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राजस्थान का सबसे बड़ा सवाल, गहलोत-पायलट में से किसकी सीएम दावेदारी पर लगेगी मुहर
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 11 Dec 2018 02:31 PM IST
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Sachin Pilot, Ashok Gehlot
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राजस्थान में कांग्रेस की जीत की संभावना के बाद अब सबसे बड़ा सवाल है कि मुख्यमंत्री पद की कमान कौन संभालेगा। यहां चार दावेदार हैं जिनमें दो नेता के बीच सबसे बड़ी होड़ है। पूर्व सीएम अशोक गहलोत और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट दोनों की सीएम पद के सबसे बड़े दावेदार हैं। राजस्थान में अब सबसे बड़ा सवाल सीएम पद को लेकर पैदा हो गया है। आखिर गहलोत और पायलट में से किसके सिर पर ये सेहरा बंधेगा? या फिर कोई तीसरा बाजी मार ले जाएगा? क्या सीपी जोशी या गिरिजा व्यास में से किसी की लॉटरी निकलेगी।
गहलोत इन दिनों केंद्र में नई भूमिका में हैं। वह दो बार राजस्थान के सीएम रह चुके हैं। सीएम पद का प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। क्या गहलोत आसानी से सीएम पद पर दावा छोड़ देंगे? उनके अनुभव को देखते हुए इस पद के लिए वही सबसे मुफीद लगते हैं। वह दो बार सीएम रह चुके हैं और पार्टी में कोई उनका प्रतिद्वंदी नहीं है। हाईकमान के भी वह बेहद करीबी हैं।
उधर, युवा नेता सचिन पायलट एक साफ सुधरी छवि वाले नेता हैं और राहुल गांधी के बेहद करीबी भी। राहुल ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाकर चुनाव की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी। क्या वह आसानी से अपनी दावेदारी छोड़ देंगे? दिग्गज नेताओं की मौजूदगी में सचिन पायलट को पहली बार राजस्थान कांग्रेस की कमान मिली है।
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आज कांग्रेस के पक्ष में आए रुझानों के बाद दोनों नेताओं ने अपनी दावेदारी की बात को नकारा नहीं। दोनों ने कहा कि इसका फैसला राहुल गांधी करेंगे। यानि आने वाले वक्त में गहलोत और पायलट के बीच सीएम दावेदारी पर नया संग्राम छिड़ सकता है। दोनों नेताओं के लिए लामबंदी छिड़ जाए तो हैरत नहीं होगी।
दिलचस्प है कि 2008 में एक वोट से हार के चलते सीपी जोशी की सीएम बनने की मंशा अधूरी रह गई थी। तो क्या झगड़ा बढ़ने पर उनका नंबर भी आ सकता है? इन सबके बीच वरिष्ठ नेता गिरिजा व्यास की क्या भूमिका होगी? गिरिजा व्यास भी एक कद्दावर नेता हैं और उनका विधानसभा चुनाव लड़ना भी नए विकल्प को जन्म देता है।
इसी तरह रामेश्वर डूडी भी एक बड़े नेता हैं जो वक्त आने पर अपनी दावेदारी पेश कर सकते हैं। वह राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं।
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गहलोत इन दिनों केंद्र में नई भूमिका में हैं। वह दो बार राजस्थान के सीएम रह चुके हैं। सीएम पद का प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। क्या गहलोत आसानी से सीएम पद पर दावा छोड़ देंगे? उनके अनुभव को देखते हुए इस पद के लिए वही सबसे मुफीद लगते हैं। वह दो बार सीएम रह चुके हैं और पार्टी में कोई उनका प्रतिद्वंदी नहीं है। हाईकमान के भी वह बेहद करीबी हैं।
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उधर, युवा नेता सचिन पायलट एक साफ सुधरी छवि वाले नेता हैं और राहुल गांधी के बेहद करीबी भी। राहुल ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाकर चुनाव की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी। क्या वह आसानी से अपनी दावेदारी छोड़ देंगे? दिग्गज नेताओं की मौजूदगी में सचिन पायलट को पहली बार राजस्थान कांग्रेस की कमान मिली है।
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आज कांग्रेस के पक्ष में आए रुझानों के बाद दोनों नेताओं ने अपनी दावेदारी की बात को नकारा नहीं। दोनों ने कहा कि इसका फैसला राहुल गांधी करेंगे। यानि आने वाले वक्त में गहलोत और पायलट के बीच सीएम दावेदारी पर नया संग्राम छिड़ सकता है। दोनों नेताओं के लिए लामबंदी छिड़ जाए तो हैरत नहीं होगी।
दिलचस्प है कि 2008 में एक वोट से हार के चलते सीपी जोशी की सीएम बनने की मंशा अधूरी रह गई थी। तो क्या झगड़ा बढ़ने पर उनका नंबर भी आ सकता है? इन सबके बीच वरिष्ठ नेता गिरिजा व्यास की क्या भूमिका होगी? गिरिजा व्यास भी एक कद्दावर नेता हैं और उनका विधानसभा चुनाव लड़ना भी नए विकल्प को जन्म देता है।
इसी तरह रामेश्वर डूडी भी एक बड़े नेता हैं जो वक्त आने पर अपनी दावेदारी पेश कर सकते हैं। वह राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं।