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कुचेरा चेयरमैन चुनाव से पहले बड़ा मोड़: छुट्टी के दिन खुला हाईकोर्ट, तेजपाल मिर्धा की गिरफ्तारी पर रोक
Sun, 20 Sep 2026 05:25 PM IST
प्रतीक पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: प्रतीक पांडेय
Updated Sun, 20 Sep 2026 05:25 PM IST
सार
कुचेरा नगर पालिका चेयरमैन चुनाव से एक दिन पहले राजस्थान हाईकोर्ट ने तेजपाल मिर्धा को अंतरिम राहत देते हुए अगली सुनवाई तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। एसीबी ने 18 सितंबर को उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। मामले की अगली सुनवाई पांच अक्टूबर को होगी।
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तेजपाल मिर्धा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कुचेरा नगर पालिका के चेयरमैन चुनाव से ठीक एक दिन पहले राजस्थान हाईकोर्ट ने रविवार को छुट्टी के बावजूद विशेष सुनवाई करते हुए पूर्व चेयरमैन और वर्तमान पार्षद तेजपाल मिर्धा को अंतरिम राहत दी। जस्टिस कुलदीप माथुर की विशेष बेंच ने एसीबी की ओर से दर्ज एफआईआर के मामले में अगली सुनवाई तक मिर्धा की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी।
चुनाव में हिस्सा लेने के लिए मांगी थी राहत
मिर्धा ने एसीबी में मामला दर्ज होने के बाद गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनकी ओर से चेयरमैन चुनाव में मतदान और चुनाव प्रक्रिया में भाग लेने के लिए तत्काल संरक्षण मांगा गया था। मामले की तात्कालिकता को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर रविवार को विशेष सुनवाई तय की गई।
सुबह सुनवाई, दोपहर में आया आदेश
रविवार सुबह जस्टिस कुलदीप माथुर की विशेष बेंच के समक्ष सुनवाई हुई। मिर्धा की ओर से अधिवक्ता रामावतार चौधरी और सहयोगी अधिवक्ता सुमेर सिंह गौर ने पक्ष रखा। सुनवाई के बाद अदालत ने दोपहर करीब दो बजे आदेश जारी करते हुए एसीबी जयपुर के अधिकारियों को अगली सुनवाई तक मिर्धा को गिरफ्तार नहीं करने के निर्देश दिए।
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मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को होगी। अदालत ने मिर्धा को याचिका में आवश्यक संशोधन करने की स्वतंत्रता भी दी है, जबकि राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया गया है।
21 सितंबर को होना है चेयरमैन का चुनाव
तेजपाल मिर्धा 14 सितंबर को कुचेरा नगर पालिका के वार्ड नंबर 21 से पार्षद निर्वाचित हुए थे। इसके बाद उन्होंने चेयरमैन पद के लिए नामांकन दाखिल किया। 16 सितंबर को नामांकन और 18 सितंबर को नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी हुई। अब चेयरमैन पद के लिए 21 सितंबर को चुनाव होना है।
इसी बीच 18 सितंबर को मिर्धा के खिलाफ एसीबी ने एफआईआर दर्ज कर दी। ऐसे में गिरफ्तारी की स्थिति में चेयरमैन चुनाव में हिस्सा नहीं ले पाने की आशंका थी। इसी आधार पर उन्होंने हाईकोर्ट से तत्काल संरक्षण मांगा।
2018 की शिकायत पर आठ साल बाद एफआईआर
मामला मिर्धा के 2015 से 2018 तक कुचेरा नगर पालिका चेयरमैन रहने के कार्यकाल से जुड़ा है। याचिका के अनुसार, तत्कालीन वार्ड नंबर तीन के पार्षद शैतानराम टाक ने चार मई 2018 को एसीबी में शिकायत दी थी।
शिकायत में विभिन्न कार्यादेश जारी करने में नगर पालिका के अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ कथित मिलीभगत, वित्तीय, तकनीकी और प्रशासनिक अनियमितताओं तथा सरकारी धन के कथित दुरुपयोग के आरोप लगाए गए थे।
18 सितंबर को मंजूरी, उसी दिन दर्ज हुई एफआईआर
याचिका के अनुसार, स्थानीय स्वशासन विभाग के निदेशक-सह-विशेष सचिव ने 18 सितंबर को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत अभियोजन की मंजूरी दी। इसके बाद एसीबी ने उसी दिन एफआईआर संख्या 0268/2026 दर्ज की।
मिर्धा की ओर से दावा किया गया कि एफआईआर रात 11:58 बजे दर्ज हुई और अगले दिन 19 सितंबर को दोपहर 3:30 बजे तक इसकी प्रति एसीबी की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड नहीं की गई थी।
सरकार ने गिरफ्तारी से राहत का किया विरोध
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने अंतरिम राहत का विरोध किया। सरकार ने दलील दी कि याचिका में एफआईआर रद्द करने की स्पष्ट मांग नहीं की गई है और गिरफ्तारी से बचाव के लिए मिर्धा के पास सक्षम आपराधिक अदालत में अग्रिम जमानत लेने का विकल्प उपलब्ध है।
सरकार ने यह भी कहा कि एफआईआर अचानक दर्ज नहीं हुई है। उसके अनुसार, 2015 से 2018 के कार्यकाल से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच विभिन्न स्तरों पर चल रही थी। सरकार के मुताबिक एसीबी के पुलिस महानिरीक्षक ने 24 अगस्त को धारा 17-ए के तहत मंजूरी मांगी थी और उपलब्ध सामग्री पर विचार के बाद 18 सितंबर को मंजूरी दी गई।
हाईकोर्ट ने आठ साल की देरी पर उठाया सवाल
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद परिस्थितियों को ध्यान में रखा। अदालत ने कहा कि एफआईआर में लगाए गए आरोप 2015 से 2018 के चेयरमैन कार्यकाल से जुड़े हैं और शिकायत चार मई 2018 की है।
अदालत ने कहा कि इस स्तर पर रिकॉर्ड से यह संतोषजनक रूप से स्पष्ट नहीं है कि 2018 की शिकायत से संबंधित जांच करीब आठ साल तक लंबित क्यों रही और धारा 17-ए के तहत मंजूरी 18 सितंबर 2026 को ही क्यों दी गई, जबकि मिर्धा हाल ही में वार्ड सदस्य निर्वाचित हुए और चेयरमैन पद के लिए नामांकन भी दाखिल कर चुके थे। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस स्तर पर एफआईआर को चुनाव प्रक्रिया में गैरकानूनी हस्तक्षेप या वैध वैधानिक कार्रवाई मानने के संबंध में कोई अंतिम राय नहीं दी है।
5 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
अदालत ने अंतरिम राहत देते हुए एसीबी को अगली सुनवाई तक तेजपाल मिर्धा की गिरफ्तारी नहीं करने के निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया गया है। अब मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी। फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश से मिर्धा के लिए 21 सितंबर को होने वाले कुचेरा नगर पालिका चेयरमैन चुनाव में हिस्सा लेने का रास्ता साफ हुआ है।
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चुनाव में हिस्सा लेने के लिए मांगी थी राहत
मिर्धा ने एसीबी में मामला दर्ज होने के बाद गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनकी ओर से चेयरमैन चुनाव में मतदान और चुनाव प्रक्रिया में भाग लेने के लिए तत्काल संरक्षण मांगा गया था। मामले की तात्कालिकता को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर रविवार को विशेष सुनवाई तय की गई।
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सुबह सुनवाई, दोपहर में आया आदेश
रविवार सुबह जस्टिस कुलदीप माथुर की विशेष बेंच के समक्ष सुनवाई हुई। मिर्धा की ओर से अधिवक्ता रामावतार चौधरी और सहयोगी अधिवक्ता सुमेर सिंह गौर ने पक्ष रखा। सुनवाई के बाद अदालत ने दोपहर करीब दो बजे आदेश जारी करते हुए एसीबी जयपुर के अधिकारियों को अगली सुनवाई तक मिर्धा को गिरफ्तार नहीं करने के निर्देश दिए।
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मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को होगी। अदालत ने मिर्धा को याचिका में आवश्यक संशोधन करने की स्वतंत्रता भी दी है, जबकि राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया गया है।
21 सितंबर को होना है चेयरमैन का चुनाव
