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Pali News: भाजपा के लिए सुरक्षित रहेगी सीट या कांग्रेस रोक देगी विजय रथ, जानें क्या रहा पाली सीट का इतिहास
Sat, 01 Jun 2024 09:47 PM IST
अर्पित याज्ञनिक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पाली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पाली
Published by: अर्पित याज्ञनिक
Updated Sat, 01 Jun 2024 09:47 PM IST
सार
गांव की चौपालों और चाय की थड़ी पर चारों ओर चुनावी चर्चा का शोर है। क्षेत्र के विकास के स्थानीय मुद्दों की जगह राम मंदिर और मोदी नाम के चेहरे का जोर ज़्यादा नज़र आ रहा है।
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पाली लोसभा सीट के प्रत्याशी।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
लोकसभा चुनाव की रणभेरी बजने के बाद पाली लोकसभा सीट पर काबिज होने के लिए भाजपा और कांग्रेस प्रत्याशियों के लगाए गए दमखम का परिणाम 4 जून को सभी के सामने होगा।
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इस बार के चुनावी रण में जहां भाजपा ने निवर्तमान सांसद पीपी चौधरी पर फिर से विश्वास जताया। इसके चलते चौधरी इस बार हैट्रिक लगाने के लिए आतुर हैं। वहीं कांग्रेस उनका विजय रथ रोकने के संगीता बेनीवाल को अपना उम्मीदवार बनाया है। इन चुनावों में मुख्य मुकाबला इन दोनों ही प्रत्याशियों के बीच होता दिखाई दे रहा है।
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अरावली पहाड़ी की वादियों से सटे मारवाड़ के इस लोकसभा सीट की राजनीतिक बिसात में पड़ोसी जिले भी अहम भूमिका निभाते हैं। इस जिले की सीमाएं उत्तर में नागौर तो पश्चिम दिशा में जालौर से मिलती हैं। इस लिए इन दोनों ही जिलों का प्रभाव यहां देखा जा सकता है। 2014 और 2019 में इस सीट पर भाजपा काबिज रही है। ये बात और है कि लगातार दो बार कड़ी से कड़ी जुड़ने के बावजूद क्षेत्र की जनता की प्यास बुझाने के लिए ट्रेन से पानी मंगवाना पड़ता है और औधोगिक नगरी पाली की प्रदूषण की समस्या का भी स्थाई समाधान नहीं होने से किसान और उद्यमी दोनों ही परेशान हैं।
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पलायन को मजबूर लोग
पाली की रीढ़ को हड्डी कपड़ा उद्योग पर लटकी प्रदूषण की तलवार और रोजगार के अन्य विकल्प न होने से युवाओं को दूसरे शहरों में पलायन को मजबूर होना पड़ रहा है।
मुकाबला रोमांचक होने के आसार
पाली का मारवाड़ अंचल भाजपा का गढ़ माना जाता है। जातीय समीकरण यहां प्रत्याशियों की जीत तय करते हैं। इस बार भाजपा ने सीरवी और कांग्रेस ने जाट चेहरे पर अपना दाव लगाया है। ऐसे में मुकाबला रोमांचक होने के आसार दिखाई देता है। कांग्रेस को उम्मीद है कि यहां की जनता किसी को भी तीन बार ताज नहीं सौंपती। राजस्थान में भाजपा पाली लोकसभा को अपनी सुरक्षित सीट मानतीं है, लेकिन यहां की जनता कभी किसी को सिर पर चढ़ाने में विश्वास नहीं करती और मौका मिलते ही जोर का झटका भी देती है। पाली संसदीय क्षेत्र में जाट समुदाय के 3.50 लाख, सीरवी 2.50 लाख, वहीं अनुसूचित जाती जनजाति के करीब 4.50 लाख मतदाता हैं।
