फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   Nagaur News ›   mohan bhagwat nagaur gotan education success meaningful life kamalapat singhania

नागौर: गोटन पहुंचे मोहन भागवत, बोले- सफलता से ज्यादा जरूरी जीवन को सार्थक बनाना

Sun, 13 Sep 2026 02:54 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर Published by: आशुतोष प्रताप सिंह Updated Sun, 13 Sep 2026 02:54 PM IST
सार

नागौर के गोटन में लाला कमलापत सिंघानिया शिक्षण संस्थान में आयोजित कमलापत सिंघानिया एजुकेशन सेंटर के 37वें वार्षिकोत्सव एवं पुरस्कार वितरण समारोह में आरएसएस सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने विद्यार्थियों को सफलता के साथ जीवन को सार्थक बनाने का संदेश दिया।

विज्ञापन
mohan bhagwat nagaur gotan education success meaningful life kamalapat singhania
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत शनिवार, 12 सितंबर को नागौर जिले के गोटन पहुंचे। यहां लाला कमलापत सिंघानिया शिक्षण संस्थान में आयोजित कमलापत सिंघानिया एजुकेशन सेंटर के 37वें वार्षिकोत्सव एवं पुरस्कार वितरण समारोह में उन्होंने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। समारोह में प्रतिभावान विद्यार्थियों को सम्मानित करने के साथ डॉ. भागवत ने उन्हें जीवन, शिक्षा और सफलता के मायने समझाए। करीब 29 मिनट के संबोधन में उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता हासिल करना महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी अधिक जरूरी है कि व्यक्ति अपने जीवन को सार्थक बनाए। आज दुनिया को केवल अपने लिए आगे बढ़ने वाले लोगों की नहीं, बल्कि ऐसे व्यक्तित्वों की आवश्यकता है, जो समाज और देश के हित में अपना योगदान दे सकें।

विज्ञापन

शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ नौकरी और व्यक्तिगत सफलता नहीं

डॉ. भागवत ने शिक्षा के उद्देश्य को केवल व्यक्तिगत विकास और परिवार की जरूरतों तक सीमित नहीं माना। उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि शिक्षा का वास्तविक मूल्य तब सामने आता है, जब उससे व्यक्ति के साथ-साथ दूसरे लोगों का जीवन भी बेहतर हो। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी शिक्षा हासिल करके केवल अपना भविष्य सुरक्षित करने तक सीमित न रहें, बल्कि अपनी योग्यता और ज्ञान का इस्तेमाल समाज के लिए भी करें। यदि किसी व्यक्ति की शिक्षा से दूसरे लोग आगे बढ़ते हैं और समाज को उसका लाभ मिलता है, तभी उस शिक्षा को वास्तविक अर्थों में सार्थक शिक्षा कहा जा सकता है।

विज्ञापन

सफलता से आगे ‘सार्थक जीवन’ पर जोर

विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख ने सफलता और सार्थकता के बीच अंतर को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ऊंचा पद, अच्छी नौकरी, पैसा या व्यक्तिगत उपलब्धियां जीवन की सफलता का हिस्सा हो सकती हैं, लेकिन जीवन की सार्थकता इससे कहीं व्यापक है। एक व्यक्ति अपने ज्ञान, प्रतिभा और सामर्थ्य का उपयोग किस तरह समाज के लिए करता है, यही उसके व्यक्तित्व को अलग पहचान देता है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य निर्धारित करने के साथ यह भी सोचने का संदेश दिया कि उनकी उपलब्धियों से समाज और देश को क्या लाभ मिलेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

अर्जुन से महाराणा प्रताप और भगत सिंह तक के उदाहरण

अपने संबोधन में डॉ. मोहन भागवत ने विद्यार्थियों को प्रेरित करने के लिए इतिहास और भारतीय परंपरा से जुड़े कई उदाहरण सामने रखे। उन्होंने अर्जुन, महाराणा प्रताप, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह और स्वामी विवेकानंद जैसे महान व्यक्तित्वों का उल्लेख किया। उन्होंने भगवान श्रीराम और विभीषण से जुड़े प्रसंगों के माध्यम से भी विद्यार्थियों के सामने आदर्श और जीवन मूल्यों की बात रखी। इन उदाहरणों के जरिए उन्होंने यह संदेश देने का प्रयास किया कि ज्ञान और शिक्षा का वास्तविक महत्व तभी है, जब उसका इस्तेमाल कर्तव्य, समाजहित और उच्च आदर्शों के लिए किया जाए।

प्रतिभावान विद्यार्थियों को किया सम्मानित

कार्यक्रम के दौरान डॉ. मोहन भागवत ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार प्रदान किए। पुरस्कार प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के लिए यह अवसर विशेष रहा। उन्होंने विद्यार्थियों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए आगे भी निरंतर सीखने और अपने व्यक्तित्व के विकास पर ध्यान देने का संदेश दिया।

शिक्षा के साथ संस्कार और जिम्मेदारी का संदेश

गोटन में आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षा के साथ संस्कार, जिम्मेदारी और समाज के प्रति योगदान का संदेश प्रमुख रूप से सामने आया। डॉ. भागवत के संबोधन का केंद्रीय भाव यही रहा कि विद्यार्थी केवल डिग्री और करियर तक सीमित लक्ष्य न रखें, बल्कि अपने जीवन के उद्देश्य को व्यापक बनाएं। उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि “सफलता हासिल करना जरूरी है, लेकिन जीवन को सार्थक बनाना उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है।”


समारोह में डॉ. भागवत ने शिक्षा को केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम मानने के बजाय उसे व्यक्तित्व निर्माण, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्रहित से जोड़ने पर जोर दिया। उनका संबोधन विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए प्रेरणादायी रहा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed