कोटा नगर निगम परिणाम: आज आएंगे नतीजे, किसका बनेगा बोर्ड, 67.66% मतदान ने बढ़ाई सियासी धड़कनें
कोटा नगर निगम के 100 वार्डों के चुनाव में 67.66 प्रतिशत मतदान हुआ है। कुल 8 लाख 26 हजार 923 मतदाताओं में से 5 लाख 59 हजार 485 ने मतदान किया। अब चुनाव परिणाम पर सभी की नजरें टिकी हैं। मतदान प्रतिशत बढ़ने से भाजपा और कांग्रेस समेत प्रमुख दलों में मुकाबले को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है।
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कोटा नगर निगम चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो चुका है। 100 वार्डों के लिए हुए मतदान का परिणाम आज सामने आएगा। इस बार कोटा में 67.66 प्रतिशत मतदान हुआ है, जो पिछले नगर निकाय चुनाव के लगभग बराबर है। मतदान प्रतिशत को लेकर प्रमुख राजनीतिक दलों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं। अब सभी की नजरें चुनाव परिणाम पर टिकी हैं। साथ ही, निर्दलीय प्रत्याशियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कोटा में वर्ष 2014 के नगर निकाय चुनाव में सबसे अधिक करीब 67 प्रतिशत मतदान हुआ था। इसके बाद हुए चुनावों में मतदान प्रतिशत कम रहा। इस बार मतदान प्रतिशत में बढ़ोतरी के बाद प्रमुख दलों के बीच मुकाबला रोचक माना जा रहा है। परिणाम आने के बाद राजनीतिक दल निर्दलीय प्रत्याशियों को साधने में भी पूरा दमखम लगा सकते हैं।
कितने लोगों ने किया मतदान
इस बार नगर निगम के 100 वार्डों के लिए हुए चुनाव में कुल 8 लाख 26 हजार 923 मतदाता थे। इनमें से 5 लाख 59 हजार 485 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। सुबह के मुकाबले दिन में मतदान केंद्रों पर भीड़ कम रही, लेकिन शाम होते-होते मतदान केंद्रों पर अचानक भीड़ बढ़ गई। शाम 6 बजे सभी मतदान केंद्रों के गेट बंद कर दिए गए। इसके बाद केंद्र के अंदर मौजूद मतदाताओं को मतदान कराया गया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर, कोटा उत्तर विधायक शांति धारीवाल, लाडपुरा विधायक कल्पना देवी और कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा ने भी अपने-अपने क्षेत्रों के मतदान केंद्रों पर पहुंचकर मतदान किया।
किस वार्ड में सबसे ज्यादा और कम मतदाता
कोटा शहर के वार्डों की बात करें तो वार्ड नंबर 34 में सबसे ज्यादा 23 हजार 779 मतदाता हैं, जबकि वार्ड नंबर 1 में सबसे कम 3 हजार 858 मतदाता हैं। चुनाव में वार्ड स्तर के मुद्दों की बात करें तो सड़कों की बदहाली सबसे बड़ा मुद्दा बनकर सामने आई। कई वार्डों में गहरे गड्ढे और खुदी हुई सड़कों से लोग परेशान हैं। इसके अलावा चंबल नदी किनारे बसे कोटा शहर के कई वार्डों में आज भी पेयजल की समस्या बनी हुई है।
बिजली से जुड़ी समस्याएं भी चुनाव में मुद्दा रहीं। निजी विद्युत कंपनी केईडीएल की कार्यप्रणाली को लेकर शहरवासियों में नाराजगी दिखाई दी। कई प्रत्याशियों ने चुनाव जीतने के बाद निजी विद्युत कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और कोटा से कंपनी को हटाने तक का वादा किया है। अब आज आने वाले परिणाम से तय होगा कि जनता ने इन मुद्दों पर किसके पक्ष में अपना फैसला सुनाया है।