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राजस्थान चुनाव 2018: बगावत से बचने के लिए वसुंधरा राजे ने नेताओं के रिश्तेदारों को बांटे टिकट
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Updated Tue, 13 Nov 2018 10:50 AM IST
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वसुंधरा राजे (फाइल फोटो)
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राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 में भारी-भरकम बहुमत के साथ सत्ताधारी पार्टी भाजपा का पूरा ध्यान बगावत से बचने की तरकीबों पर है। भाजपा की दिल्ली से जारी हुई 131 उम्मीदवारों की पहली सूची से लग रहा है कि इस बार पार्टी छाछ को भी फूंक-फूंककर पी रही है।
बगावत के नुकसान से बचने के लिए ताजा सूची में 85 मौजूदा विधायकों को फिर से मौका दिया गया है। भाजपा ने अपने दिवंगत नेताओं और वर्तमान नेता, जिनका टिकट कटा है, उनके परिजनों का विशेष खयाल रखा है। भाजपा के 131 प्रत्याशियों की सूची में बेटे, बहु, पोते तक शामिल हैं। भाजपा हर चुनाव में वंशवाद के मुद्दे पर कांग्रेस को कठघरे में रखती आई है, लेकिन इस चुनाव में ये मुद्दा उल्टा भाजपा के ही पीछे पड़ गया है।
भाजपा को पिछले विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत के चलते 200 सीटों में से 163 सीटें हासिल हुई थीं। भाजपा को डर है कि इस प्रचंड बहुमत से सरकार चलाने के बाद अब इन चुनावों में टिकट का बंटवारा सही तरीके से नहीं हुआ, तो बगावत पार्टी को ले डूबेगी।
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गौरतलब है कि भाजपा उस समय दूध से जल गई थी, जब वर्ष 2008 में बागियों ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की खिलाफत में पार्टी के खिलाफ बिगुल बजा दिया था। पार्टी को 15 से ज्यादा सीटों का नुकसान होने से सत्ता से हाथ धोना पड़ा था। भाजपा को 78 सीटें मिली थीं और कांग्रेस भी बहुमत हासिल नहीं कर पाई थी। कांग्रेस को 96 सीटें मिल पाई थी। यदि भाजपा को इतनी सीटों का नुकसान नहीं हुआ होता, तो कांग्रेस की तरह वह भी निर्दलियों के साथ मिलकर सरकार बना सकती थी।
हालांकि उस समय बगावत पर उतरे किरोड़ी लाल मीणा ने भाजपा को खासा नुकसान पहुंचाया था। लेकिन वसुंधरा राजे इस बार किरोड़ी लाल मीणा को वापस भाजपा में शामिल करने में कामयाब हुईं। भाजपा की सूची में उनकी पत्नी गोलमा देवी को टिकट दिया गया है।
मजे की बात यह है कि वे अशोक गहलोत की पिछली सरकार को समर्थन देकर मंत्री रह चुकी हैं। भाजपा वर्ष 2008 के जैसे हालातों के बीच इस बार उलझना नहीं चाहती है। भाजपा और खास तौर पर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे इस विधानसभा चुनाव में बहुत सोच-समझकर कदम बढ़ा रहे हैं।
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बगावत के नुकसान से बचने के लिए ताजा सूची में 85 मौजूदा विधायकों को फिर से मौका दिया गया है। भाजपा ने अपने दिवंगत नेताओं और वर्तमान नेता, जिनका टिकट कटा है, उनके परिजनों का विशेष खयाल रखा है। भाजपा के 131 प्रत्याशियों की सूची में बेटे, बहु, पोते तक शामिल हैं। भाजपा हर चुनाव में वंशवाद के मुद्दे पर कांग्रेस को कठघरे में रखती आई है, लेकिन इस चुनाव में ये मुद्दा उल्टा भाजपा के ही पीछे पड़ गया है।
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भाजपा को पिछले विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत के चलते 200 सीटों में से 163 सीटें हासिल हुई थीं। भाजपा को डर है कि इस प्रचंड बहुमत से सरकार चलाने के बाद अब इन चुनावों में टिकट का बंटवारा सही तरीके से नहीं हुआ, तो बगावत पार्टी को ले डूबेगी।
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गौरतलब है कि भाजपा उस समय दूध से जल गई थी, जब वर्ष 2008 में बागियों ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की खिलाफत में पार्टी के खिलाफ बिगुल बजा दिया था। पार्टी को 15 से ज्यादा सीटों का नुकसान होने से सत्ता से हाथ धोना पड़ा था। भाजपा को 78 सीटें मिली थीं और कांग्रेस भी बहुमत हासिल नहीं कर पाई थी। कांग्रेस को 96 सीटें मिल पाई थी। यदि भाजपा को इतनी सीटों का नुकसान नहीं हुआ होता, तो कांग्रेस की तरह वह भी निर्दलियों के साथ मिलकर सरकार बना सकती थी।
हालांकि उस समय बगावत पर उतरे किरोड़ी लाल मीणा ने भाजपा को खासा नुकसान पहुंचाया था। लेकिन वसुंधरा राजे इस बार किरोड़ी लाल मीणा को वापस भाजपा में शामिल करने में कामयाब हुईं। भाजपा की सूची में उनकी पत्नी गोलमा देवी को टिकट दिया गया है।
मजे की बात यह है कि वे अशोक गहलोत की पिछली सरकार को समर्थन देकर मंत्री रह चुकी हैं। भाजपा वर्ष 2008 के जैसे हालातों के बीच इस बार उलझना नहीं चाहती है। भाजपा और खास तौर पर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे इस विधानसभा चुनाव में बहुत सोच-समझकर कदम बढ़ा रहे हैं।
इन नेताओं के 'अपनों' को टिकट
अमित शाह और वसुंधरा राजे
उपायों के तहत भाजपा ने टिकट वितरण में जमकर वंशवाद किया है। भाजपा ने अपने दिवंगत मंत्रियों और नेताओं का पूरा ध्यान रखते हुए उनके बेटों को टिकट दिया है। इनमें वसुंधरा राजे के नजदीकी रहे केंद्रीय मंत्री रहे सांवरलाल जाट के बेटे रामस्वरूप लांबा को नसीराबाद सीट से तथा पूर्व मंत्री दिगंबर सिंह के बेटे शैलेश सिंह को डीग-कुम्हेर सीट से उतारा गया है।
खास बात यह है कि राम स्वरूप लांबा पर भाजपा ने फिर दांव खेला है, जबकि वे अजमेर से लोकसभा का उपचुनाव भारी मतांतर से हार चुके हैं। वहीं मुण्डावर सीट से दिवंगत धर्मपाल चौधरी के पुत्र मंजीत चौधरी को टिकट मिला है।
इसके अलावा राजपूत समाज से आने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता देवी सिंह भाटी का टिकट काटकर कोलायत सीट से उनकी पुत्रवधु पूनम कंवर को टिकट दिया गया है। बयाना सीट से ऋषि बंसल की पत्नी ऋतु बनावत को चुनाव मैदान में उतारा है।
प्रतापगढ से मंत्री नन्दलाल मीणा के पुत्र हेमन्त मीणा को, किशनगढ़ से विधायक भागीरथ चौधरी की जगह उनके पुत्र विकास चौधरी, सादुलशहर से विधायक गुरजंट सिंह की जगह उनके पौत्र गुरवीर सिंह बराड़ को, जोधपुर से विधायक कैलाश भंसाली की जगह भतीजे अतुल भंसाली को तथा बामनवास से कुंजीलाल की जगह उनके पुत्र राजेन्द्र मीणा को टिकट दिया गया है। सूची में ऐसे और भी नाम शामिल हैं। (ब्यूरो)
खास बात यह है कि राम स्वरूप लांबा पर भाजपा ने फिर दांव खेला है, जबकि वे अजमेर से लोकसभा का उपचुनाव भारी मतांतर से हार चुके हैं। वहीं मुण्डावर सीट से दिवंगत धर्मपाल चौधरी के पुत्र मंजीत चौधरी को टिकट मिला है।
इसके अलावा राजपूत समाज से आने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता देवी सिंह भाटी का टिकट काटकर कोलायत सीट से उनकी पुत्रवधु पूनम कंवर को टिकट दिया गया है। बयाना सीट से ऋषि बंसल की पत्नी ऋतु बनावत को चुनाव मैदान में उतारा है।
प्रतापगढ से मंत्री नन्दलाल मीणा के पुत्र हेमन्त मीणा को, किशनगढ़ से विधायक भागीरथ चौधरी की जगह उनके पुत्र विकास चौधरी, सादुलशहर से विधायक गुरजंट सिंह की जगह उनके पौत्र गुरवीर सिंह बराड़ को, जोधपुर से विधायक कैलाश भंसाली की जगह भतीजे अतुल भंसाली को तथा बामनवास से कुंजीलाल की जगह उनके पुत्र राजेन्द्र मीणा को टिकट दिया गया है। सूची में ऐसे और भी नाम शामिल हैं। (ब्यूरो)