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राजस्थान: बच्चों की मौत का सिलसिला जारी, कोटा में 110, बीकानेर में 162 तो जोधपुर में 146 ने तोड़ा दम
Sun, 05 Jan 2020 12:24 PM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर
Published by: Sneha Baluni
Updated Sun, 05 Jan 2020 12:24 PM IST
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राजस्थान में अब तक 350 से ज्यादा बच्चे जिंदगी की जंग हार चुके हैं
- फोटो : PTI
राजस्थान के कोटा के जेके लोन अस्पताल के साथ जोधपुर और बीकानेर में भी बच्चों की मौत का सिलसिला जारी है। बेहतर इलाज और सुविधाओं के अभाव में जोधपुर के डॉ. संपूर्णानंद मेडिकल कॉलेज में महीनेभर में 102 नवजात समेत 146 बच्चों की मौत हो चुकी है। वहीं कोटा में 110, बीकानेर में 162 और बूंदी में 10 मासूम जिंदगी की जंग हार चुके हैं। जोधपुर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का गृह जिला है। मेडिकल कॉलेज के अधिकारी इन मौतों को सामान्य बता रहे हैं, वहीं मुख्यमंत्री गहलोत जोधपुर में बच्चों की मौत के सवाल को अनसुना कर गए।
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कोटा में बच्चों की मौत का आंकड़ा बढ़कर 110 हुआ
कोटा के जेके लोन अस्पताल में शनिवार रात तक चार और नवजातों ने दम तोड़ दिया। यहां 36 दिन में 110 बच्चों की मौत हो चुकी है।
सीएम गहलोत के गृहनगर जोधपुर में 146 मासूमों की मौत
जोधपुर के अस्पताल की रिपोर्ट के अनुसार अकेले दिसंबर, 2019 में 146 बच्चों की मौत रिकॉर्ड हुई है। राजस्थान के जोधपुर संभाग के सबसे बड़े अस्पतालों में से एक एसएन मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग ने पिछले महीने हर दिन लगभग पांच बच्चों की मौत दर्ज की गई। कोटा में शिशुओं की मौत के बाद मेडिकल कॉलेज द्वारा तैयार रिपोर्ट में यह बात सामने आई है।
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मेडिकल कॉलेज मथुरा दास माथुर अस्पताल और उमेद अस्पताल में बाल रोग विभाग संचालित करता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बच्चों के मरने की संख्या इसलिए ज्यादा है क्योंकि सुदूर क्षेत्रों में रहने वाले मरीज समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते हैं। अकेले 2019 में 754 बच्चों की मौत हुई है यानी हर महीने औसतन 63 बच्चों ने दम तोड़ा। हालांकि अचानक दिसंबर में बच्चों की मौत का आंकड़ा 146 तक बढ़ गया है।
बीकानेर में पिछले एक महीने में 162 बच्चे जिंदगी की जंग हारे
बीकानेर के सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज, प्रिंस बिलयसिंह मेमोरियल (पीबीएम) अस्पताल के प्रिंसिपल एचएस कुमार ने कहा, 'यहां दिसंबर के महीने में 162 बच्चों की आईसीयू में मौत हुई है। लेकिन अस्पताल में चिकित्सा सेवाओं में कोई लापरवाही नहीं हुई है। जिंदगी बचाने के लिए पूरी कोशिशें की जा रही हैं।'
सचिन पायलट ने अपनी ही सरकार को घेरा, कहा- तय होनी चाहिए जवाबदेही
सचिन पायलट ने कहा कि इस मामले में जिस तरह की बयानबाजी हुई है वह सही नहीं है। मुझे लगता है कि इस मामले में हमारी प्रतिक्रिया संवेदनशील और दयापूर्ण होनी चाहिए थी। 13 महीने सरकार चलाने के बाद इस बात का कोई मतलब नहीं है कि पुरानी सरकार की कमियों को जिम्मेदार माना जाए। इस मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए।