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राजस्थान: कोटा में सीजेरियन डिलीवरी के बाद एक और प्रसूता की मौत, नौ दिन में तीन महिलाओं ने तोड़ा दम
Sun, 25 Oct 2026 08:21 PM IST
कोटा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा
Published by: कोटा ब्यूरो
Updated Sun, 25 Oct 2026 08:21 PM IST
सार
राजस्थान के कोटा स्थित जेके लोन अस्पताल में सीजेरियन डिलीवरी के बाद बारां निवासी शबनम बानो की मौत हो गई। परिजनों ने इलाज में लापरवाही के आरोप लगाए हैं, जबकि अस्पताल अधीक्षक डॉ. निर्मला शर्मा ने आरोपों को खारिज किया है। अक्टूबर में पिछले नौ दिनों के दौरान सीजेरियन डिलीवरी के बाद तीन प्रसूताओं की मौत का मामला सामने आया है।
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जेके लोन अस्पताल में एक और प्रसूता की हुई मौत
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजस्थान के कोटा जिले में सीजेरियन डिलीवरी के बाद प्रसूताओं की मौत के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। अब बारां जिले के छबड़ा निवासी शबनम बानो ने जेके लोन अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। 23 अक्टूबर को उनका ऑपरेशन हुआ था। बताया गया कि डिलीवरी के बाद उनका ब्लड प्रेशर अचानक कम हो गया और देर रात इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। परिजनों ने चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाया है, जबकि अस्पताल प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज किया है। अक्टूबर में नौ दिनों के भीतर यह तीसरी प्रसूता की मौत बताई जा रही है।
जेके लोन अस्पताल में इलाज के दौरान मौत, अधीक्षक ने क्या कहा?
जेके लोन अस्पताल की अधीक्षक डॉ. निर्मला शर्मा के अनुसार, शबनम को परिजन गंभीर हालत में अस्पताल लेकर पहुंचे थे। उनका कहना है कि उपचार शुरू किए जाने के समय महिला कोमा में थी और बच्चे की धड़कन भी अनियमित थी। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, महिला की गंभीर स्थिति के बारे में परिजनों को पहले ही जानकारी दे दी गई थी। इसके बाद ऑपरेशन किया गया। बच्चे को बचा लिया गया, लेकिन महिला की जान नहीं बचाई जा सकी।
डॉ. निर्मला शर्मा ने परिजनों की ओर से लगाए गए लापरवाही के आरोपों को सही नहीं बताया। उनका कहना है कि शबनम को बारां जिला अस्पताल में ही दौरे पड़ने लगे थे। ऑपरेशन के लिए उन्हें वहां दो दिन भर्ती रखा गया था, लेकिन ऑपरेशन नहीं हो पाने के बाद परिजन उन्हें कोटा लेकर आए।
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'12 घंटे बाद भी नहीं हुआ ऑपरेशन'
मृतका शबनम के भाई सरफराज ने बताया कि 22 अक्टूबर को उनकी बहन को बारां जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अगले दिन यानी 23 अक्टूबर को उसका ऑपरेशन होना था। सरफराज के अनुसार, करीब 12 घंटे बीतने के बावजूद ऑपरेशन नहीं किया गया। इस दौरान शबनम को कमजोरी महसूस होने लगी।
परिजनों का कहना है कि उन्होंने चिकित्सकों को शबनम की बिगड़ती हालत के बारे में बताया, जिसके बाद उसे ड्रिप चढ़ाई गई। कुछ देर बाद उसे दौरे पड़ने लगे। स्थिति बिगड़ने पर बारां जिला अस्पताल से उसे कोटा के जेके लोन अस्पताल रेफर कर दिया गया।
सरफराज के मुताबिक, कोटा में शबनम ने बच्ची को जन्म दिया, लेकिन इसके बाद उसकी हालत और बिगड़ गई। उसका ब्लड प्रेशर कम हो गया और उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजनों के आरोपों और अस्पताल प्रशासन के पक्ष में अंतर है। मामले में मौत के कारणों तथा इलाज के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया को लेकर जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।
मई में भी सीजेरियन के बाद पांच प्रसूताओं की हुई थी मौत
प्रसूताओं की मौत का यह पहला मामला नहीं है। खबर में उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसी साल मई में सीजेरियन डिलीवरी के बाद पांच महिलाओं की मौत हुई थी। उस दौरान 12 प्रसूताओं की किडनी फेल होने की बात सामने आई थी। इनमें पायल, ज्योति, पिंकी, प्रिया और शिरीन की मौत हो गई थी, जबकि रागिनी, धन्नी, सुशीला, चंद्रकला, किरण, पिंकी और आरती को उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई थी।
नौ दिनों में तीन मौतों ने खड़े किए सवाल
अक्टूबर में पिछले नौ दिनों के दौरान रेशमा, रोशन बैरवा और अब शबनम बानो की मौत के मामले सामने आए हैं। लगातार हो रही इन मौतों ने प्रसूताओं के उपचार, गंभीर मरीजों को समय पर रेफर करने और ऑपरेशन से पहले उनकी स्थिति के आकलन जैसे मुद्दों पर सवाल खड़े किए हैं।
फिलहाल शबनम के मामले में परिजनों के आरोप और अस्पताल प्रशासन का पक्ष सामने आया है। मौत के कारणों और इलाज में किसी तरह की लापरवाही हुई या नहीं, इसका निष्कर्ष संबंधित चिकित्सकीय जांच और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
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जेके लोन अस्पताल में इलाज के दौरान मौत, अधीक्षक ने क्या कहा?
