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Rajasthan Election 2023: भाजपा-कांग्रेस के 35 बागी नेता अपनी ही पार्टी को चुनौती देंगे, क्या है सियासी टेंशन?

Tue, 07 Nov 2023 10:48 PM IST
उदित दीक्षित न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: उदित दीक्षित Updated Tue, 07 Nov 2023 10:48 PM IST
सार

Rajasthan Election 2023: राजस्थान में सीएम अशोक गहलोत, पूर्व सीएम वसुंधरा राजे और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के करीब समेत भाजपा और कांग्रेस से बागी होकर 35 नेता चुनावी मैदान है। इससे दोनों ही पार्टियों के प्रत्याशियों की टेंशन बढ़ गई है।

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Rajasthan Election 2023 Rebellion Leaders Contesting from BJP vs Congress Political Equation for Assembly Seat
बागी बिगाड़ सकते हैं भाजपा और कांग्रेस का खेल। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Rajasthan Election 2023: राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन भरे जा चुके हैं। कांग्रेस ने एक सीट गठबंधन के लिए छोड़ते हुए 199 सीटों पर प्रत्याशी उतारे हैं, जबकि भाजपा ने पूरी 200 सीटों पर उम्मीदवारों उतारे हैं। प्रदेश की 200 विधानसभा सीटों के लिए 2,605 उम्मीदवारों ने 3,436 नामांकन पत्र भरे हैं। राजस्थान के सियासी मिजाज को देखें तो टक्कर भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों में ही मानी जा रही है। लेकिन, कई सीटों पर इन पार्टियों के बड़े  बागी नेताओं ने आलाकमान की मुश्किलें बढ़ा दीं हैं। आइए, जानते हैं किस पार्टी से कितने नेता बागी हुए हैं। 

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पायलट और गहलोत के करीबी बागी
सत्ताधारी दल कांग्रेस से बागी होकर 16 नेताओं ने नामांकन दाखिल किया है। राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ से मौजूदा विधायक जौहरी लाल, बसेड़ी से वर्तमान विधायक खिलाड़ी लाल बैरवा, नोखा से कन्हैया लाल झंवर, लूणकरणसर से वीरेंद्र बेनीवाल, छबड़ा से नरेश मीणा, सादुलशहर से ओम बिश्नोई, सवाई माधोपुर से अजीज आजाद, नागौर से हबीबुर्रहमान, शाहपुरा से आलोक बेनीवाल और सूरसागर से रामेश्वर दाधीच समेत अन्य बागी होकर चुनाव मैदान में हैं। बसेड़ी से निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरे खिलाड़ी लाल बैरवा को सचिन पायलट का करीबी माना जाता है तो जोधपुर के मेयर रह चुके हैं रामेश्वर दाधीच सीएम अशोक गहलोत के करीबी हैं। 

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भाजपा से पांच पूर्व मंत्री समेत 19 बागी
कांग्रेस के मुकाबले भाजपा में बागियों की संख्या ज्यादा है। पार्टी से बगावत कर 19 नेता चुनाव मैदान में हैं, जिनमें पांच मंत्री भी रह चुके हैं। पार्टी से बगावत कर चित्तौड़गढ़ से मौजूदा विधायक चंद्रभान सिंह आक्या और शाहपुरा (भीलवाड़ा) से वर्तमान विधायक कैलाश मेघवाल ने निर्दलीय पर्चा भरा है। मेघवाल को पार्टी से निष्कासित भी किया जा चुका है। इसके अलावा झोटवाड़ा से राजपाल सिंह शेखावत, डीडवाना से यूनुस खान, कामां से मदन मोहन सिंघल और खंडेला से बंशीधर बाजिया चुनाव मैदान में उतर आए हैं। कैलाश मेघवाल, राजपाल सिंह शेखावत और युनूस खान को वसुंधरा राजे का करीबी माना जाता है। इसके अलावा युवा नेता रविंद्र सिंह भाटी ने शिव सीट से निर्दलीय उतरकर ताल ठोंक दी है। भाटी करीब सात दिन पहले भाजपा में शामिल हुए थे, लेकिन पार्टी से टिकट नहीं मिलने के कारण उन्होंने बगावत कर दी है और फिर निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर गए। 

बागियों को लेकर क्या कर रही भाजपा? 
भाजपा ने पार्टी के सभी जिला अध्यक्षों से बगावत कर निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरे नेताओं की सूची मांगी हैं। माना जा रहा है कि पार्टी के बड़े नेताओं बगावत कर चुनाव में उतरे उम्मीदवारों को लेकर बैठक कर चर्चा करेंगे और आगे की रणनीति बनाएंगे। नामांकन वापसी को लेकर नेताओं को मनाने का सिलसिला भी शुरू हो सकता है। चुनाव आयोग ने 9 नवंबर तक नाम वापस लेने का समय दिया है। ऐसे में जो नेता मानने को तैयार होंगे, उनके नामांकन पत्र वापस भी कराए जा सकते हैं। इसी तरह कांग्रेस भी बागी नेताओं को मनाने का काम कर सकती है, ताकि कम से कम सीटों पर बागी नेताओं का सामना करना पड़े।  

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पार्टियों के लिए बागी टेंशन क्यों?  
भाजपा और कांग्रेस से बगावत करने वाले नेताओं में से कई ऐसे हैं जो पार्टी के उम्मीदवार की जीत में मुश्किल खड़ी कर सकते हैं। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि 2018 के चुनाव में 29 सीटें ऐसी थी, जहां हार-जीत का अंतर 1000 से 5000 वोट का था। इसमें 13 पर भाजपा, 9 कांग्रेस, चार अन्य और 3 निर्दलीय उम्मीदवार की जीत हुई थी। वहीं, 9 सीटें ऐसी भी थीं, जहां 1000 से कम वोट पर हार-जीत हुई थी। ऐसे ये बागी नेता भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों का खेल बिगाड़ सकते हैं।  

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