।
सीसीटीवी की डीवीआर से मोबाइल चार्ज करने का मामला
जांच में सामने आया कि जेल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की डीवीआर से मोबाइल चार्ज किया जा रहा था। कुख्यात बदमाश नरेश लंबे समय से उदयपुर के अपराध जगत में सक्रिय रहा है। वर्ष 2014 में हुए चर्चित प्रवीण पालीवाल हत्याकांड में भी उसका नाम मुख्य सूत्रधार के रूप में सामने आया था। पुलिस अब जांच कर रही है कि जेल के भीतर मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण किस तरह पहुंचाए गए। साथ ही, मामले में जेलकर्मियों की संभावित संलिप्तता की भी पड़ताल की जा रही है।