{"_id":"69d5c30937adfc68d702c1e4","slug":"upon-scanning-even-trees-will-now-speak-revealing-their-unique-characteristics-jhalawar-news-c-1-1-noi1471-4139478-2026-04-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rajasthan News: क्यूआर कोड स्कैन करते ही ‘बोलने’ लगे पेड़, झालावाड़ के स्कूल की इस पहल ने बदली पढ़ाई की तस्वीर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rajasthan News: क्यूआर कोड स्कैन करते ही ‘बोलने’ लगे पेड़, झालावाड़ के स्कूल की इस पहल ने बदली पढ़ाई की तस्वीर
Wed, 08 Apr 2026 09:07 AM IST
झालावाड़ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झालावाड़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झालावाड़
Published by: झालावाड़ ब्यूरो
Updated Wed, 08 Apr 2026 09:07 AM IST
सार
झालावाड़ के एक सरकारी स्कूल में क्यूआर कोड के जरिए पेड़ अब अपनी पहचान बता रहे हैं। स्कूल परिसर में लगे करीब 500 पेड़ों पर क्यूआर कोड लगाए गए हैं, जिन्हें स्कैन करने पर उनकी जानकारी ऑडियो के रूप में सुनाई देती है।
विज्ञापन
झालावाड़ के कॉलेज में शुरू हुई नई पहल
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
झालावाड़ जिले के भवानीमंडी क्षेत्र के पचपहाड़ स्थित महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय में पर्यावरण शिक्षा को रोचक बनाने के लिए एक अनोखी पहल शुरू की गई है। 'हर पेड़ कुछ कहता है' नाम से चल रही इस अभिनव पहल के तहत विद्यालय परिसर में लगे करीब 500 पेड़-पौधों पर क्यूआर कोड लगाए जा रहे हैं। इन्हें मोबाइल से स्कैन करते ही अब पौधे अपनी विशेषताएं, उपयोग और पर्यावरणीय महत्व की जानकारी ऑडियो संदेश के रूप में स्वयं बताते हैं।
क्यूआर स्कैन करने पर सुनाई देगा ऑडियो
प्रधानाचार्य कृष्ण गोपाल वर्मा ने बताया कि इस परियोजना की शुरुआत लगभग दो वर्ष पहले की गई थी। शुरुआत में क्यूआर कोड स्कैन करने पर पौधों की जानकारी पीडीएफ के रूप में मिलती थी, लेकिन अब इसे अपडेट कर ऑडियो आधारित बना दिया गया है।
प्रोजेक्ट संयोजक एवं राज्य स्तरीय पुरस्कृत जीव विज्ञान व्याख्याता डॉ. दिव्येंदु सेन ने बताया कि अब क्यूआर कोड स्कैन करते ही संबंधित पौधे के बारे में ऑडियो संदेश सुनाई देता है मानो पौधा खुद अपनी कहानी सुना रहा हो। इस पहल की खास बात यह है कि इन ऑडियो संदेशों में स्टूडेंट्स, विद्यालय स्टाफ और जिला प्रशासन के अधिकारियों- जिला कलेक्टर, उपखण्ड अधिकारी, मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, एबीईओ, डीईओ और प्रिंसिपल सभी ने अपनी आवाजें दी है।
विज्ञापन
‘कलेक्टर ट्री’ बना मुख्य आकर्षण
डॉ. दिव्येंदु सेन ने बताया कि जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ से भी एक पेड़ को आवाज देने का अनुरोध किया गया था, जिसे उन्होंने स्वीकार किया। कलेक्टर ने कुपोषण से लड़ने में सहायक मोरिंगा (सहजन) वृक्ष के लिए अपनी आवाज में संदेश रिकॉर्ड किया, जिसे 'कलेक्टर ट्री' नाम दिया गया है। इस पेड़ पर लगे क्यूआर कोड को स्कैन करने पर कलेक्टर की आवाज में संदेश सुनाई देता है, जो विद्यार्थियों और आगंतुकों के लिए खास आकर्षण बना हुआ है।
ये भी पढ़ें: Rajasthan News: रहस्यमयी बीमारी से मचा हड़कंप, पांच दिन में पांच बच्चों की मौत हुई; बुखार के 17 नए मरीज मिले
मनोविज्ञान आधारित शैक्षणिक पहल
डॉ. सेन ने बताया कि यह पहल तकनीक और शैक्षिक मनोविज्ञान के समन्वय पर आधारित है। इसमें विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। स्टूडेंट्स ने स्वयं पौधों की जानकारी एकत्र की, स्क्रिप्ट तैयार की और ऑडियो रिकॉर्डिंग में हिस्सा लिया। इससे उनकी जिज्ञासा, स्मरण शक्ति और प्रकृति के प्रति भावनात्मक जुड़ाव बढ़ता है।
स्थानीय भाषा में भी उपलब्ध है जानकारी
