माइक बंद हुआ तो भड़के विधायक रविंद्र सिंह भाटी: बोले- सत्ता की कठपुतली न बनें अफसर, खाकी की गरिमा रखें
ईडब्ल्यूएस सरलीकरण यात्रा के दौरान नागौर पहुंचे विधायक रविंद्र सिंह भाटी माइक बंद किए जाने पर प्रशासन पर भड़क गए। उन्होंने अधिकारियों से सत्ता की कठपुतली न बनने और निष्पक्ष होकर जनता की सेवा करने की अपील की। भाटी ने ईडब्ल्यूएस प्रमाण-पत्र की वैधता अवधि बढ़ाने समेत कई मांगें भी उठाईं।
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शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी की ईडब्ल्यूएस सरलीकरण यात्रा का दूसरा चरण नागौर पहुंचा। इस दौरान विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने प्रशासनिक रवैये और कार्यक्रम के दौरान माइक बंद किए जाने पर कड़ा आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने मंच से प्रशासन को चेतावनी दी कि अधिकारी सत्ता की कठपुतली बनकर काम करना बंद करें और अपनी कार्यशैली में सुधार लाएं। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से खाकी की मर्यादा और पद की गरिमा बनाए रखने की अपील की। 5 अक्तूबर से शुरू हुई इस यात्रा का दूसरा चरण बीकानेर के बाद नागौर और बुटाटी पहुंचा।
प्रशासनिक रवैये पर कड़ा आक्रोश
नागौर में मंच से बोलते हुए रविंद्र सिंह भाटी ने कहा कि वे आम जनता और युवाओं के हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। यात्रा जब बुटाटी पहुंची तो प्रशासन की ओर से माइक बंद किए जाने पर उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया दी। विधायक ने कहा कि माइक बंद करने से जनता के हौसले नहीं टूटेंगे और न ही उनकी आवाज दबेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि जयपुर में सत्ता में बैठे लोग आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों की आवाज को दबाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता का कार्यकाल केवल ढाई साल बचा है, इसलिए अधिकारियों को निष्पक्ष होकर जनता की सेवा करनी चाहिए।
पुलिस और जेल पर चेतावनी
प्रशासन द्वारा कार्रवाई करने और जेल भेजने की चेतावनी दिए जाने पर भाटी ने अधिकारियों से अपनी जेलों की क्षमता बढ़ाने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि यदि उनके साथ चल रहे सभी साथी एकत्रित होकर आ गए तो जेलों में पैर रखने की जगह भी नहीं बचेगी। नागौर के कार्यवाहक पुलिस अधीक्षक का उल्लेख करते हुए भाटी ने अधिकारियों को नौकरी में शामिल होते समय ली गई शपथ याद दिलाई। उन्होंने कहा कि अधिकारी किसी की चापलूसी करने के बजाय अपने कंधे पर लगे विजय स्तंभ और टोपी पर लगे अशोक स्तंभ का मान बनाए रखें।
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जनसमर्थन और भावी मांगें
सभाओं में उमड़ी भीड़ के बीच समर्थकों ने नारेबाजी की। भाटी ने मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि वे निर्धन ब्राह्मण, जैन, विश्नोई और राजपुरोहित समाज के युवाओं की पीड़ा सामने रखने आए हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 से अब तक उन पर कई मुकदमे दर्ज हुए हैं और वे जेल भी गए हैं। वे युवाओं के हित के लिए दोबारा जेल जाने को तैयार हैं। इस यात्रा के जरिये ईडब्ल्यूएस प्रमाण-पत्र की वैधता अवधि बढ़ाने, राज्य के प्रमाण-पत्रों को केंद्रीय स्तर पर मान्यता देने और पात्रता नियमों को व्यावहारिक बनाने की मांग उठाई गई।