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Rajasthan By-Poll: खींवसर उपचुनाव में 'राजधानी' को बचाने की जंग, क्या कामयाब होंगे हनुमान बेनीवाल?
Sun, 27 Oct 2024 06:37 PM IST
अर्पित याज्ञनिक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खींवसर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खींवसर
Published by: अर्पित याज्ञनिक
Updated Sun, 27 Oct 2024 06:37 PM IST
सार
त्रिकोणीय मुकाबले में फंसी खींवसर सीट इस बार हनुमान बेनीवाल के लिए अस्तित्व की लड़ाई बन चुकी है। आएलपी की ‘राज’ धानी कही जाने वाली खींवसर विधानसभा एक मात्र सीट है, जो आरएलपी के पास थी। ये हारे तो राजस्थान की विधानसभा से आरएलपी का प्रतिनिधत्व खत्म हो जाएगा।
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हनुमान बेनीवाल और कनिका बेनीवाल।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजस्थान के उपचुनावों में सियासी दलों की नजरें इस बार खींवसर सीट पर हैं। इस सीट के सबसे ज्यादा चर्चाओं में रहने की वजह है हनुमान बेनीवाल। खींवसर से उनकी पत्नी कनिका बेनीवाल चुनाव लड़ रही हैं, जबकि हनुमान खुद नागौर से सांसद हैं। आएलपी की ‘राज’ धानी कही जाने वाली खींवसर विधानसभा एक मात्र सीट है जो आरएलपी के पास थी। ये हारे तो राजस्थान की विधानसभा से आरएलपी का प्रतिनिधत्व खत्म हो जाएगा। इसलिए हनुमान के लिए यह मुकाबला अस्तित्व बचाने की लड़ाई बन चुका है। हनुमान चुनावों को भी इसी दिशा में लेकर जाना चाहते हैं, ताकि समर्थकों की भरपूर सहानुभूति भी उन्हें मिल पाए।
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अपनी सभाओं में हनुमान इसी से जुड़े बयान और भाषण भी दे रहे हैं। पिछले दिनों एक सभा में उन्होंने कहा था कि चुनाव हारे तो वो आरएलपी हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी, जिसे लंबे संघर्ष के साथ तैयार किया गया था। बेनीवाल ने कहा था कि खींवसर सीट से पार्टी की शुरुआत हुई थी। सैंकड़ों दबाव के बाद भी उन्होंने इसे मरने और किसी के साथ विलय नहीं होने दिया। आज पार्टी अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। बेनीवाल अपने भाषण के दौरान भावुक भी हुए थे और खींवसर की जनता से अपील की थी उनके प्रयास को जीवंत रखने में साथ दें।
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पुराने साथी से मुकाबला
हालांकि बेनीवाल की छवि एक दबंग नेता की है और वो युवा नेता के रूप में जाने जाते हैं, परंतु इस उप चुनाव में हनुमान बेनीवाल का सीधा मुकाबला अपने ही पुराने साथी रेवंत राम डांगा के साथ है। रेवंत राम डांगा पिछले 20 साल से हनुमान बेनीवाल के साथ थे, परंतु आज रेवंत राम भाजपा के प्रत्याशी के रूप में बेनीवाल के खिलाफ वोट मांग रहे हैं। खींवसर सीट पर जाटों का प्रभाव होने के चलते जाट वोट में सेंधमारी हनुमान बेनीवाल के लिए उप चुनाव में भारी पड़ सकती है।
खींवसर सीट को RLP की राजधानी
खींवसर सीट को RLP की राजधानी कहा जाता है। चर्चा है कि बेनीवाल इस सीट को हारते हैं, तो उनकी पार्टी का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। RLP से वर्तमान में सिर्फ हनुमान बेनीवाल ही एक मात्र सांसद हैं और विधायक भी वो खुद ही थे। फिलहाल विधानसभा में उनका कोई भी प्रतिनिधि नहीं है। खींवसर की हार बेनीवाल के दबंग अंदाज को खत्म करने के लिए काफी होगी। बेनीवाल इस विषय की गंभीरता को समझते हुए अपनी पत्नी कनिका बेनीवाल को टिकट देकर मैदान उतारा और संदेश देने का प्रयास किया है कि विधायक भी वो ही होंगे और उनका जुड़ाव जनता से बना रहेगा।
पांच घंटे चली सभा
हनुमान बेनीवाल के लिए सीट कितनी महत्वपूर्ण है इसका अंदाजा नामांकन सभा से लगाया जा सकता है जो कि 25 अक्तूबर को हुई। नामांकन सभा 5 घंटे तक चली और उपस्थित लोग निरंतर मौजूद रहे। अमूमन एक से डेढ़ घंटे में नेताओं के भाषण के बीच में भीड़ छटना शुरू हो जाती है, परंतु बेनीवाल की इस नामांकन सभा में ऐसा नहीं हुआ। 5 घंटे तक लोग नेताओं के भाषण सुनते रहे और वहां मौजूद रहे। गौरतलब यह है कि उसी दिन बेनीवाल की सभा से ठीक पहले मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने भी एक नामांकन सभा की थी। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग हनुमान की सभा में मौजूद थे। आगामी चुनाव को लेकर निरंतर चर्चा चलती रही। पार्टी के राजनीतिक भविष्य को लेकर भी जमकर भाषण बाजी हुई। उपस्थित लोगों में बेनीवाल के प्रति सहानुभूति भी नजर आई।