इस पहल में कुछ पौधों के ऑडियो संदेश स्थानीय मालवी भाषा में भी रिकॉर्ड किए गए हैं, ताकि स्थानीय समुदाय भी आसानी से समझ सके। पलाश और देशी बबूल जैसे पौधे स्थानीय भाषा में अपनी कहानी सुनाते हैं, जिससे यह पहल स्कूल से आगे बढ़कर समाज तक पहुंच रही है।
विद्यालय परिसर में पीपल, बरगद, नीम, खेजड़ी, सागवान, अर्जुन, महुआ, जामुन, आम, अमरूद, पारिजात, पलाश, कचनार, बबूल, काजूरिना, यूकेलिप्टस, मोरिंगा सहित कई पौधों को इस परियोजना में शामिल किया गया है। कुछ पौधे अपनी विशेषताओं के साथ अपनी सीमाओं के बारे में भी बताते हैं, जिससे विद्यार्थियों को सही स्थान पर सही पौधा लगाने की जानकारी मिलती है। जिला शिक्षा अधिकारी सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे पर्यावरण शिक्षा को रोचक और प्रभावी बनाने वाला अभिनव प्रयास बताया है।
विज्ञापन
क्यूआर स्कैन करने पर सुनाई देगा ऑडियो
प्रधानाचार्य कृष्ण गोपाल वर्मा ने बताया कि इस परियोजना की शुरुआत लगभग दो वर्ष पहले की गई थी। शुरुआत में क्यूआर कोड स्कैन करने पर पौधों की जानकारी पीडीएफ के रूप में मिलती थी, लेकिन अब इसे अपडेट कर ऑडियो आधारित बना दिया गया है।
विज्ञापन
प्रोजेक्ट संयोजक एवं राज्य स्तरीय पुरस्कृत जीव विज्ञान व्याख्याता डॉ. दिव्येंदु सेन ने बताया कि अब क्यूआर कोड स्कैन करते ही संबंधित पौधे के बारे में ऑडियो संदेश सुनाई देता है मानो पौधा खुद अपनी कहानी सुना रहा हो। इस पहल की खास बात यह है कि इन ऑडियो संदेशों में स्टूडेंट्स, विद्यालय स्टाफ और जिला प्रशासन के अधिकारियों- जिला कलेक्टर, उपखण्ड अधिकारी, मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, एबीईओ, डीईओ और प्रिंसिपल सभी ने अपनी आवाजें दी है।
विज्ञापन
‘कलेक्टर ट्री’ बना मुख्य आकर्षण
डॉ. दिव्येंदु सेन ने बताया कि जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ से भी एक पेड़ को आवाज देने का अनुरोध किया गया था, जिसे उन्होंने स्वीकार किया। कलेक्टर ने कुपोषण से लड़ने में सहायक मोरिंगा (सहजन) वृक्ष के लिए अपनी आवाज में संदेश रिकॉर्ड किया, जिसे 'कलेक्टर ट्री' नाम दिया गया है। इस पेड़ पर लगे क्यूआर कोड को स्कैन करने पर कलेक्टर की आवाज में संदेश सुनाई देता है, जो विद्यार्थियों और आगंतुकों के लिए खास आकर्षण बना हुआ है।
ये भी पढ़ें: Rajasthan News: रहस्यमयी बीमारी से मचा हड़कंप, पांच दिन में पांच बच्चों की मौत हुई; बुखार के 17 नए मरीज मिले
मनोविज्ञान आधारित शैक्षणिक पहल
डॉ. सेन ने बताया कि यह पहल तकनीक और शैक्षिक मनोविज्ञान के समन्वय पर आधारित है। इसमें विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। स्टूडेंट्स ने स्वयं पौधों की जानकारी एकत्र की, स्क्रिप्ट तैयार की और ऑडियो रिकॉर्डिंग में हिस्सा लिया। इससे उनकी जिज्ञासा, स्मरण शक्ति और प्रकृति के प्रति भावनात्मक जुड़ाव बढ़ता है।
स्थानीय भाषा में भी उपलब्ध है जानकारी
इस पहल में कुछ पौधों के ऑडियो संदेश स्थानीय मालवी भाषा में भी रिकॉर्ड किए गए हैं, ताकि स्थानीय समुदाय भी आसानी से समझ सके। पलाश और देशी बबूल जैसे पौधे स्थानीय भाषा में अपनी कहानी सुनाते हैं, जिससे यह पहल स्कूल से आगे बढ़कर समाज तक पहुंच रही है।
विद्यालय परिसर में पीपल, बरगद, नीम, खेजड़ी, सागवान, अर्जुन, महुआ, जामुन, आम, अमरूद, पारिजात, पलाश, कचनार, बबूल, काजूरिना, यूकेलिप्टस, मोरिंगा सहित कई पौधों को इस परियोजना में शामिल किया गया है। कुछ पौधे अपनी विशेषताओं के साथ अपनी सीमाओं के बारे में भी बताते हैं, जिससे विद्यार्थियों को सही स्थान पर सही पौधा लगाने की जानकारी मिलती है। जिला शिक्षा अधिकारी सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे पर्यावरण शिक्षा को रोचक और प्रभावी बनाने वाला अभिनव प्रयास बताया है।

पेड़ो पर लगे क्यों आर कोड से मिलेगी जानकारी

पेड़ो पर लगे क्यों आर कोड से मिलेगी जानकारी