जेके लोन अस्पताल की अधीक्षक डॉ. निर्मला शर्मा के अनुसार, शबनम को परिजन गंभीर हालत में अस्पताल लेकर पहुंचे थे। उनका कहना है कि उपचार शुरू किए जाने के समय महिला कोमा में थी और बच्चे की धड़कन भी अनियमित थी। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, महिला की गंभीर स्थिति के बारे में परिजनों को पहले ही जानकारी दे दी गई थी। इसके बाद ऑपरेशन किया गया। बच्चे को बचा लिया गया, लेकिन महिला की जान नहीं बचाई जा सकी।
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डॉ. निर्मला शर्मा ने परिजनों की ओर से लगाए गए लापरवाही के आरोपों को सही नहीं बताया। उनका कहना है कि शबनम को बारां जिला अस्पताल में ही दौरे पड़ने लगे थे। ऑपरेशन के लिए उन्हें वहां दो दिन भर्ती रखा गया था, लेकिन ऑपरेशन नहीं हो पाने के बाद परिजन उन्हें कोटा लेकर आए।
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'12 घंटे बाद भी नहीं हुआ ऑपरेशन'
मृतका शबनम के भाई सरफराज ने बताया कि 22 अक्टूबर को उनकी बहन को बारां जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अगले दिन यानी 23 अक्टूबर को उसका ऑपरेशन होना था। सरफराज के अनुसार, करीब 12 घंटे बीतने के बावजूद ऑपरेशन नहीं किया गया। इस दौरान शबनम को कमजोरी महसूस होने लगी।
परिजनों का कहना है कि उन्होंने चिकित्सकों को शबनम की बिगड़ती हालत के बारे में बताया, जिसके बाद उसे ड्रिप चढ़ाई गई। कुछ देर बाद उसे दौरे पड़ने लगे। स्थिति बिगड़ने पर बारां जिला अस्पताल से उसे कोटा के जेके लोन अस्पताल रेफर कर दिया गया।
सरफराज के मुताबिक, कोटा में शबनम ने बच्ची को जन्म दिया, लेकिन इसके बाद उसकी हालत और बिगड़ गई। उसका ब्लड प्रेशर कम हो गया और उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजनों के आरोपों और अस्पताल प्रशासन के पक्ष में अंतर है। मामले में मौत के कारणों तथा इलाज के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया को लेकर जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।
मई में भी सीजेरियन के बाद पांच प्रसूताओं की हुई थी मौत
प्रसूताओं की मौत का यह पहला मामला नहीं है। खबर में उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसी साल मई में सीजेरियन डिलीवरी के बाद पांच महिलाओं की मौत हुई थी। उस दौरान 12 प्रसूताओं की किडनी फेल होने की बात सामने आई थी। इनमें पायल, ज्योति, पिंकी, प्रिया और शिरीन की मौत हो गई थी, जबकि रागिनी, धन्नी, सुशीला, चंद्रकला, किरण, पिंकी और आरती को उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई थी।
नौ दिनों में तीन मौतों ने खड़े किए सवाल
अक्टूबर में पिछले नौ दिनों के दौरान रेशमा, रोशन बैरवा और अब शबनम बानो की मौत के मामले सामने आए हैं। लगातार हो रही इन मौतों ने प्रसूताओं के उपचार, गंभीर मरीजों को समय पर रेफर करने और ऑपरेशन से पहले उनकी स्थिति के आकलन जैसे मुद्दों पर सवाल खड़े किए हैं।
फिलहाल शबनम के मामले में परिजनों के आरोप और अस्पताल प्रशासन का पक्ष सामने आया है। मौत के कारणों और इलाज में किसी तरह की लापरवाही हुई या नहीं, इसका निष्कर्ष संबंधित चिकित्सकीय जांच और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर ही निकाला जा सकता है।