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Rajasthan: MP पुलिस से तंग आकर की खुदकुशी, शव लेकर थाने पहुंचे तो परिवार-ग्रामीणों पर लाठीचार्ज, जानें मामला

Wed, 02 Nov 2022 11:03 PM IST
उदित दीक्षित न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा Published by: उदित दीक्षित Updated Wed, 02 Nov 2022 11:03 PM IST
सार

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले दागे, इसके बाद भी भीड़ काबू नहीं हुई तो लाठीचार्ज कर दिया। जिससे प्रदर्शनकारी भड़क गए, उन्होंने भी पत्थरबाजी कर दी। जिसमें पुलिस की गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गईं। पुलिस की लाठीचार्ज से महिलाएं और बच्चों के भी चोटिल होने की जानकारी सामने आई है।  

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Rajasthan News Kota Farmer Consume Poison After MP Police Harassment
पुलिस ने लाठियों से महिलाओं को भी पीटा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश पुलिस की प्रताड़ना से परेशान होकर राजस्थान के कोटा जिले में रहने वाल एक व्यक्ति ने आत्महत्या कर ली। बुधवार को मृतक के परिजन शव लेकर एमपी के श्योरपुर पहुंचे और धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। करीब एक घंटे तक परिजन सहित 500 ग्रामीण न्याय की मांग को लेकर आंदोलन करते रहे।

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मामला बढ़ता देख पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले दाग दिए,  इसके बाद भी भीड़ काबू नहीं हुई तो लाठीचार्ज कर दिया। जिससे प्रदर्शनकारी भड़क गए, उन्होंने भी पत्थरबाजी कर दी। जिसमें पुलिस की गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गईं। पुलिस की लाठीचार्ज से महिलाएं और बच्चों के भी चोटिल होने की जानकारी सामने आई है।  
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परिवार का आरोप है कि मध्य प्रदेश पुलिस ने उनकी एक गाड़ी जब्त कर रखी है। उसे छोड़ने के एवज में रुपए मांग रहे थे। झूठा केस भी बना दिया। सुसाइड से पहले किसान ने सोशल मीडिया पर लिखा- मेरी अर्थी को तब तक मत उठाना। जब तक इंसाफ नहीं मिल जाए। दारू का केस झूठा है।
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जानिए क्या है मामला? 
परिजनों के अनुसार 25 अक्टूबर को कोटा के खातौली निवासी मृतक धर्मेंद्र पारेता (45) जालपुरा में ताश खेलने के लिए गया था। इस दौरान पुलिस ने छापा मारा और तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन धर्मेंद्र और उसके साथी वहां से भाग निकले। इस बीच धर्मेंद्र की गाड़ी वहीं छूट गई, जिसे पुलिस ने जब्त कर लिया। 

इसी दिन शाम को धर्मेंद्र का बेटा दीपक पारेता जलालपुरा चौकी पहुंचा और जब्त की गई गाड़ी छुड़ाने को लेकर जानकारी ली। परिजनों का आरोप है कि चौकी में मौजूद एसआई श्यामवीर ने पहले तो गाड़ी छोड़ने के लिए मना किया, फिर 20 हजार रुपये देने पर गाड़ी छोड़ने की बात कही। दीपक ने रुपये नहीं होने की बात कही तो एसआई ने शराब और गांजा के केस में फंसा देने की बात कही। परिजनों ने अनुसार 26 अक्टूबर को पुलिस ने कार से शराब बरामद होने की बात कहकर झूठा केस बना दिया। इसके बाद पीड़ित परिवार के लोग एक बार फिर थाने पहुंचे तो एसआई ने 2 लाख रुपये की मांग कर दी।

परिजनों का कहना है कि झूठा केस दर्ज होने के बाद से धर्मेंद्र पारेता परेशान था। 29 अक्टूबर को धर्मेंद्र ने आत्महत्या करने की कोशिश की और हाथ की नसे काट ली। समय रहते परिजनों ने उसे अस्पताल पहुंचाया जिससे उसकी जान बच गई। बीते मंगलवार को धर्मेंद्र ने खेत पर फसलों में छिड़काव करने वाली दवा पी ली। 


जिसके बाद वॉट्सऐप पर बेटी को मैसेज कर कहा कि पुलिस वालों ने उस पर झूठा केस लगाया है। जानकारी लगने पर परिजन खेत पर पहुंचे और धर्मेंद्र को अस्पताल में भर्ती कराया। जहां इलाज के दौरान शाम को उसकी मौत हो गई। बुधवार सुबह पीएम होने के बाद परिजन और गांव वाले शव को 250 किलोमीटर दूर मध्य प्रदेश के जलालपुरा लेकर गए और थाने के बाहर प्रदर्शन करने लगे। करीब एक घंटे बाद पुलिस ने करीब 500 लोगों की भीड़ पर आंसू गैस के गोले दागे और लाठीचार्ज कर दिया। हालांकि, रिश्वत मांगने और झूठा केस दर्ज करने को लेकर पुलिस का कहना है कि मृतक के परिजन गलत आरोप लगा रहे हैं। 

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