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राजस्थान: मोटर दुर्घटना मुआवजे में लापरवाही पर सख्त राजस्थान हाईकोर्ट, बीमा कंपनी अधिकारी तलब
Wed, 21 Oct 2026 08:39 PM IST
प्रतीक पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: प्रतीक पांडेय
Updated Wed, 21 Oct 2026 08:39 PM IST
सार
राजस्थान हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना मुआवजे के मामले में बीमा कंपनी की पैरवी में लापरवाही पर नाराजगी जताई है। अदालत ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी के चीफ रीजनल मैनेजर से जवाब मांगा है। साथ ही पांच लाख रुपये के मुआवजा आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक लगाते हुए मामले की सुनवाई 2 नवंबर को तय की है।
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राजस्थान हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजस्थान हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना मुआवजे के एक मामले में बीमा कंपनी की ओर से पैरवी में लापरवाही बरतने पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी के राज्य स्थित चीफ रीजनल मैनेजर से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है। जस्टिस अशोक कुमार जैन की पीठ ने अधिकारी को यह बताने का निर्देश दिया कि पूरे प्रदेश में मोटर दुर्घटना मुआवजे के प्रकरणों की निगरानी किस प्रक्रिया से की जाती है और बीमा कंपनी का बचाव करने के लिए वकीलों की नियुक्ति तथा केस सौंपने की क्या व्यवस्था है।
ट्रिब्यूनल के फैसले पर लगाई रोक
बीमा कंपनी ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण द्वारा दिए गए पांच लाख रुपये के मुआवजा आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। कंपनी का तर्क था कि ट्रिब्यूनल ने किसी पुलिस रिपोर्ट या प्राथमिकी के बिना ही व्यक्ति की मृत्यु मान ली। इस पर पीठ ने कहा कि चुनौती दिए गए आदेश से स्पष्ट होता है कि ट्रिब्यूनल के समक्ष मामले का बचाव करने में बीमा कंपनी ने ढिलाई बरती। अदालत ने 11 जून, 2026 को दिए गए मुआवजा आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है।
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हलफनामे के साथ उपस्थित होने के निर्देश
हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि बीमा कंपनी भारत सरकार के स्वामित्व वाली एक राष्ट्रीयकृत संस्था है। इसलिए चीफ रीजनल मैनेजर को तलब करना उचित है ताकि राज्य में मोटर दुर्घटना मुआवजे से जुड़े मामलों की निगरानी और बचाव व्यवस्था स्पष्ट हो सके।
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अदालत ने संबंधित चीफ रीजनल मैनेजर को निर्देश दिया कि वे मांगी गई जानकारी हलफनामे के माध्यम से प्रस्तुत करें और अदालत के समक्ष स्वयं उपस्थित रहें। मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर को तय की गई है।
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ट्रिब्यूनल के फैसले पर लगाई रोक
बीमा कंपनी ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण द्वारा दिए गए पांच लाख रुपये के मुआवजा आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। कंपनी का तर्क था कि ट्रिब्यूनल ने किसी पुलिस रिपोर्ट या प्राथमिकी के बिना ही व्यक्ति की मृत्यु मान ली। इस पर पीठ ने कहा कि चुनौती दिए गए आदेश से स्पष्ट होता है कि ट्रिब्यूनल के समक्ष मामले का बचाव करने में बीमा कंपनी ने ढिलाई बरती। अदालत ने 11 जून, 2026 को दिए गए मुआवजा आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है।
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हलफनामे के साथ उपस्थित होने के निर्देश
हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि बीमा कंपनी भारत सरकार के स्वामित्व वाली एक राष्ट्रीयकृत संस्था है। इसलिए चीफ रीजनल मैनेजर को तलब करना उचित है ताकि राज्य में मोटर दुर्घटना मुआवजे से जुड़े मामलों की निगरानी और बचाव व्यवस्था स्पष्ट हो सके।
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अदालत ने संबंधित चीफ रीजनल मैनेजर को निर्देश दिया कि वे मांगी गई जानकारी हलफनामे के माध्यम से प्रस्तुत करें और अदालत के समक्ष स्वयं उपस्थित रहें। मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर को तय की गई है।