मीणा को राहत नहीं: एसडीएम थप्पड़कांड में नरेश मीणा को बड़ा झटका, नियमित जमानत याचिका खारिज; अब आगे क्या?
टोंक की विशेष एससी/एसटी अदालत ने एसडीएम थप्पड़कांड मामले में नरेश मीणा की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। जमानत न मिलने के बाद उनके वकील ने फैसले को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती देने की घोषणा की है।
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राजस्थान के बहुचर्चित एसडीएम थप्पड़कांड मामले में निर्दलीय प्रत्याशी रहे नरेश मीणा को बड़ा झटका लगा है। टोंक की विशेष एससी/एसटी अदालत ने मंगलवार को उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। विशिष्ट लोक अभियोजक रामावतार सोनी ने बताया कि न्यायाधीश आरती माहेश्वरी ने शाम करीब 4:45 बजे यह आदेश सुनाया। फैसले के बाद नरेश मीणा के अधिवक्ता फतेहराम मीणा ने कहा कि इस आदेश को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी और जल्द ही जमानत याचिका दायर की जाएगी।
जमानत रद्द होने के बाद किया था सरेंडर
राजस्थान हाईकोर्ट ने इससे पहले नरेश मीणा को सशर्त जमानत दी थी। हालांकि, जमानत की शर्तों के उल्लंघन का आरोप लगने पर टोंक की एससी/एसटी अदालत ने 13 जुलाई 2026 को उनकी जमानत रद्द कर दी थी। इसके बाद 6 अगस्त को नरेश मीणा ने नगरफोर्ट थाने में सरेंडर कर दिया।
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झालावाड़ के पिपलोदी स्थित सरकारी स्कूल का कमरा गिरने से सात बच्चों की मौत के बाद एसआरजी अस्पताल के बाहर हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था। इसके बाद नगरफोर्ट थाना पुलिस के आवेदन पर अदालत ने उनकी जमानत निरस्त करने का आदेश दिया था।
देवली-उनियारा उपचुनाव के दौरान हुआ था मामला
यह मामला 13 नवंबर 2024 को देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव के दौरान सामने आया था। समरावता गांव के ग्रामीणों ने गांव को उनियारा उपखंड में शामिल करने की मांग को लेकर मतदान का बहिष्कार किया था। उस दौरान निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा भी ग्रामीणों के साथ धरने पर बैठे थे।
आरोप है कि तीन लोगों से जबरन मतदान कराने का विरोध करते हुए नरेश मीणा ने तत्कालीन एसडीएम अमित चौधरी को थप्पड़ मार दिया था। पुलिस ने 14 नवंबर 2024 को उन्हें गिरफ्तार किया था। इस मामले में 60 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हुई थी। नरेश मीणा को छोड़कर अन्य सभी आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है।