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पूर्वी राजस्थान में निर्दलीयों की आंधी: भाजपा-कांग्रेस का खेल बिगड़ा; कहीं किंगमेकर तो कहीं बहुमत के पार
Mon, 14 Sep 2026 05:00 PM IST
प्रतीक पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: प्रतीक पांडेय
Updated Mon, 14 Sep 2026 05:00 PM IST
सार
राजस्थान नगर निकाय चुनाव के नतीजों में कई शहरों में निर्दलीयों ने भाजपा और कांग्रेस दोनों को बड़ा झटका दिया है। भरतपुर और हनुमानगढ़ में निर्दलीय बहुमत के आंकड़े को पार कर गए, जबकि पोकरण, पाली, अजमेर, दौसा और जोधपुर में बोर्ड गठन का गणित निर्दलीयों के इर्द-गिर्द घूम रहा है।
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राजस्थान नगरीय निकाय चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव के नतीजों ने भाजपा और कांग्रेस दोनों को कई जगहों पर चौंका दिया है। मुकाबला सिर्फ दोनों पार्टियों के बीच नहीं रहा। कई शहरों में निर्दलीयों ने ऐसा प्रदर्शन किया है कि अब बोर्ड बनाने के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों को उन्हीं का दरवाजा खटखटाना पड़ सकता है। सबसे दिलचस्प तस्वीर भरतपुर और हनुमानगढ़ में है, जहां निर्दलीय पार्षदों की संख्या भाजपा और कांग्रेस से ज्यादा है। वहीं पोकरण, पाली, अजमेर, दौसा और जोधपुर जैसे निकायों में भी निर्दलीयों के बिना बोर्ड बनाना आसान नहीं होगा।
पोकरण में दो निर्दलीयों पर टिका बोर्ड
पोकरण नगर पालिका के 25 वार्डों में कांग्रेस को 12 और भाजपा को 11 सीटें मिली हैं। दो सीटों पर निर्दलीय जीते हैं। बहुमत के लिए 13 पार्षद चाहिए। कांग्रेस को बहुमत के लिए एक सीट की जरूरत है। ऐसे में दोनों निर्दलीय अहम हो गए हैं।
भरतपुर में निर्दलीय सबसे बड़ा समूह
भरतपुर नगर निगम में 65 वार्डों में 36 सीटों पर निर्दलीय जीते हैं। भाजपा के खाते में 20 और कांग्रेस को सात सीटें मिली हैं। बहुमत का आंकड़ा 33 है। निर्दलीय अकेले ही इससे तीन सीट ज्यादा जीत चुके हैं। यानी वे अपने दम पर बोर्ड बनाने की स्थिति में हैं।
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हनुमानगढ़ में भी निर्दलीयों की मजबूत पकड़
हनुमानगढ़ नगर परिषद में 60 वार्डों में से 32 निर्दलीय जीते हैं। भाजपा को 15, कांग्रेस को 10 और माकपा को एक सीट मिली है। बहुमत का आंकड़ा 31 है। निर्दलीय उससे एक सीट आगे हैं और बोर्ड की दिशा तय करने की स्थिति में हैं।
पाली में कांग्रेस को चाहिए निर्दलीयों का साथ
पाली नगर निगम में कांग्रेस 29 सीटों के साथ सबसे बड़ा दल है। भाजपा को 21 और निर्दलीयों को 15 सीटें मिली हैं। बहुमत के लिए 33 सीट चाहिए। कांग्रेस चार सीट दूर है, इसलिए बोर्ड बनाने के लिए उसे निर्दलीयों का साथ लेना होगा।
अजमेर में कांग्रेस आगे, लेकिन बहुमत से दूर
अजमेर नगर निगम में कांग्रेस ने 37 सीटें जीती हैं, जबकि भाजपा 32 पर रही। 11 निर्दलीय भी जीते हैं। बहुमत के लिए 41 सीट चाहिए। कांग्रेस को बोर्ड बनाने के लिए चार और पार्षदों के समर्थन की जरूरत होगी।
जोधपुर में बराबरी, निर्दलीय निर्णायक
जोधपुर नगर निगम में भाजपा और कांग्रेस दोनों को 44-44 सीटें मिली हैं। 11 सीटें निर्दलीयों और अन्य के खाते में गई हैं, जबकि एक वार्ड का परिणाम लंबित है। ऐसे में निर्दलीयों का रुख सत्ता का समीकरण तय कर सकता है।
दौसा और डीडवाना में भी बढ़ी पूछ
दौसा नगर परिषद में कांग्रेस को 24, भाजपा को 17 और निर्दलीयों को 14 सीटें मिली हैं। बहुमत के लिए 29 सीटें चाहिए। वहीं डीडवाना में कांग्रेस 16 सीटों के साथ सबसे बड़ा दल है, जबकि निर्दलीयों ने 14 और भाजपा ने नौ सीटें जीती हैं। दोनों जगह बोर्ड गठन के लिए निर्दलीयों की भूमिका अहम होगी।
खाटूश्यामजी और सलूम्बर में भी पेंच
