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Jaipur News: प्रस्तावित टाइगर रिजर्व के विरोध में तीन जिलों का आंदोलन तेज, 13 जुलाई को होगी महापंचायत
Wed, 01 Jul 2026 07:00 PM IST
जयपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: जयपुर ब्यूरो
Updated Wed, 01 Jul 2026 07:00 PM IST
सार
करौली, धौलपुर और भरतपुर के सीमावर्ती क्षेत्र में प्रस्तावित टाइगर रिजर्व को लेकर ग्रामीणों का विरोध लगातार बढ़ रहा है। 120 गांवों के प्रभावित होने का दावा करते हुए आंदोलनकारियों ने 13 जुलाई को महापंचायत बुलाने का ऐलान किया है।
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राजू नावर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बांध बरेठा इको-सेंसिटिव जोन और करौली, धौलपुर तथा भरतपुर के सीमावर्ती क्षेत्र में प्रस्तावित टाइगर रिजर्व के विरोध में ग्रामीणों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। आंदोलनकारी अब इस मुद्दे को लेकर बड़े जनआंदोलन की तैयारी में जुट गए हैं। इसी क्रम में 13 जुलाई को मरधई में महापंचायत आयोजित की जाएगी, जिसमें तीनों जिलों के हजारों ग्रामीणों के शामिल होने की संभावना है। ग्रामीणों का आरोप है कि राज्य सरकार उनकी सहमति के बिना टाइगर रिजर्व और वन्यजीव अभयारण्य के विस्तार की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है, जिससे बड़ी संख्या में गांवों के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो सकता है।
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आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि सरकार टाइगर संरक्षण के लिए कोई कदम उठाना चाहती है तो केवल बांध बरेठा क्षेत्र को ही टाइगर रिजर्व या वन्यजीव अभयारण्य के रूप में विकसित किया जाए। उनका आग्रह है कि आबादी वाले गांवों और कृषि क्षेत्रों को प्रस्तावित दायरे से बाहर रखा जाए।
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आंदोलन से जुड़े राजू नावर ने बताया कि प्रस्तावित विस्तार से करीब 120 गांव प्रभावित होंगे, जहां लगभग एक से डेढ़ लाख लोग निवास करते हैं। उनका दावा है कि इन गांवों में 36 समाजों के लोग रहते हैं और सभी ने एकजुट होकर प्रस्ताव का विरोध करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि अब तक कई पंचायतें और महापंचायतें आयोजित की जा चुकी हैं, जिनमें ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि वे किसी भी स्थिति में अपनी जमीन और गांव नहीं छोड़ेंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि टाइगर रिजर्व के विस्तार से किसानों की कृषि भूमि, आजीविका और सामाजिक जीवन पर गंभीर असर पड़ेगा। खेती और पशुपालन उनकी आय का मुख्य स्रोत है और यदि विस्थापन हुआ तो हजारों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। राजू नावर ने आरोप लगाया कि वन विभाग ने क्षेत्र में 'केपी-3' नामक टाइगर छोड़ा है, जिससे ग्रामीणों में भय का माहौल बन गया है। हालांकि इस दावे पर वन विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों की अनदेखी करते हुए टाइगर रिजर्व विस्तार की प्रक्रिया आगे बढ़ाई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उनका कहना है कि अपनी पुश्तैनी जमीन और गांवों की रक्षा के लिए वे लोकतांत्रिक तरीके से हर स्तर पर संघर्ष करेंगे।