Rajasthan News: ‘हम एक नीति के रूप में संरचित, तरीके से बहुत दर्दनाक’… कार्यक्रम में बोले उपराष्ट्रपति धनखड़
Rajasthan News: उपराष्ट्रपति ने आज राजधानी जयपुर में हिंदू आध्यात्मिक एवं सेवा मेला 2024 के उद्घाटन के अवसर पर अपने विचार प्रकट करते हुए भारतीय समाज की सेवा भावना, सनातन धर्म की समावेशिता और धर्मांतरण जैसे गंभीर मुद्दों पर अपनी चिंताएं व्यक्त की। अपने संबोधन में उन्होंने सनातन धर्म की सार्वभौमिकता, समावेशिता और सेवा भावना को रेखांकित किया, जो भारतीय संस्कृति का प्रमुख स्तंभ है।
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उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने हिंदू धर्म को एक समावेशी धर्म बताते हुए कहा कि "हिंदू धर्म सच्चे अर्थ में समावेशी है। यह न केवल मनुष्यों बल्कि पृथ्वी पर सभी जीवों और प्रकृति का संरक्षण करने की बात कहता है।" उन्होंने कहा कि भारतीय सभ्यता की जड़ें केवल मानव कल्याण में ही नहीं बल्कि संपूर्ण जगत के कल्याण में निहित हैं।
उन्होंने भारतीय संविधान की प्रस्तावना को सनातन धर्म के सार के रूप में बताया। उनके अनुसार, "हमारे संविधान के मूल्य सनातन धर्म के मूल्यों से उत्पन्न होते हैं। हमारी प्रस्तावना में सनातन धर्म का सार निहित है, जो मानवता के आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करता है।" उन्होंने सेवा की भावना को भारतीय संस्कृति का "मूलमंत्र" बताया। इस संदर्भ में उन्होंने COVID-19 महामारी के दौरान भारतीय समाज द्वारा प्रदर्शित सेवा भावना का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा, "जब देश में COVID का संकट आया, हमने देखा कि सेवा का भाव कितनी ऊंचाइयों तक उठकर आया।"
धार्मिक रूपांतरण की समस्या पर चिंता जताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, "हम एक नीति के रूप में संरचित तरीके से बहुत दर्दनाक धार्मिक रूपांतरण देख रहे हैं और यह हमारे मूल्यों और संवैधानिक सिद्धांतों के विपरीत है।" उन्होंने कहा कि यह एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत किया जा रहा है, जिसमें समाज के कमजोर वर्गों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने इस पर तीव्र गति से काम करने की आवश्यकता जताई ताकि इन "खतरनाक ताकतों" को नाकाम किया जा सके। अंत में, उपराष्ट्रपति ने जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों पर भी ध्यान आकर्षित किया और कहा कि भारतीय दर्शन में इसका समाधान पहले से ही मौजूद है। उन्होंने कहा, "हमारी संस्कृति में जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए गहराई से निहित मूल्य हैं, जिन्हें अगर दुनिया अपनाती तो यह संकट कभी पैदा नहीं होता।