'खत्म हो चुका है पुराना वर्चस्व': मालवीय के कांग्रेस में लौटने पर डामोर का तंज, बोले- जनता नए नेतृत्व की ओर
महेंद्रजीत सिंह मालवीय के कांग्रेस में लौटने पर धरियावद विधायक थावरचंद डामोर ने उनकी राजनीतिक पकड़ पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आदिवासी क्षेत्र में मालवीय का पुराना वर्चस्व खत्म हो चुका है और आगामी पंचायत चुनाव उनके वास्तविक प्रभाव की तस्वीर साफ करेंगे।
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महेंद्रजीत सिंह मालवीय के भाजपा छोड़कर कांग्रेस में लौटने और जयपुर में कांग्रेस नेताओं से मुलाकात के बाद दक्षिणी राजस्थान की सियासत को लेकर चर्चाएं तेज हैं। इस बीच धरियावद विधायक थावरचंद डामोर ने मालवीय की राजनीतिक पकड़ पर सवाल उठाते हुए कहा कि आदिवासी क्षेत्र में उनका पुराना वर्चस्व अब खत्म हो चुका है और जनता नए नेतृत्व की ओर देख रही है।
डामोर ने कहा कि एक समय महेंद्रजीत सिंह मालवीय दक्षिणी राजस्थान के कद्दावर नेताओं में गिने जाते थे। उनके पास अपने क्षेत्र में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता थे और उनका राजनीतिक प्रभाव भी मजबूत माना जाता था। लेकिन आज स्थिति ऐसी है कि उन्हें अपनी ही विधानसभा क्षेत्र के लोगों को जयपुर तक लाकर अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने की जरूरत पड़ रही है। डामोर ने मालवीय के उस दावे पर भी सवाल उठाया, जिसमें उन्होंने भाजपा छोड़ते समय बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के कांग्रेस में लौटने की बात कही थी।
उन्होंने कहा कि आदिवासी क्षेत्र के लोग अब पहले से ज्यादा राजनीतिक रूप से जागरूक हो चुके हैं। जनता अपने वोट की ताकत और उसके पांच साल तक पड़ने वाले असर को समझने लगी है। अब केवल पैसा, शराब या चुनावी प्रलोभन के आधार पर आदिवासी मतदाताओं को प्रभावित करना आसान नहीं है। जनता यह भी समझने लगी है कि चुनाव में करोड़ों रुपये खर्च करने वाला उम्मीदवार जीतने के बाद उस पैसे की भरपाई जनता से ही करने का प्रयास कर सकता है।
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मालवीय के भाजपा में जाने और फिर कांग्रेस में लौटने को लेकर डामोर ने कहा कि राजनीतिक रूप से एक बार विश्वास टूटने के बाद उसे पहले जैसी मजबूती से हासिल करना आसान नहीं होता। उन्होंने कहा कि जनता और कार्यकर्ताओं ने मालवीय का राजनीतिक सफर देखा है। ऐसे में उनके प्रति पहले जैसा भरोसा कायम रहना मुश्किल है।
डामोर ने आगे क्या कहा?
डामोर ने भाजपा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि दक्षिणी राजस्थान में आदिवासी नेतृत्व की बढ़ती ताकत को दोनों बड़े राजनीतिक दल चुनौती के रूप में देखते हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी क्षेत्र में अब पढ़ा-लिखा और युवा नेतृत्व आगे आ रहा है, जो अपने अधिकारों और क्षेत्र के विकास के लिए संघर्ष करने की क्षमता रखता है।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में पंचायती राज चुनाव इस राजनीतिक बदलाव की तस्वीर साफ करेंगे। जहां आदिवासी समाज और स्थानीय कार्यकर्ताओं में एकजुटता दिखाई देगी, वहां तीसरे विकल्प के मजबूत होने की संभावना है। डामोर ने दावा किया कि जनता अब परिवारवाद और लगातार सत्ता में बने रहने की राजनीति को भी चुनौती देने लगी है।
महेंद्रजीत सिंह मालवीय के कांग्रेस में लौटने से क्या पार्टी दक्षिणी राजस्थान में मजबूत होगी, इस सवाल पर डामोर ने कहा कि केवल किसी एक नेता के लौटने से कांग्रेस अपनी खोई जमीन वापस नहीं पा सकती। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले पंचायत चुनाव यह तय करेंगे कि मालवीय का अपने क्षेत्र में वास्तव में कितना राजनीतिक प्रभाव बचा है।