पिछले चुनावों को देखें तो पाली वासियों ने 1999 और 2004 में दो बार बीजेपी को ताज सौंपा, लेकिन 2009 के चुनावों में जीत उन्माद चढ़ने से पहले ही भाजपा को उतार भी दिया। इस चुनाव में यहां से कांग्रेस के बद्रीराम जाखड़ को चुनकर मतदाताओं ने दिल्ली भेजा। इसके बाद 2014 का चुनाव हुआ तो बीजेपी के पीपी चौधरी जीते और उन्होंने साल 2019 में भी अपनी जीत कायम रखी रखते हुए लगातार दूसरी बार पाली का लोकसभा में प्रतिनिधित्व किया। इस बार पीपी चौधरी इस सीट पर हैट्रिक लगाने के इरादे से उतरे हैं। वहीं, कांग्रेस भी भाजपा का विजय रथ रोकने के अपना पूरा दमख़म लगा रही है। वैसे भी इस लोकसभा सीट पर 1980 के बाद कांग्रेस ने 1984 में दोबारा जीत दर्ज की थी। उसके बाद हुए ज्यादातर चुनावों में बीजेपी को जीत मिलती रही है। हालांकि बीच बीच में यह सीट कांग्रेस के खाते में भी गई है। पाली लोकसभा क्षेत्र सीरवी, विश्नोई, राजपूत, जाट और अनुसूचित जाति बाहुल्य का क्षेत्र माना जाता है।
कुल 8 विधानसभा सीट
पाली लोकसभा सीट की बात करें तो इसमें कुल 8 विधानसभा सीट आती है। इनमें जोधपुर जिले की ओसियां, भोपालगढ़ और बिलाड़ा और पाली की पाली, सोजत, सुमेरपुर, मारवाड़ जंक्शन, बाली शामिल हैं। 1952 में अस्तित्व में आई इस लोकसभा सीट पर पहली बार स्वतंत्र उम्मीदवार जनरल अजीत सिंह सांसद बने थे। हालांकि 1957 के चुनाव में कांग्रेस के हरीश चंद्र माथुर और 1962 में कांग्रेस के ही जसवंतराज मेहता सांसद चुने गए। फिर 19 67 के चुनाव में स्वतंत्र पार्टी के एसके टपुरिया और 1971 के चुनाव में कांग्रेस के मूलचंद डागा यहां से सांसद बने। फिर 1977 के चुनाव में पहली बार यह सीट जनता पार्टी की झोली में गई, लेकिन 80 और 84 के चुनाव में यह सीट वापस कांग्रेस के पास आ गई और यहां से मूल चंद डागा सांसद चुने गए। फिर 19 88 के उपचुनाव में कांग्रेस के ही शंकर लाल शर्मा यहां से चुने गए। भाजपा की एंट्री यहां 1989 के चुनाव में हुई और गुमानमल लोढ़ा यहां से सांसद चुने गए। उन्होंने 1991 और 1996 के चुनाव में भी अपनी जीत कायम रखी।
हालांकि 1998 के चुनाव में कांग्रेस के मीठा लाल जैन ने ये सीट झटक ली, लेकिन अगले ही साल 1999 के चुनाव में यह सीट वापस भाजपा के खाते में चली गई और पुष्प जैन सांसद बने। इसके बाद 2004 में जैन दोबारा चुनाव जीतकर दिल्ली गई, लेकिन 2009 में कांग्रेस के बद्रीराम जाखड़ यहां से जीत हासिल कर भाजपा से इस सीट को छीन लिया। वर्तमान में यहां से 2014 और 2019 का लोकसभा चुनाव जीतकर पीपी चौधरी लगातार 10 साल से सांसद हैं।
पाली लोकसभा क्षेत्र के आठ विधानसभा क्षेत्रों में कुल 23 लाख 43 हजार 232 मतदाता हैं। इसमें 12 लाख 17 हजार 299 पुरूष मतदाता हैं व 11 लाख 25 हजार 895 महिला मतदाता और 38 मतदाता थर्ड जेंडर वोटर है। विधानसभा क्षेत्र सोजत विधानसभा क्षेत्र में 2 लाख 48 हजार 715, पाली विधानसभा क्षेत्र में 2 लाख 80 हजार 597, मारवाड़ जंक्षन विधानसभा क्षेत्र में 2 लाख 97 हजार 626, बाली विधानसभा क्षेत्र में 3 लाख 36 हजार 343, सुमेरपुर विधानसभा क्षेत्र में 3 लाख 13 हजार 125, ओसियां विधानसभा क्षेत्र में 2 लाख 67 हजार 972, बिलाड़ा विधानसभा क्षेत्र में 2 लाख 92 हजार 307 तथा भोपालगढ़ विधानसभा क्षेत्र में 3 लाख 06 हजार 547 मतदाता शामिल हैं।