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Rajasthan Report: राजस्थान में 7 हजार से ज्यादा बच्चे लापता, 84% नाबालिग लड़कियां; NCRB रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

Mon, 11 May 2026 08:43 AM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Sourabh Bhatt Updated Mon, 11 May 2026 08:43 AM IST
सार

NCRB रिपोर्ट 2024 के अनुसार राजस्थान में 7,198 बच्चे लापता हुए, जिनमें 84% नाबालिग लड़कियां हैं। राज्य अपहरण मामलों में भी देश में चौथे स्थान पर रहा। मानव तस्करी के 75 मामलों में 333 पीड़ितों को बचाया गया, जबकि कई बच्चे अब भी लापता हैं।

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Rajasthan Among Top States for Missing Children in 2024, NCRB Data Raises Alarm Over Girls’ Safety
राजस्थान में हर साल हजारों घर हो रहे सूने - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की वर्ष 2024 की रिपोर्ट में राजस्थान में बच्चों के लापता होने और मानव तस्करी के मामलों को लेकर चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान देश में बच्चों के लापता होने के मामलों में चौथे स्थान पर रहा। राज्य में वर्ष 2024 के दौरान कुल 7,198 बच्चे लापता दर्ज किए गए, जिनमें 84 प्रतिशत से अधिक नाबालिग लड़कियां हैं।

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रिपोर्ट के मुताबिक बच्चों के लापता होने के मामलों में पश्चिम बंगाल पहले स्थान पर रहा, जहां 15,849 बच्चे लापता हुए। इसके बाद मध्य प्रदेश में 14,296, तमिलनाडु में 8,032, बिहार में 7,576 और राजस्थान में 7,198 मामले दर्ज किए गए।

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राजस्थान में लापता बच्चों में 1,226 बच्चे अब तक बरामद नहीं हो सके हैं। इनमें 882 लड़कियां और 344 लड़के शामिल हैं। वहीं 1,399 बच्चे ऐसे भी हैं जो एक साल से अधिक समय से लापता हैं और अब तक उनका कोई सुराग नहीं मिला। इनमें 1,008 लड़कियां और 391 लड़के शामिल हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि चार बच्चे मृत अवस्था में बरामद किए गए।

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वहीं राज्य में वयस्कों के लापता होने के मामले भी काफी अधिक रहे। वर्ष 2024 में राजस्थान में 39,384 वयस्क लापता हुए, जिनमें 30,336 महिलाएं और 9,048 पुरुष शामिल हैं। इसके अलावा 27,777 लोग एक साल से अधिक समय से लापता हैं, जबकि 29,345 लोग अब तक ट्रेस नहीं हो सके हैं।

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मानव तस्करी के मामलों में NCRB रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान में वर्ष 2024 में 75 मामले दर्ज किए गए। हालांकि यह संख्या 2023 के 81 और 2022 के 117 मामलों की तुलना में कम है। इन मामलों में अब तक 333 पीड़ितों को मुक्त कराया गया है, जिनमें 19 नाबालिग लड़कियां और 43 महिलाएं शामिल हैं। दो पीड़ित विदेशी नागरिक भी बताए गए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार बचाए गए 273 लोगों को जबरन मजदूरी में धकेला गया था, जबकि 38 लोगों को देह व्यापार में शोषण का शिकार बनाया गया। वहीं 5 लोगों की जबरन शादी करवाई गई। इन मामलों में अब तक 154 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और सभी मामलों में पुलिस चार्जशीट पेश कर चुकी है।

राजस्थान अपहरण के मामलों में भी देश में चौथे स्थान पर रहा। राज्य में कुल 9,083 अपहरण के मामले दर्ज हुए। इनमें 60 प्रतिशत से अधिक पीड़ित नाबालिग थे। आंकड़ों के अनुसार 59 बच्चे 6 साल से कम उम्र के, 268 बच्चे 6 से 12 साल, 1,531 बच्चे 12 से 16 साल और 3,633 बच्चे 16 से 18 साल आयु वर्ग के थे।

रिपोर्ट में दलित और आदिवासी बच्चों के अपहरण के मामले भी सामने आए हैं। वर्ष 2024 में 212 दलित और 69 आदिवासी लोगों के अपहरण के मामले दर्ज हुए। वहीं 13 दलित और 9 आदिवासी बच्चों के अपहरण की घटनाएं भी सामने आईं।

पुलिस मुख्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार राजस्थान में मानव तस्करी रोकने के लिए 51 पुलिस जिलों में 43 एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट सक्रिय हैं। पुलिस दक्षिणी और पूर्वी राजस्थान के उन इलाकों में विशेष निगरानी रख रही है, जहां बच्चों के लापता होने और बाल मजदूरी के मामले ज्यादा सामने आते हैं। साथ ही बाल विवाह और नाबालिग लड़कियों की खरीद-फरोख्त रोकने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं।

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