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Rajasthan: 64 साल का साथ, मौत भी जुदा न कर सकी! पत्नी के ठीक बाद पति ने तोड़ा दम; एक चिता पर हुआ अंतिम संस्कार

Sun, 23 Aug 2026 05:24 PM IST
जालौर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौर Published by: जालौर ब्यूरो Updated Sun, 23 Aug 2026 05:24 PM IST
सार

Rajasthan News: जालोर के भवराणी गांव में 64 साल, 4 महीने और 26 दिन तक साथ रहे बुजुर्ग दंपती ने महज डेढ़ घंटे के अंतराल में दुनिया को अलविदा कह दिया। पहले 90 वर्षीय पुनी देवी का निधन हुआ, फिर उनके 89 वर्षीय पति दरगाराम प्रजापत ने भी प्राण त्याग दिए। परिजनों ने दोनों की अर्थियों को गठजोड़े में बांधकर एक साथ अंतिम यात्रा निकाली और एक ही चिता पर मुखाग्नि दी।
 

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Jalore: Husband and wife, together for 64 years, set out on their final journey together.
64 साल साथ रहे पति-पत्नी की अंतिम यात्रा साथ निकली - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जालोर जिले के भवराणी गांव में पति-पत्नी के जीवनभर के साथ की भावुक कहानी सामने आई है। गांव निवासी पुनी देवी और उनके पति दरगाराम प्रजापत ने करीब 64 साल, 4 महीने और 26 दिन तक एक-दूसरे का हर सुख-दुख में साथ निभाया। शनिवार को दोनों ने कुछ ही समय के अंतराल में दुनिया को अलविदा कह दिया। पहले 90 वर्षीय पुनी देवी की अचानक तबीयत बिगड़ी और उनका निधन हो गया। इसके महज डेढ़ घंटे बाद उनके 89 वर्षीय पति दरगाराम प्रजापत ने भी अंतिम सांस ली।

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पत्नी की मौत की खबर सुनी, डेढ़ घंटे बाद पति ने भी छोड़ी दुनिया
जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह पुनी देवी की तबीयत अचानक खराब हुई। चक्कर आने के बाद करीब 11 बजे उन्होंने घर पर दम तोड़ दिया। पोती पिंकी ने जब दादा दरगाराम को पत्नी के निधन की जानकारी दी तो वे भावुक और बेचैन हो गए। करीब छह दशक से अधिक समय तक साथ रही जीवनसंगिनी के जाने का सदमा वे सह नहीं सके। दोपहर करीब 12:30 बजे दरगाराम ने भी घर पर प्राण त्याग दिए। दंपती की मौत से परिवार के साथ पूरा गांव शोक में डूब गया।
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अर्थियों को गठजोड़े में बांधा, साथ निकली अंतिम यात्रा
इसके बाद परिजनों ने दोनों की अंतिम यात्रा भी एक साथ निकालने का निर्णय लिया। दोनों की अर्थियों को गठजोड़े में बांधकर श्मशान घाट ले जाया गया। अंतिम यात्रा का दृश्य बेहद भावुक था और बड़ी संख्या में ग्रामीण इसमें शामिल हुए। श्मशान घाट पहुंचने के बाद गठजोड़े में बंधी दोनों अर्थियों के पेड़ के फेरे करवाए गए।
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एक ही चिता पर माता-पिता को दी मुखाग्नि
पेड़ के फेरे पूरे होने के बाद बड़े बेटे कालूराम ने एक ही चिता पर अपने माता-पिता को मुखाग्नि दी। इस दौरान वहां मौजूद ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं। जिस दंपती ने जिंदगी के 64 साल से ज्यादा एक-दूसरे के साथ बिताए, उनकी अंतिम यात्रा भी साथ निकली।


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‘जिन हाथों ने 64 साल पहले हाथ थामा, अंत तक साथ रहा’
पड़ोसी गणपतसिंह मंडलावत ने बताया कि करीब 90 वर्ष की उम्र तक साथ रहना, बिना किसी लंबी बीमारी के चलते-फिरते संसार से विदा होना और अंतिम यात्रा में भी गठजोड़े में साथ निकलना दंपती के सात्विक जीवन और पूर्व जन्मों के पुण्य का फल माना जा सकता है। ग्रामीणों ने कहा कि पति-पत्नी ने जीवनभर साथ निभाने के साथ अंतिम समय में भी एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ा। जिन हाथों ने 64 साल पहले एक-दूसरे का हाथ थामा था, उनका साथ जीवन की अंतिम यात्रा तक बना रहा।

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