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राजस्थान: हाईकोर्ट के निवर्तमान चीफ जस्टिस ने कहा- कॉलेजियम से वकीलों की छंटनी चिंता का विषय

Sun, 06 Mar 2022 06:33 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी जोधपुर।
एजेंसी जोधपुर। Published by: Jeet Kumar Updated Sun, 06 Mar 2022 06:33 AM IST
सार

 चीफ जस्टिस कुरैशी ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा हाईकोर्ट कॉलेजियम के प्रस्तावित नामों को स्वीकार करने से इनकार करने पर भी चिंता व्यक्त की।

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Outgoing Chief Justice of High Court AA Qureshi said Layoff of lawyers from collegium is a matter of concern
सांकेतिक तस्वीर.... - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

राजस्थान हाईकोर्ट के निवर्तमान चीफ जस्टिस एए कुरैशी ने कहा, सरकार की उनके प्रति नकारात्मक धारणा, उनके न्यायिक स्वतंत्रता का प्रमाण है। उन्होंने कहा, हाल ही में भारत के एक पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने अपनी आत्मकथा लिखी है।

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मैंने इसे नहीं पढ़ा है, लेकिन मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने कुछ खुलासे किए हैं। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से त्रिपुरा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रूप में मेरी नियुक्ति की सिफारिश बदलने के संबंध में यह कहा गया है कि न्यायिक राय के आधार पर सरकार की मेरे बारे में कुछ नकारात्मक धारणाएं थीं। सांविधानिक न्यायालय का प्राथमिक कर्तव्य नागरिकों के मौलिक और मानवाधिकारों की रक्षा करना है, उसके न्यायाधीश के रूप में, मैं इसे स्वतंत्रता का प्रमाणपत्र मानता हूं।
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 चीफ जस्टिस कुरैशी ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा हाईकोर्ट कॉलेजियम के प्रस्तावित नामों को स्वीकार करने से इनकार करने पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, हाईकोर्ट द्वारा अधिवक्ताओं की सिफारिश करना और सुप्रीम कोर्ट द्वारा भारी छंटनी आश्चर्यजनक है।
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हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के बीच धारणा में अंतर का कारण जो भी हो, इससे अच्छे अधिवक्ताओं को पीठ में शामिल होने के लिए राजी करना मुश्किल होगा। जस्टिस कुरैशी ने राजस्थान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के तौर पर अपने कार्यकाल और जजों की कमी के कारण पड़ने वाले प्रभाव का जिक्र किया।


उन्होंने कहा, जब मैंने पद संभाला तब केवल 36 जज थे। इस दौरान काम का दबाव काफी बढ़ गया। उन्होंने कहा, उन्हें अपने किसी भी फैसले पर कोई पछतावा नहीं है। उन्होंने कहा, क्या मुझे कोई पछतावा है? कोई नहीं। मेरा हर निर्णय मेरी कानूनी समझ पर आधारित था। मैं गलत रहा हूं, कई मौकों पर गलत साबित हुआ लेकिन कभी भी मैंने अपने कानूनी विश्वास से अलग कोई निर्णय नहीं किया।

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