फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   Rajasthan Chief Minister Ashok Gehlot writes to PM Narendra Modi over recent farm laws and farmer protest

गहलोत की पीएम से गुहार, सुनें अन्नदाता की पुकार और करें कृषि कानूनों पर पुनर्विचार

Sun, 29 Nov 2020 10:29 PM IST
मुकेश कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: मुकेश कुमार झा Updated Sun, 29 Nov 2020 10:29 PM IST
विज्ञापन
Rajasthan Chief Minister Ashok Gehlot writes to PM Narendra Modi over recent farm laws and farmer protest
अशोक गहलोत, पीएम नरेंद्र मोदी

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए तीनों नए कृषि कानूनों, राज्य सरकार द्वारा उनमें किए गए संशोधनों और किसान आंदोलन को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है।

विज्ञापन


देश जब संविधान दिवस मना रहा था तभी देश के अन्नदाताओं पर लाठियां चलाई जा रही थीं
गहलोत ने अपने पत्र में किसान आंदोलन पर प्रधानमंत्री का ध्यान आकृष्ट किया है। मुख्यमंत्री ने पत्र में कहा है कि 26 नवंबर को देश जब संविधान दिवस मना रहा था तभी देश के अन्नदाताओं पर लाठियां चलाई जा रही थीं और पानी की बौछारें की जा रही थीं।
विज्ञापन


किसानों ने अपने खून पसीने से देश की धरती को सींचा है
उन्होंने कहा, 'किसान अपनी मांगों को रखने दिल्ली नहीं पहुंच सकें इसके लिए सड़कों को खोदा गया और अवरोधक भी लगाए गए। केंद्र सरकार ने किसानों के विरोध प्रदर्शन के हक को छीनने की कोशिश की जो न्यायोचित नहीं है। किसानों ने अपने खून पसीने से देश की धरती को सींचा है। केंद्र सरकार को उनकी मांगों को सुनकर तुरंत समाधान करना चाहिए।'
विज्ञापन
विज्ञापन

 

प्रधानमंत्री मोदी इन कानूनों पर पुनर्विचार करें
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मुश्किल दौर में भी अर्थव्यवस्था में सकारात्मक योगदान दे रहे अन्नदाता को इस तरह का प्रतिफल नहीं देना चाहिए। मुख्यमंत्री ने मांग की है कि किसानों के हित और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए प्रधानमंत्री मोदी इन कानूनों पर पुनर्विचार करें।

तीनों विधेयकों को किसानों और विशेषज्ञों से चर्चा किए बिना ही लाया गया
गहलोत ने पत्र में लिखा है कि केंद्र सरकार द्वारा इन तीनों विधेयकों को किसानों और विशेषज्ञों से चर्चा किए बिना ही लाया गया। उन्होंने कहा कि संसद में विपक्षी पार्टियों द्वारा इन विधेयकों को प्रवर समिति को भेजने की मांग को भी सरकार ने नजरअंदाज किया।

इन कानूनों में न्यूनतम समर्थन मूल्य का जिक्र नहीं है- गहलोत

उन्होंने कहा, 'इन कानूनों में न्यूनतम समर्थन मूल्य का जिक्र नहीं है, जिसके कारण किसानों में अविश्वास पैदा हुआ है। इन कानूनों के लागू होने से किसान सिर्फ निजी कंपनियों पर निर्भर हो जाएगा। साथ ही, निजी मंडियों के बनने से दीर्घकाल से चली आ रहीं कृषि मंडियों का अस्तित्व भी खत्म हो जाएगा। इसके कारण किसानों को अपनी उपज का सही मूल्य नहीं मिलेगा।’’

मुख्यमंत्री ने पत्र में कहा है कि राज्य सरकार ने इन संशोधनों में किसानों के हित को सर्वोपरि रखा है और कृषि विपणन व्यवस्था को मजबूत बनाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि राजस्थान ने संविदा खेती (कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग) में भी न्यूनतम समर्थन मूल्य का प्रावधान किया है और किसी विवाद की स्थिति में पूर्ववत मंडी समितियों और सिविल न्यायालयों के पास सुनवाई का अधिकार होगा, जो किसानों के लिये सुविधाजनक है।

उन्होंने कहा कि मंडी प्रांगणों के बाहर होने वाली खरीद में भी व्यापारियों से मंडी शुल्क लिया जाएगा। संविदा खेती की शर्तो का उल्लंघन या किसानों को प्रताड़ित करने पर व्यापारियों और कंपनियों पर पांच लाख रुपये तक का जुर्माना और सात साल तक की कैद का प्रावधान किया गया है।

उन्होंने कहा कि केंद्र के तीनों कृषि कानूनों के अतिरिक्त दीवानी प्रक्रिया संहिता, 1908 में संशोधन किया गया है, जिससे पांच एकड़ तक की भूमि वाले किसानों को कर्ज ना चुका पाने पर कुर्की से मुक्त रखा गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed