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राजस्थान: भरण-पोषण की वसूली की 12 महीने की सीमा आदेश की तारीख से होगी लागू, राजस्थान हाईकोर्ट का अहम फैसला

Fri, 23 Oct 2026 12:20 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर Published by: शबाहत हुसैन Updated Fri, 23 Oct 2026 12:20 PM IST
सार

राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पूर्व प्रभाव से निर्धारित अंतरिम भरण-पोषण की वसूली के लिए 12 महीने की सीमा अवधि आदेश पारित होने की तारीख से गिनी जाएगी। न्यायमूर्ति फरजंद अली की पीठ ने पति की याचिका खारिज कर दी।

 

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Rajasthan: The 12-month limit for the recovery of maintenance will apply from the date of the order.
राजस्थान हाईकोर्ट - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

राजस्थान हाईकोर्ट ने भरण-पोषण के बकाये की वसूली को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 125(3) के तहत पूर्व प्रभाव से अंतरिम भरण-पोषण का आदेश दिए जाने पर वसूली के लिए 12 महीने की सीमा अवधि की गणना आदेश पारित होने की तारीख से की जाएगी, न कि उन पुराने महीनों से जिनके लिए भरण-पोषण निर्धारित किया गया है। न्यायमूर्ति फरजंद अली की पीठ ने हेतराम की याचिका खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया। इस निर्णय से भरण-पोषण की वसूली के मामलों में महिलाओं को राहत मिली है।

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यह था मामला
प्रतिवादी पत्नी और उसकी नाबालिग पुत्री ने श्रीगंगानगर जिले के घड़साना स्थित एसीजेएम न्यायालय में सीआरपीसी की धारा 125(3) के तहत आवेदन दायर कर 2.20 लाख रुपये के अंतरिम भरण-पोषण के बकाये की वसूली की मांग की थी। निचली अदालत ने 4 जून 2022 को आदेश दिया कि पत्नी को 5 अगस्त 2020 यानी आवेदन दायर करने की तारीख से 5,000 रुपये प्रतिमाह की दर से अंतरिम भरण-पोषण दिया जाए। इस आधार पर अगस्त 2020 से जून 2022 तक करीब 22 महीने की राशि बकाया हो गई।
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पति ने 12 महीने से अधिक पुराने बकाये पर जताई आपत्ति
पति ने वसूली की कार्रवाई का विरोध करते हुए तर्क दिया कि कानून के तहत 12 महीने से अधिक पुराने भरण-पोषण के बकाये की वसूली नहीं की जा सकती। निचली अदालत ने वसूली के लिए कृषि भूमि कुर्क करने का वारंट जारी किया था। इसके बाद पति ने हाईकोर्ट का रुख किया।


आदेश पारित होने की तारीख से गिनी जाएगी सीमा अवधि
दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि 4 जून 2022 को आदेश पारित होने से पहले संबंधित राशि कानूनी रूप से देय और वसूली योग्य नहीं हुई थी। अदालत के आदेश के बाद ही पूर्व प्रभाव से निर्धारित भरण-पोषण की बकाया राशि की वसूली का अधिकार प्रभावी हुआ।

अदालत ने यह भी ध्यान दिया कि पत्नी ने आदेश पारित होने के बाद 27 जून 2022 को ही वसूली के लिए आवेदन कर दिया था। यानी आवेदन आदेश के एक महीने के भीतर किया गया था। ऐसे में वसूली की अर्जी निर्धारित सीमा अवधि के भीतर थी। हाईकोर्ट ने पति की याचिका खारिज कर दी। अदालत के फैसले के अनुसार, पूर्व प्रभाव से भरण-पोषण निर्धारित किए जाने पर केवल इस आधार पर वसूली का आवेदन खारिज नहीं किया जा सकता कि बकाया राशि 12 महीने से अधिक पुरानी अवधि से संबंधित है, यदि वसूली के लिए आवेदन आदेश पारित होने के बाद निर्धारित समय सीमा में किया गया हो।

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