Mandsaur: नामदेव समाज ने की रावण की जमाई के रूप में पूजा, प्रसाद किया गया वितरित
Mandsaur: दशहरे पर जहां पूरे देश में रावण को बुराई का प्रतीक मानकर उसका वध किया जाता है। वही मंदसौर के खानपुरा क्षेत्र में रावण को जमाई मानकर पूजा की जाती है। रावण की प्रतिमा के सामने से क्षेत्र की महिलाएं घूंघट निकालकर निकलती है।
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मंदसौर के खानपुरा में दशहरे के दिन एक अनोखी परंपरा मनाई जाती है। यहां रावण को जमाई मानकर पूजा की जाती है। इतना ही नहीं रावण की प्रतिमा के सामने से क्षेत्र की महिलाएं घूंघट निकालकर निकलती है। बता दें कि यहां रावण की 51 फिट ऊंची प्रतिमा स्थापित है। कहा ऐसा भी जाता है कि रावण के पैर में लच्छा बांधने से एक राता बुखार भी ठीक होता है।
ढोल नगाड़ों के साथ रावण की प्रतिमा स्थल पहुंचे
नामदेव समाज के लोग रावण की पत्नी मंदोदरी को अपनी बेटी का दर्जा देते है। इसी लिहाज से मंदसौर में रावण को जमाई राजा का दर्जा दिया जाता है। दशहरे पर नामदेव समाज के लोग ढोल नगाड़ों के साथ रावण की प्रतिमा स्थल पहुंचे और रावण की पूजा व आरती कर प्रसाद वितरित किये गए।
वध करने के लिए दिया निमंत्रण
नामदेव समाज के अध्यक्ष अशोक बघेरवाल तथा सचिव राजेश मेढ़तवाल ने बताया कि जिस तरह जमाई की पूजा की जाती है। ठीक उसी तरह हमने भी रावण महाराज की पूजा कर आरती की व प्रसाद वितरित किया। साथ ही रावण महाराज के पैर में लच्छा बांधकर शाम को गोधूली वेला में युद्ध का निमंत्रण दिया है। इसका कारण यह है कि हमने अच्छाई की पूजा की है। वहीं शाम को गोधूली वेला में बुराई का वध किया जाएगा।