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कोटा: सबसे बुजुर्ग बाघिन महक की तबीयत बिगड़ी, पार्क के डिस्प्ले एरिया से हटाई गई
Thu, 22 Oct 2026 07:39 PM IST
प्रतीक कुमार पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा
Published by: प्रतीक कुमार पाण्डेय
Updated Thu, 22 Oct 2026 07:39 PM IST
सार
कोटा के अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में रह रही देश की सबसे बुजुर्ग बाघिन महक की उम्र 23 साल और दो महीने हो गई है। बढ़ती उम्र के कारण उसके पिछले पैरों में कमजोरी और चलने में परेशानी हो रही है। एहतियात के तौर पर उसे डिस्प्ले एरिया से हटाकर नाइट शेल्टर में रखा गया है।
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बाघिन महक
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
देश की सबसे बुजुर्ग बाघिन महक को सेहत संबंधी समस्याओं के कारण कोटा स्थित अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क के डिस्प्ले एरिया से हटा दिया गया है। महक की उम्र 23 वर्ष व दो महीने हो चुकी है। ढलती उम्र के चलते उसकी तबीयत लगातार बिगड़ रही है और चलने में भी तकलीफ है। सहायक वन संरक्षक पंकज कुमार मीणा ने बताया कि मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) कोटा टी मोहनराज ने तीन सदस्यीय समिति बनाई है, जिसके आधार पर बाघिन की निरंतर निगरानी की जा रही है।
शारीरिक कमजोरी और नाइट शेल्टर
सहायक वन संरक्षक पंकज मीणा ने बताया कि समिति के निर्देशों के तहत ही महक को केवल नाइट शेल्टर में रखा गया है। उन्होंने जानकारी दी कि बाघिन के शरीर के आगे के हिस्से और चेहरे में कोई दिक्कत नहीं है। हालांकि, उसके पीछे के पैरों की तरफ समस्या उत्पन्न हो गई है। यदि वह चलते समय किसी पत्थर से टकराकर गिर जाए, तो उसे दोबारा उठने में भी समस्या होने लगती है। इसी कारण उसे केवल नाइट शेल्टर में ही रखा जा रहा है।
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स्वास्थ्य निगरानी और खुराक प्रबंधन
बाघिन के उपचार और निगरानी में जुटे वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. अखिलेश पांडे का कहना है कि बाघिन की वृद्धावस्था से जुड़ी परेशानियों से जूझ रही है। उसके शरीर के पिछले हिस्से में ज्यादा परेशानियां हैं और यह कमजोरी अत्यधिक उम्र के कारण है। डॉ. पांडे ने बताया कि इस उम्र में बाघिन को जितना भोजन लेना चाहिए, वह उतना ही आहार ग्रहण कर रही है। उसकी खुराक दिनभर में तीन समय मिलाकर चार किलोग्राम तय की गई है। इसके साथ ही उसकी हृदय गति, श्वसन तंत्र तथा अन्य स्वास्थ्य मानकों की प्रतिदिन निगरानी की जा रही है।
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शारीरिक कमजोरी और नाइट शेल्टर
सहायक वन संरक्षक पंकज मीणा ने बताया कि समिति के निर्देशों के तहत ही महक को केवल नाइट शेल्टर में रखा गया है। उन्होंने जानकारी दी कि बाघिन के शरीर के आगे के हिस्से और चेहरे में कोई दिक्कत नहीं है। हालांकि, उसके पीछे के पैरों की तरफ समस्या उत्पन्न हो गई है। यदि वह चलते समय किसी पत्थर से टकराकर गिर जाए, तो उसे दोबारा उठने में भी समस्या होने लगती है। इसी कारण उसे केवल नाइट शेल्टर में ही रखा जा रहा है।
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स्वास्थ्य निगरानी और खुराक प्रबंधन
बाघिन के उपचार और निगरानी में जुटे वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. अखिलेश पांडे का कहना है कि बाघिन की वृद्धावस्था से जुड़ी परेशानियों से जूझ रही है। उसके शरीर के पिछले हिस्से में ज्यादा परेशानियां हैं और यह कमजोरी अत्यधिक उम्र के कारण है। डॉ. पांडे ने बताया कि इस उम्र में बाघिन को जितना भोजन लेना चाहिए, वह उतना ही आहार ग्रहण कर रही है। उसकी खुराक दिनभर में तीन समय मिलाकर चार किलोग्राम तय की गई है। इसके साथ ही उसकी हृदय गति, श्वसन तंत्र तथा अन्य स्वास्थ्य मानकों की प्रतिदिन निगरानी की जा रही है।