तेजपाल मिर्धा 14 सितंबर को कुचेरा नगर पालिका के वार्ड नंबर 21 से पार्षद निर्वाचित हुए थे। इसके बाद उन्होंने चेयरमैन पद के लिए नामांकन दाखिल किया। 16 सितंबर को नामांकन और 18 सितंबर को नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी हुई। अब चेयरमैन पद के लिए 21 सितंबर को चुनाव होना है।
इसी बीच 18 सितंबर को मिर्धा के खिलाफ एसीबी ने एफआईआर दर्ज कर दी। ऐसे में गिरफ्तारी की स्थिति में चेयरमैन चुनाव में हिस्सा नहीं ले पाने की आशंका थी। इसी आधार पर उन्होंने हाईकोर्ट से तत्काल संरक्षण मांगा।
2018 की शिकायत पर आठ साल बाद एफआईआर
मामला मिर्धा के 2015 से 2018 तक कुचेरा नगर पालिका चेयरमैन रहने के कार्यकाल से जुड़ा है। याचिका के अनुसार, तत्कालीन वार्ड नंबर तीन के पार्षद शैतानराम टाक ने चार मई 2018 को एसीबी में शिकायत दी थी।
शिकायत में विभिन्न कार्यादेश जारी करने में नगर पालिका के अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ कथित मिलीभगत, वित्तीय, तकनीकी और प्रशासनिक अनियमितताओं तथा सरकारी धन के कथित दुरुपयोग के आरोप लगाए गए थे।
18 सितंबर को मंजूरी, उसी दिन दर्ज हुई एफआईआर
याचिका के अनुसार, स्थानीय स्वशासन विभाग के निदेशक-सह-विशेष सचिव ने 18 सितंबर को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत अभियोजन की मंजूरी दी। इसके बाद एसीबी ने उसी दिन एफआईआर संख्या 0268/2026 दर्ज की।
मिर्धा की ओर से दावा किया गया कि एफआईआर रात 11:58 बजे दर्ज हुई और अगले दिन 19 सितंबर को दोपहर 3:30 बजे तक इसकी प्रति एसीबी की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड नहीं की गई थी।
सरकार ने गिरफ्तारी से राहत का किया विरोध
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने अंतरिम राहत का विरोध किया। सरकार ने दलील दी कि याचिका में एफआईआर रद्द करने की स्पष्ट मांग नहीं की गई है और गिरफ्तारी से बचाव के लिए मिर्धा के पास सक्षम आपराधिक अदालत में अग्रिम जमानत लेने का विकल्प उपलब्ध है।
सरकार ने यह भी कहा कि एफआईआर अचानक दर्ज नहीं हुई है। उसके अनुसार, 2015 से 2018 के कार्यकाल से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच विभिन्न स्तरों पर चल रही थी। सरकार के मुताबिक एसीबी के पुलिस महानिरीक्षक ने 24 अगस्त को धारा 17-ए के तहत मंजूरी मांगी थी और उपलब्ध सामग्री पर विचार के बाद 18 सितंबर को मंजूरी दी गई।
हाईकोर्ट ने आठ साल की देरी पर उठाया सवाल
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद परिस्थितियों को ध्यान में रखा। अदालत ने कहा कि एफआईआर में लगाए गए आरोप 2015 से 2018 के चेयरमैन कार्यकाल से जुड़े हैं और शिकायत चार मई 2018 की है।
अदालत ने कहा कि इस स्तर पर रिकॉर्ड से यह संतोषजनक रूप से स्पष्ट नहीं है कि 2018 की शिकायत से संबंधित जांच करीब आठ साल तक लंबित क्यों रही और धारा 17-ए के तहत मंजूरी 18 सितंबर 2026 को ही क्यों दी गई, जबकि मिर्धा हाल ही में वार्ड सदस्य निर्वाचित हुए और चेयरमैन पद के लिए नामांकन भी दाखिल कर चुके थे। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस स्तर पर एफआईआर को चुनाव प्रक्रिया में गैरकानूनी हस्तक्षेप या वैध वैधानिक कार्रवाई मानने के संबंध में कोई अंतिम राय नहीं दी है।
5 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
अदालत ने अंतरिम राहत देते हुए एसीबी को अगली सुनवाई तक तेजपाल मिर्धा की गिरफ्तारी नहीं करने के निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया गया है। अब मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी। फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश से मिर्धा के लिए 21 सितंबर को होने वाले कुचेरा नगर पालिका चेयरमैन चुनाव में हिस्सा लेने का रास्ता साफ हुआ है।