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Kekri News: असाध्य रोगों के लिए दस दिवसीय आयुर्वेद शल्य चिकित्सा शिविर शुरू, जिला कलेक्टर ने किया उद्घाटन

Tue, 17 Dec 2024 07:55 PM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, केकड़ी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, केकड़ी Published by: अर्पित याज्ञनिक Updated Tue, 17 Dec 2024 07:55 PM IST
सार

केकड़ी में आयुर्वेद विभाग और जिला रेडक्रॉस सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में दस दिवसीय निशुल्क आयुर्वेद शल्य चिकित्सा शिविर शुरू हुआ। शिविर में असाध्य और जटिल रोगों जैसे पाइल्स, फिस्टुला, फिशर आदि का क्षार सूत्र और अग्निकर्म चिकित्सा पद्धतियों से इलाज किया जाएगा।

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Kekri News: Ten-day Ayurveda surgical camp started for incurable diseases
आयुर्वेद शल्य चिकित्सा शिविर का उद्घाटन करने पहुंची जिला कलेक्टर श्वेता चौहान। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केकड़ी में दस दिवसीय विशाल निशुल्क आयुर्वेद शल्य चिकित्सा शिविर मंगलवार को समारोह पूर्वक शुरू हुआ। शिविर में असाध्य और जटिल रोगों का आयुर्वेद की प्राचीन और अनोखी क्षार सूत्र चिकित्सा पद्धति से इलाज कराने के लिए मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ी। शिविर के पहले दिन 203 मरीज आये, जिनमें से 35 मरीजों का शल्य चिकित्सा के लिए पंजीकरण किया गया। सरकार की पहली वर्षगांठ के उपलक्ष्य में क्षेत्रीय विधायक शत्रुघ्न गौतम की अनुशंशा पर केकड़ी में आयुर्वेद विभाग और जिला रेडक्रॉस सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दस दिवसीय विशाल निशुल्क आयुर्वेद शल्य चिकित्सा शिविर मंगलवार को दोपहर समारोहपूर्वक शुरू हुआ। 

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समारोह की मुख्य अतिथि जिला कलेक्टर श्वेता चौहान थी, जबकि आयुर्वेद विभाग के अतिरिक्त निदेशक संभाग डॉ शिवसिंह, केकड़ी जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज आहूजा व विभाग के उप निदेशक डॉ हनुमान मीणा विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। केकड़ी में अजमेरी गेट के समीप कटारिया विश्रामशाला स्थित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय के प्रांगण में आयोजित इस शिविर का शुभारम्भ अतिथियों द्वारा भगवान धन्वंतरि के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।
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इस अवसर पर जिला कलेक्टर श्वेता चौहान ने कहा कि आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति हमारे देश की प्राचीन चिकित्सा पद्धति है, जो उपचार की निरापद विधा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे एलोपैथी का रुझान छोड़कर आयुर्वेद को अपनाएं। यह पद्धति असाध्य और जटिल रोगों का भी पूर्ण उपचार करने में कारगर है। उन्होंने कहा कि इस शिविर का क्षेत्र में व्यापक प्रचार प्रसार किया जाना चाहिए, ताकि क्षेत्र के अधिक से अधिक मरीज इससे लाभान्वित हो सकें। उन्होंने अच्छे और उपयोगी आयोजन के लिए आयुर्वेद विभाग और रेडक्रॉस सोसायटी की सराहना की।
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शिविर में तैनात चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम।

समारोह को संबोधित करते हुए आयुर्वेद विभाग के उप निदेशक हनुमान मीणा ने कहा कि यह शिविर अत्यंत उपयोगी है, जिसमें पाइल्स, फिस्टुला और फिशर जैसी कई जटिल और असाध्य बीमारियों के पूर्ण उपचार का लाभ उठाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह पद्धति ऋषि मुनियों द्वारा प्रणीत है, जिससे रोग का स्थाई रूप से इलाज होता है। एक रिसर्च के मुताबिक इस पद्धति से उपचार के बाद उस रोग के वापस पैदा होने का चांस मात्र तीन प्रतिशत माना गया है। उन्होंने शिविर में उपचार के लिए प्रयोग की जाने वाली विभिन्न विधियों का उल्लेख किया और बताया कि इस क्षेत्र के विशेषज्ञ चिकित्सक मरीजों का इलाज करने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों से यहां आए हैं। इस अवसर पर उन्होंने क्षेत्र के कुछ आयुर्वेद चिकित्सालयों के भवनों की दुर्दशा पर जिला कलेक्टर का ध्यान आकृष्ट करते हुए अनुरोध किया कि यदि पंचायत के किसी मद से उनकी मरम्मत करा दी जाए, तो क्षेत्र में आयुर्वेद के विस्तार और लोगों को लाभ पहुंचाने में महत्वपूर्ण सफलता मिल सकेगी।

समारोह में आयुर्वेद विभाग के अतिरिक्त निदेशक संभाग डॉ. शिव सिंह और केकड़ी जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज आहूजा ने भी संबोधित किया और शिविर के व्यापक प्रचार प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया। प्रारम्भ में रेडक्रॉस सोसायटी के पदाधिकारियों व सदस्यों द्वारा अतिथियों का तिलक व दुपट्टा ओढ़ाकर स्वागत किया गया। समारोह का संचालन शिविर संयोजक आनंद सोमाणी ने किया।

विभाग की ओर से शिविर के प्रभारी बनाये गए डॉ धर्मचंद नापित ने बताया कि शिविर में आयुर्वेद की अनोखी अग्निकर्म व क्षार सूत्र विधि से पाइल्स, फिस्टुला, फिशर जैसी जटिल व असाध्य प्रकृति की बीमारियों सहित सभी प्रकार के पुराने दर्द, सीआरटी का दर्द व पैरों की कीलें आदि गम्भीर शारीरिक समस्याओं का निशुल्क इलाज किया जाएगा। इनके अलावा शिविर में उदर, शिरो, यकृत, स्त्रीरोग, गठिया, बाय, शूल संधि, हृदयरोग आदि कई बीमारियों का भी उपचार होगा। उपचार की प्रक्रिया में कपलिंग क्रिया एवं पंचकर्म चिकित्सा का प्रयोग भी किया जाएगा। 


शिविर के सह प्रभारी कमलेश कुम्हार ने बताया कि इस शल्य चिकित्सा शिविर में क्षार सूत्र पद्धति से पाइल्स, फिस्टुला व फिशर से पीड़ित मरीजों के ऑपरेशन किये जायेंगे। शिविर में क्षार सूत्र चिकित्सा पद्धति के विशेषज्ञ डॉक्टर विनीत जैन, डॉक्टर श्याम सुंदर स्वर्णकार, डॉक्टर सुनील कनोडिया, डॉक्टर जगदीश सिंह राजावत, डॉक्टर सुनील कुमार, डॉक्टर रंजना जैन, वात रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अंजु कटारे, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर ललिता कुमारी, पंचकर्म विशेषज्ञ डॉक्टर रिचा परमार एवं जनरल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉक्टर विकास गजराज व डॉक्टर विजय कुमारी शर्मा के साथ आयुर्वेद विभाग की टीम द्वारा जटिल बीमारियों से पीड़ित मरीजों का उपचार किया जाएगा।

शिविर संयोजक महेंद्र प्रधान व अमित गर्ग ने बताया कि शिविर में पहले दिन 203 रोगी आए, जिनमें से 35 रोगियों का शल्य चिकित्सा के लिए पंजीकरण किया गया। शिविर में 19 दिसम्बर तक सुबह 11 से दोपहर 4 बजे तक रोगियों की जांच की जाएगी। इनमें से शल्य चिकित्सा की आवश्यकता वाले मरीजों को भर्ती कर उनके ऑपरेशन किए जाएंगे। यह शिविर 26 दिसंबर तक चलेगा। उन्होंने बताया कि चिकित्सा शिविर में सभी रोगियों की शल्य चिकित्सा व उन्हें दवाइयां, भोजन व आवास की सुविधा निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी।

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