खाटूश्यामजी में भाजपा और कांग्रेस दोनों को आठ-आठ सीटें मिली हैं। तीन निर्दलीय और एक अन्य दल का पार्षद जीता है। सलूम्बर में भाजपा को 12, कांग्रेस को 11, एक निर्दलीय और एक अन्य दल का पार्षद जीता है। दोनों जगह किसी भी पार्टी के पास स्पष्ट बहुमत नहीं है।
नतीजों ने दिया बड़ा सियासी संदेश
इन चुनावों का बड़ा संदेश यह है कि स्थानीय निकायों में भाजपा और कांग्रेस का सीधा मुकाबला हर जगह काम नहीं आया। भरतपुर और हनुमानगढ़ में निर्दलीय बहुमत के पार पहुंच गए, जबकि कई अन्य शहरों में वे किंगमेकर बन गए हैं। अब बोर्ड गठन के लिए सबसे ज्यादा नजर निर्दलीय पार्षदों के अगले कदम पर रहेगी।
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पोकरण में दो निर्दलीयों पर टिका बोर्ड
पोकरण नगर पालिका के 25 वार्डों में कांग्रेस को 12 और भाजपा को 11 सीटें मिली हैं। दो सीटों पर निर्दलीय जीते हैं। बहुमत के लिए 13 पार्षद चाहिए। कांग्रेस को बहुमत के लिए एक सीट की जरूरत है। ऐसे में दोनों निर्दलीय अहम हो गए हैं।
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भरतपुर में निर्दलीय सबसे बड़ा समूह
भरतपुर नगर निगम में 65 वार्डों में 36 सीटों पर निर्दलीय जीते हैं। भाजपा के खाते में 20 और कांग्रेस को सात सीटें मिली हैं। बहुमत का आंकड़ा 33 है। निर्दलीय अकेले ही इससे तीन सीट ज्यादा जीत चुके हैं। यानी वे अपने दम पर बोर्ड बनाने की स्थिति में हैं।
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हनुमानगढ़ में भी निर्दलीयों की मजबूत पकड़
हनुमानगढ़ नगर परिषद में 60 वार्डों में से 32 निर्दलीय जीते हैं। भाजपा को 15, कांग्रेस को 10 और माकपा को एक सीट मिली है। बहुमत का आंकड़ा 31 है। निर्दलीय उससे एक सीट आगे हैं और बोर्ड की दिशा तय करने की स्थिति में हैं।
पाली में कांग्रेस को चाहिए निर्दलीयों का साथ
पाली नगर निगम में कांग्रेस 29 सीटों के साथ सबसे बड़ा दल है। भाजपा को 21 और निर्दलीयों को 15 सीटें मिली हैं। बहुमत के लिए 33 सीट चाहिए। कांग्रेस चार सीट दूर है, इसलिए बोर्ड बनाने के लिए उसे निर्दलीयों का साथ लेना होगा।
अजमेर में कांग्रेस आगे, लेकिन बहुमत से दूर
अजमेर नगर निगम में कांग्रेस ने 37 सीटें जीती हैं, जबकि भाजपा 32 पर रही। 11 निर्दलीय भी जीते हैं। बहुमत के लिए 41 सीट चाहिए। कांग्रेस को बोर्ड बनाने के लिए चार और पार्षदों के समर्थन की जरूरत होगी।
जोधपुर में बराबरी, निर्दलीय निर्णायक
जोधपुर नगर निगम में भाजपा और कांग्रेस दोनों को 44-44 सीटें मिली हैं। 11 सीटें निर्दलीयों और अन्य के खाते में गई हैं, जबकि एक वार्ड का परिणाम लंबित है। ऐसे में निर्दलीयों का रुख सत्ता का समीकरण तय कर सकता है।
दौसा और डीडवाना में भी बढ़ी पूछ
दौसा नगर परिषद में कांग्रेस को 24, भाजपा को 17 और निर्दलीयों को 14 सीटें मिली हैं। बहुमत के लिए 29 सीटें चाहिए। वहीं डीडवाना में कांग्रेस 16 सीटों के साथ सबसे बड़ा दल है, जबकि निर्दलीयों ने 14 और भाजपा ने नौ सीटें जीती हैं। दोनों जगह बोर्ड गठन के लिए निर्दलीयों की भूमिका अहम होगी।
खाटूश्यामजी और सलूम्बर में भी पेंच
खाटूश्यामजी में भाजपा और कांग्रेस दोनों को आठ-आठ सीटें मिली हैं। तीन निर्दलीय और एक अन्य दल का पार्षद जीता है। सलूम्बर में भाजपा को 12, कांग्रेस को 11, एक निर्दलीय और एक अन्य दल का पार्षद जीता है। दोनों जगह किसी भी पार्टी के पास स्पष्ट बहुमत नहीं है।
नतीजों ने दिया बड़ा सियासी संदेश
इन चुनावों का बड़ा संदेश यह है कि स्थानीय निकायों में भाजपा और कांग्रेस का सीधा मुकाबला हर जगह काम नहीं आया। भरतपुर और हनुमानगढ़ में निर्दलीय बहुमत के पार पहुंच गए, जबकि कई अन्य शहरों में वे किंगमेकर बन गए हैं। अब बोर्ड गठन के लिए सबसे ज्यादा नजर निर्दलीय पार्षदों के अगले कदम पर रहेगी।