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Padma Award: पीढ़ियों से विरासत में मिली कला को बढ़ाया आगे, कौन हैं पद्म श्री पुरस्कार पाने वाले बहरूपिया बाबा
Thu, 25 Jan 2024 10:37 PM IST
उदित दीक्षित
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: उदित दीक्षित
Updated Thu, 25 Jan 2024 10:37 PM IST
सार
Padma Award: राजस्थान के जानकी लाल (Janakilal) को पद्म श्री पुरस्कार (Padma Sri) के लिए चुना गया है। ये प्रदेश के भीलवाड़ा जिले के रहने वाले हैं। इन्हें बहरूपिया बाबा के नाम से भी जाना जाता है।
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जानकी लाल को बहरूपिया बाबा के नाम से भी जाना जाता है।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
केंद्र की मोदी सरकार ने गणतंत्र दिवस से पहले पद्म पुरस्कार का एलान कर दिया है। राजस्थान के जानकीलाल (Janakilal) को पद्म श्री पुरस्कार 2024 (Padma Sri) के लिए चुना गया है। ये प्रदेश के भीलवाड़ा जिले के रहने वाले हैं और इन्हें बहरूपिया बाबा के नाम से जाना जाता है। 83 साल के जानकीलाल विरासत में मिली कला को आगे बढ़ा रहे हैं। जानकीलाल ने अपनी रंगकला के माध्यम से ग्लासगो, बर्लिन, न्यूकेसल, लंदन, न्यूयॉर्क, दुबई, मेलबोर्न में भी प्रस्तुतियां दीं हैं। वे होली और अन्य त्योहार पर शहर में अपनी कला से लोगों का लोकानुरंजन करते हैं।
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दादा और पिता से मिली कला
संगीत कला केंद्र भीलवाड़ा राजस्थान दिवस और विश्व रंगमंच दिवस पर जानकीलाल को लाइफ टाइम एचीवमेंट अवॉर्ड दे चुका है। 83 साल के जानकीलाल बताते हैं कि बहरूपिया कला उन्हें विरासत में मिली है। उनके दादा कालूलाल और पिता हजारी लाल इस कला का प्रदर्शन किया करते थे और इसी से पारिवार का पालन पोषण भी होता था।
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65 साल से लोगों को हंसा रहे बेहरूपिया बाबा
जानकीलाल बीते 65 साल से नाना प्रकार की वेशभूषा पहनकर बहरूपिया कला का प्रदर्शन करते आ रहे हैं। वह गाडोलिया लुहार, कालबेलिया, काबुली पठान, ईरानी, फकीर, राजा, नारद, भगवान भोलेनाथ, माता पार्वती, साधु, दूल्हा, दुल्हन समेत अन्य स्वांग रचाकर औरे उसके स्वरूप वेशभूषा पहनकर लोगों का मनोरंजन करते हैं। वह मेवाड़ी, राजस्थानी, पंजाबी और पठानी भाषा भी बेखूबी बोल लेते हैं। दो दशक पहले भीलवाड़ा में कई परिवार इस कला से जुड़े थे, लेकिन अब जानकीलाल ही इस कला को संभाले हुए हैं।
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विदेश में मंकी मैन बुलाते थे लोग
जानकीलाल ने बताया कि उन्हें उदयपुर लोक कला मंडल, मुंबई, जोधपुर और विदेशों में भी कई खिताब मिले। दिल्ली में उन्होंने एक महीने तक लगातार कार्यक्रम किया था। साल 1986 में लंदन और न्यूयॉर्क गए, इसके बाद 1988 में जर्मन, रोम, बर्मिंघम और फिर लंदन गए थे। न्यूयॉर्क, दुबई, और मेलबॉर्न में भी उनकी कला को खास दाद मिली। वहां उन्हें लोग मंकी मैन के नाम से जानने लगे थे। विदेश में उन्होंने फकीर और बंदर का रोल अदा किया था। उम्र अधिक होने के बाद भी जानकीलाल होली, दीपावली समेत अन्य त्योहार पर भीलवाड़ा में अपनी कला से लोगों का लोकानुरंजन करते हैं।