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राजस्थान: गुटबाजी से त्रस्त है भाजपा, शाह की चेतावनी के बाद वसुंधरा बनाम पूनिया के बीच क्या थम पाएगा शीतयुद्ध?

Sat, 11 Dec 2021 07:51 PM IST
Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Sat, 11 Dec 2021 07:51 PM IST
सार

शाह ने बैठक में राजस्थान में प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया के कार्यों और पूर्व सीएम वसुंधरा राजे सरकार की समय शुरू की गईं योजनाओं की जमकर तारीफ की थी। पार्टी के एक नेता ने अमर उजाला से कहा कि शाह की दोनों नेताओं की तारीफ करने से स्पष्ट संदेश जाता है कि वे राज्य के पार्टी नेताओं के बीच मतभेदों को खत्म करने पर जोर दे रहे हैं...

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Rajasthan: Former CM and BJP leader Vasundhara Raje Scindia has opened a front against state BJP president Satish Poonia
वसुंधरा राजे बनाम सतीश पुनिया - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

राजस्थान भाजपा में इन दिनों सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। एक तरह जहां राज्य की पूर्व सीएम और भाजपा की कद्दावर नेता वसुंधरा राजे सिंधिया ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनिया के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है, तो वहीं प्रदेशाध्यक्ष पूनिया भी राजे के खिलाफ बयानबाजी करने से बाज नहीं आ रहे हैं। इस बीच गृहमंत्री शाह ने दोनों नेताओं के बीच चल रहे शीतयुद्ध का पटाक्षेप करने की कोशिश की है और गुजरात मॉडल अपनाकर राज्य में चुनाव जीतने का मंत्र दिया।

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दरअसल, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह रविवार को भाजपा की राज्य कार्यसमिति को संबोधित करने के लिए जयपुर पहुंचे थे। उन्होंने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि पार्टी को पीएम मोदी के नेतृत्व में एकजुट होकर चुनाव मैदान में उतरना है। किसी को भी मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के चेहरे के रूप में पेश करने से बचना चाहिए। शाह ने सभी को याद दिलाया कि 'व्यक्ति से महत्वपूर्ण संगठन होता है और जो संगठन के साथ चलते हैं उनका सूर्य कभी अस्त नहीं होता है'। उन्होंने तीन बार राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे और भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति रहे भैरों सिंह शेखावत का उदाहरण दिया, जिन्हें कभी भी पार्टी का साथ न छोड़ने का फायदा हुआ। गृहमंत्री शाह ने राजस्थान भाजपा को गुजरात से सीख लेने की नसीहत भी दी। जहां भाजपा पन्ना प्रमुख मॉडल को अपनाकर पिछले दो दशकों से सत्ता में है।
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राज्य भाजपा कार्यसमिति की बैठक में मौजूद राजस्थान के एक प्रमुख भाजपा नेता ने अमर उजाला को बताया कि जयपुर में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा दिया गया निर्देश वसुंधरा राजे और उनके समर्थकों के लिए एक स्पष्ट चेतावनी थी, जो 2023 में उन्हें भाजपा का मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाए जाने की लगातार पैरवी कर रहे हैं। शाह के संदेश से साफ नजर आ रहा है कि भाजपा हाईकमान वसुंधरा राजे के खेमे द्वारा चुनाव से पहले उन्हें मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने के दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं है।

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पार्टी के कार्यक्रमों से लगातार नदारद रहती हैं राजे

एक विश्वस्त सूत्र ने अमर उजाला से चर्चा में बताया कि भाजपा अध्यक्ष सतीश पुनिया कई बार हाईकमान से वसुंधरा राजे की शिकायत कर चुके हैं। राजे लगातार राज्य के पार्टी नेतृत्व की सलाह को दरकिनार करते हुए काम कर रही हैं। वहीं जो दायित्व उन्हें प्रदेश भाजपा की तरफ से दिए जाते है, वे उनकी भी लगातार अनदेखी कर रही हैं। पूर्व सीएम राजे ने 2018 के बाद से हुए उपचुनावों में भाजपा के लिए प्रचार तक नहीं किया है, जिसमें हाल ही में हुए दो सीटों के उपचुनाव भी शामिल हैं। इन चुनावों में प्रचार में भाग नहीं लेने के पीछे उन्होंने अपनी बहू का खराब स्वास्थ्य का कारण बताया था।


सूत्र ने बताया कि भाजपा अध्यक्ष पूनिया का खेमा राजे द्वारा खुद को पार्टी से ज्यादा बढ़ावा देने की कोशिशों से भी नाराज है। शाह की जयपुर यात्रा से ठीक पहले राजे ने चार दिन की देव दर्शन यात्रा की शुरुआत की। इस दौरान वे वहां भी गई जहां उपचुनावों में भाजपा को करारी हार मिली। यात्रा के दौरान राजे ने उन नेताओं और परिजन से मुलाकात की, जिन्होंने कोविड के चलते अपनी जान गंवाई है। वहीं पिछले साल राजे के समर्थकों ने उनके नाम पर ही एक समानांतर मंच वसुंधरा राजे समर्थक मंच भी स्थापित किया था। हाल ही में राजस्थान में कई जगह 'पूनिया भगाओ' वाले पोस्टर भी दिखाई दिए थे। हालांकि राजे ने खुद इस तरह के काम करने वाले खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की थी।

वसुंधरा की दो टीमें कर रही हैं राज्य में काम

प्रदेश की राजनीति में नजर रखने वाले जानकारों का कहना है कि वसुंधरा राजे अपने समर्थकों की दो टीमें भी तैयार कर चुकी हैं, जो लंबे समय से राज्य के सभी 33 जिलों और 200 विधानसभा सीटों पर कार्य कर रही है। इनमें एक टीम वसुंधरा और दूसरी वसुंधरा समर्थक मंच है। यह दोनों टीमें सभी क्षेत्रों में वसुंधरा राजे के प्रचार और उनके लिए अभी से चुनाव कार्यों में जुट गई है। इन टीमों में महिला मोर्चा, युवा मोर्चा, किसान मोर्चा, ओबीसी मोर्चा समेत सभी स्तर पर मोर्चा बनाए जा चुके हैं। इन टीमों के गठन और कार्यों से भाजपा में मुख्यमंत्री की दौड़ में शामिल कई नेताओं को खासी आपत्ति भी है कि भाजपा संगठन के साथ ही कैसे वसुंधरा राजे समर्थन में अलग से संगठन काम कर रहे हैं।



शाह ने पूनिया और राजे दोनों की प्रशंसा
शाह ने बैठक में राजस्थान में प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया के कार्यों और पूर्व सीएम वसुंधरा राजे सरकार की समय शुरू की गईं योजनाओं की जमकर तारीफ की थी। पार्टी के एक नेता ने अमर उजाला से कहा कि शाह की दोनों नेताओं की तारीफ करने से स्पष्ट संदेश जाता है कि वे राज्य के पार्टी नेताओं के बीच मतभेदों को खत्म करने पर जोर दे रहे हैं। उनका सीधा संदेश है कि सभी नेता एकजुट होकर विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुट जाएं। शाह अच्छी तरह से जानते हैं कि पूनिया संगठन को चलाने की क्षमता रखते हैं, लेकिन वसुंधरा का जनता के बीच अपना एक मजबूत जनाधार है और राज्य में जीत सुनिश्चित करने के लिए सभी का एक साथ होना आवश्यक है।

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