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Vijay Dashmi: खुद को राम का वंशज मानने वाले राजघराने का दशहरा, अश्व, गज की पूजा के बाद उड़ाते हैं नीलकंठ पक्षी

Sat, 12 Oct 2024 08:18 PM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: अर्पित याज्ञनिक Updated Sat, 12 Oct 2024 08:18 PM IST
सार

आज विजयादशमी है। यूं तो राजस्थान के सभी जिलों में दशहरा धूम-धाम से मनाया जाता है, लेकिन जयपुर राजपरिवार के लिए यह मौका और भी खास है। इसकी वजह है कच्छावा गोत्र का जयपुर राजवंश खुद को भगवान राम के पुत्र कुश का वंशज मानता है। जानिए आज के दिन यह पूर्व राजवरिवार कैसे करता है पूजा अर्चना....

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Vijay Dashmi: Dussehra Puja was performed in the royal family that considers itself a descendant of Ram
सिटी पैलेस में पूजन करते पद्मनाभ सिंह। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जयपुर के पूर्व महाराज भवानी सिंह भगवान राम के बेटे कुश के 309वें वंशज थे। इनके बाद इनके दोहते और जयपुर राजघराने से ताल्लुक रखने वाली उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी के पुत्र महाराजा सवाई पद्मनाभ सिंह इस घराने के उत्तराधिकारी घोषित हुए। भवानी सिंह को सरकार ने ब्रिगेडियर के पद से नवाजा था। उनके निधन के बाद 2011 में वारिस के तौर पर पद्मनाभ सिंह का राजतिलक हुआ।

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जब कोर्ट में अयोध्या के राम राममंदिर को लेकर सुनवाई चल रही थी। तब शीर्ष कोर्ट ने पूछा था- क्या भगवान राम का कोई वंशज अयोध्या या दुनिया में है? तब रामलला के वकील का जवाब था- पता नहीं। उस दौरान जयपुर के पूर्व राजघराने के महाराजा भवानी सिंह की बेटी दीया कुमारी ने दावा किया था कि उनका परिवार भगवान राम के बड़े बेटे कुश के नाम पर ख्यात कच्छवाहा/कुशवाहा वंश के वंशज हैं।
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चंद्र महल में होती है शस्त्र पूजा
दशहरा एवं विजयादशमी के अवसर पर शनिवार को सिटी पैलेस में पद्मनाभ सिंह ने रीति-रिवाज अनुसार पारंपरिक पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने पहले चंद्र महल में शस्त्र पूजा की। इसके साथ ही सर्वतोभद्र चौक में अश्व पूजा, गज पूजा और पालकी की पूजा की। जयपोल पर परंपरा अनुसार नील कंठ पक्षी को भी उड़ाया गया। इस अवसर पर ताजमी सरदार, खासा चौकी सरदार एवं जयपुर के पूर्व ठाकुर और ठिकानेदार उपस्थित रहे, जिन्होंने पद्मनाभ सिंह से भेंटकर उन्हें दशहरा पर्व की शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

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