Rajasthan: जोजरी प्रदूषण मामले में SC सख्त; अवैध पाइप लाइन से छोड़ रहे अपशिष्ट, जिम्मेदारों पर होगी कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने जोधपुर की जोजरी नदी में अवैध रूप से औद्योगिक गंदा पानी छोड़ने वाली 4 किमी लंबी पाइपलाइन पर सख्त नाराजगी जताई। कोर्ट ने अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए। राज्य सरकार ने एफआईआर, एसआईटी जांच और दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिया।
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राजस्थान की जोजरी-लूनी नदी प्रणाली में लगातार बढ़ते प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और प्रदूषण नियंत्रण तंत्र पर कड़ा रुख अपनाया है। जोधपुर के पास जोजरी नदी में बिना उपचारित औद्योगिक अपशिष्ट छोड़ने वाली करीब 4 किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइन मिलने के बाद कोर्ट ने पूछा कि आखिर “यह सब किसकी जानकारी में हो रहा था?”
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि इतनी बड़ी अवैध डिस्चार्ज व्यवस्था उद्योगों, सीईटीपी संचालकों और नियामक एजेंसियों की जानकारी के बिना लंबे समय तक कैसे चलती रही। अदालत ने स्थानीय अधिकारियों और राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
राजस्थान सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने कोर्ट को बताया कि 27 मई को निरीक्षण के दौरान मामला सामने आने के तुरंत बाद कार्रवाई शुरू कर दी गई थी। जयपुर से विशेष टीम जोधपुर भेजी गई, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दो अधिकारियों को निलंबित किया गया और वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले किए गए। साथ ही पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति वसूली और आपराधिक कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
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सरकार ने कोर्ट को बताया कि जोधपुर सीईटीपी से जुड़े सभी 306 टेक्सटाइल उद्योगों को बंद कर दिया गया है और सीईटीपी प्लांट को भी जांच पूरी होने तक बंद रखा गया है। राज्य ने यह भी आश्वासन दिया कि पूरे मामले की जांच के लिए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी की निगरानी में एसआईटी गठित की जाएगी और एफआईआर दर्ज होगी।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने संकेत दिया कि वह मामले की जांच सीबीआई को सौंपने पर विचार कर रहा था, लेकिन राज्य सरकार द्वारा स्वतंत्र एसआईटी जांच का भरोसा दिए जाने के बाद फिलहाल इसकी आवश्यकता नहीं समझी गई। अदालत ने कहा कि अवैध डिस्चार्ज में शामिल हर स्तर के जिम्मेदार लोगों की पहचान कर कार्रवाई होनी चाहिए।
राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अध्यक्ष अपरणा अरोड़ा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट को बताया कि अवैध गतिविधि सामने आते ही तत्काल कार्रवाई की गई और किसी भी तरह के पर्यावरणीय उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने समिति की उस रिपोर्ट पर भी चिंता जताई जिसमें जोजरी-बांडी-लूनी नदी तंत्र में जहरीले स्लज के बड़े स्तर पर जमा होने और मानसून से पहले उसके वैज्ञानिक निस्तारण की जरूरत बताई गई है। समिति ने चेतावनी दी है कि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदूषण भूजल, कृषि भूमि और आसपास के पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। मामले की अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट विस्तृत आदेश जारी कर सकता है।