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कोटा: हाड़ौती के जंगलों में महाराष्ट्र से लाई जाएंगी दो बाघिनें, दोनों टाइगर रिजर्व में अभी 15 बाघ-बाघिन
Thu, 22 Oct 2026 07:13 PM IST
प्रतीक पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा
Published by: प्रतीक पांडेय
Updated Thu, 22 Oct 2026 07:13 PM IST
सार
राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र में बाघों की संख्या और आनुवंशिक विविधता बढ़ाने के लिए वन विभाग ने दूसरे चरण की तैयारी शुरू कर दी है। महाराष्ट्र के ताड़ोबा-अंधारी और पेंच टाइगर रिजर्व से एक-एक बाघिन लाई जाएगी। इसके साथ ही रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में शिकार प्रजातियों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए दिल्ली के डियर पार्क से 400 चीतल लाने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हाड़ौती के जंगलों में बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए वन विभाग ने दूसरे चरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत महाराष्ट्र के ताड़ोबा-अंधारी और पेंच टाइगर रिजर्व से एक-एक बाघिन को राजस्थान लाया जाएगा। वन विभाग इन दोनों बाघिनों को मुकुंदरा हिल्स और रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में बसाने की तैयारी कर रहा है। दोनों राज्यों के उच्च अधिकारियों की स्वीकृति मिलते ही बाघिनों को चिह्नित करके स्थानांतरण की प्रक्रिया आरंभ की जाएगी। वन विभाग को उम्मीद है कि दिवाली के बाद दोनों बाघिनें हाड़ौती के जंगलों में पहुंच सकती हैं। वर्तमान में दोनों टाइगर रिजर्व में कुल मिलाकर 15 बाघ-बाघिन मौजूद हैं।
अंतरराज्यीय स्थानांतरण का खाका
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की स्वीकृति के बाद हाड़ौती क्षेत्र के दोनों टाइगर रिजर्व में अन्य राज्यों से कुल पांच बाघिनें लाने की योजना है। इस योजना के प्रथम चरण में मध्य प्रदेश के पेंच और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से दो बाघिनें लाई जा चुकी हैं, जो अब स्थानीय वातावरण में ढलकर अपनी क्षेत्रीय सीमा बना चुकी हैं। दूसरे चरण में अब महाराष्ट्र के ताड़ोबा-अंधारी और पेंच टाइगर रिजर्व से दो बाघिनें लाने की तैयारी है। इसके बाद अंतिम चरण में मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व से एक और बाघिन को रामगढ़ विषधारी में स्थानांतरित किया जाएगा।
सुरक्षा और निगरानी के उपाय
बाघिनों को सुरक्षित रूप से बसाने के लिए दोनों टाइगर रिजर्व में सॉफ्ट रिलीज एनक्लोजर तैयार किए गए हैं। जंगल में उनकी गतिविधियों, क्षेत्र विस्तार और अनुकूलन पर निरंतर नजर रखने के लिए उनके गले में रेडियो कॉलर लगाए जाएंगे। स्थानांतरण के तुरंत बाद बाघिनों को कुछ समय के लिए सॉफ्ट एनक्लोजर में रखा जाएगा और परिस्थितियां अनुकूल होने पर ही उन्हें खुले जंगल में छोड़ा जाएगा। पिछले चरण में मध्य प्रदेश से अधिक दूरी होने के कारण बाघिनों को हेलीकॉप्टर से लाया गया था। इस बार भी स्थानांतरण की पूरी प्रक्रिया निर्धारित प्रोटोकॉल और अधिकारियों की स्वीकृति के अनुसार संपन्न की जाएगी।
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आनुवंशिक विविधता और शिकार की व्यवस्था
अंतरराज्यीय स्थानांतरण का मकसद केवल बाघों की संख्या में वृद्धि करना नहीं, बल्कि उनकी आनुवंशिक विविधता को भी सुदृढ़ बनाना है। अलग-अलग क्षेत्रों से बाघिनों के आने से भविष्य में प्रजनन के माध्यम से नया जीन प्रवाह बढ़ेगा, जिससे राजस्थान के बाघों की नई पीढ़ी को मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही दोनों टाइगर रिजर्व में शिकार प्रजातियों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए दिल्ली के डियर पार्क से 400 चित्तीदार हिरण (चीतल) लाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर सुगनाराम जाट ने बताया कि अधिकारियों की मंजूरी मिलते ही बाघिनों को चिह्नित कर स्थानांतरित कर दिया जाएगा।
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अंतरराज्यीय स्थानांतरण का खाका
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की स्वीकृति के बाद हाड़ौती क्षेत्र के दोनों टाइगर रिजर्व में अन्य राज्यों से कुल पांच बाघिनें लाने की योजना है। इस योजना के प्रथम चरण में मध्य प्रदेश के पेंच और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से दो बाघिनें लाई जा चुकी हैं, जो अब स्थानीय वातावरण में ढलकर अपनी क्षेत्रीय सीमा बना चुकी हैं। दूसरे चरण में अब महाराष्ट्र के ताड़ोबा-अंधारी और पेंच टाइगर रिजर्व से दो बाघिनें लाने की तैयारी है। इसके बाद अंतिम चरण में मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व से एक और बाघिन को रामगढ़ विषधारी में स्थानांतरित किया जाएगा।
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सुरक्षा और निगरानी के उपाय
बाघिनों को सुरक्षित रूप से बसाने के लिए दोनों टाइगर रिजर्व में सॉफ्ट रिलीज एनक्लोजर तैयार किए गए हैं। जंगल में उनकी गतिविधियों, क्षेत्र विस्तार और अनुकूलन पर निरंतर नजर रखने के लिए उनके गले में रेडियो कॉलर लगाए जाएंगे। स्थानांतरण के तुरंत बाद बाघिनों को कुछ समय के लिए सॉफ्ट एनक्लोजर में रखा जाएगा और परिस्थितियां अनुकूल होने पर ही उन्हें खुले जंगल में छोड़ा जाएगा। पिछले चरण में मध्य प्रदेश से अधिक दूरी होने के कारण बाघिनों को हेलीकॉप्टर से लाया गया था। इस बार भी स्थानांतरण की पूरी प्रक्रिया निर्धारित प्रोटोकॉल और अधिकारियों की स्वीकृति के अनुसार संपन्न की जाएगी।
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आनुवंशिक विविधता और शिकार की व्यवस्था
अंतरराज्यीय स्थानांतरण का मकसद केवल बाघों की संख्या में वृद्धि करना नहीं, बल्कि उनकी आनुवंशिक विविधता को भी सुदृढ़ बनाना है। अलग-अलग क्षेत्रों से बाघिनों के आने से भविष्य में प्रजनन के माध्यम से नया जीन प्रवाह बढ़ेगा, जिससे राजस्थान के बाघों की नई पीढ़ी को मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही दोनों टाइगर रिजर्व में शिकार प्रजातियों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए दिल्ली के डियर पार्क से 400 चित्तीदार हिरण (चीतल) लाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर सुगनाराम जाट ने बताया कि अधिकारियों की मंजूरी मिलते ही बाघिनों को चिह्नित कर स्थानांतरित कर दिया जाएगा।