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Rajasthan Election 2023: अचानक हॉट सीट बन गई पाकिस्तान सीमा के पास मौजूद बायतु विधानसभा, जानिए क्यों हुआ ऐसा
Tue, 14 Nov 2023 11:13 AM IST
उदित दीक्षित
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: उदित दीक्षित
Updated Tue, 14 Nov 2023 11:13 AM IST
सार
Rajasthan Election 2023: इस सप्ताह राजस्थान की बायतु विधानसभा सीट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की सभाओं होने जा रही है। इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला भी देखने को मिल रहा है।
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कल बायतु दौरे पर आ रहे हैं पीएम मोदी।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दीपावली के बाद अब राजस्थान में चुनावी मिजाज परवान चढ़ेगा। इस सप्ताह यहां बायतु विधानसभा पर दो बड़ी सभाएं होने जा रही है। पहली सभा 15 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की और दूसरी इसके दो दिन बाद 17 नवंबर को राहुल गांधी की। दोनों शीर्ष नेताओं की अचानक होने जा रही इस सभा ने बायतु विधानसभा को प्रदेश की सबसे हॉट सीट बना दिया है। अब राजस्थान की निगाहें इसी बात पर टिकी है कि आखिर इस दोनों रैलियों में अधिक भीड़ कौन जुटा पाता है? इससे न सिर्फ इन नेताओं के राजस्थान में प्रभाव का आकलन होगा बल्कि उन प्रत्याशियों की स्थिति का भी पता चलेगा जो चुनावी मैदान में डटे हुए हैं।
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बायतु एक नजर में
पाकिस्तान की सीमा से सटे राजस्थान के बाड़मेर जिले की बायतु विधानसभा सीट पर इस बार त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है। कांग्रेस से पंजाब प्रभारी हरीश चौधरी जो यहां के मौजूदा विधायक भी हैं। बीजेपी से बाला राम मूंड और आरएलपी से उम्मेदाराम जो 2018 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी के केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी को पछाड़कर यहां दूसरे नंबर पर रहे थे। इस बार बीजेपी ने यहां बाला राम मूंड को उतारा है।
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चुनाव इसलिए फंसा हुआ
हरीश चौधरी ने पिछली बार यहां से चुनाव 15 हजार वोटों के बड़े अंतर से जीता था। लेकिन, उस चुनाव में बीएसपी के प्रत्याशी किशोर सिंह ने यहां से 27 हजार से ज्यादा वोट लिए थे। इस बार बीएसपी ने यहां प्रत्याशी नहीं उतारा है। वहीं आरएलपी ने इन चुनावों में आज समाज पार्टी से गठबंधन कर लिया है। यही बीएसपी के एससी वोटों का झुकाव आरएलपी की तरफ हो गया तो चुनाव बेहद रोचक होगा। दूसरी तरफ बीजेपी के प्रत्याशी बालाराम मूंड भी क्षेत्र के दमदार नेता हैं। इससे पहले वे 2008 में कांग्रेस के टिकट पर सिवाना से चुनाव लड़ चुके हैं। उनके समर्थकों की तादाद भी कम नहीं है।
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