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RJ Assembly Dispute: कांग्रेस विधायक भाकर सत्र से निलंबित, स्पीकर ने मार्शल बुलाकर बाहर निकालने का दिया आदेश

Mon, 05 Aug 2024 04:38 PM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: अर्पित याज्ञनिक Updated Mon, 05 Aug 2024 04:38 PM IST
सार

विधानसभा में जूली एक मामले को लेकर चर्चा के लिए अड़ हुए थे। आरोप है कि भाकर ने इस दौरान स्पीकर की तरफ उंगुली से इशारा कर दिया। इसी के बाद पूरा विवाद बढ़ गया।विधानसभा में जूली एक मामले को लेकर चर्चा के लिए अड़ हुए थे। आरोप है कि भाकर ने इस दौरान स्पीकर की तरफ उंगुली से इशारा कर दिया। इसी के बाद पूरा विवाद बढ़ गया।

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RJ Assembly Dispute: Congress MLA Mukesh Bhakar suspended from the session, ruckus broke out in the assembly
राजस्थान विधानसभा में घमासान। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विधानसभा में सोमवार को शून्यकाल के दौरान कांग्रेस विधायक मुकेश भाकर ने विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की तरफ इशारा कर दिया। इससे नाराज देवनानी ने भाकर को शेष सत्र के लिए निलंबित कर दिया। स्पीकर ने मार्शल बुलाकर भाकर को सदन से बाहर निकालने का आदेश दिया, लेकिन कांग्रेस की महिला विधायकों ने भाकर को घेर लिया।
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राजस्थान विधानसभा में कांग्रेस विधायक मुकेश भाकर के निलंबन को लेकर जबरदस्त हंगामा चल रहा है। शून्यकाल के दौरान मुकेश भाकर ने सदन में स्पीकर वासुदेव देवनानी की तरफ इशारा कर दिया। स्पीकर ने इससे नाराज होकर सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग को भाकर का निलंबन प्रस्ताव लाने के लिए कहा। गर्ग ने भाकर के निलंबन का प्रस्ताव पेश किया, जिसे पारित करवा दिया। प्रस्ताव पारित होते ही स्पीकर ने मार्शल को मुकेश भाकर को सदन से निकालने का आदेश दिया। इसके बाद कांग्रेस विधायक हंगामा करते हुए वेल में आ गए, जिसके बाद स्पीकर ने सदन की कार्रवाई 3:29 बजे तक स्थगित कर दी। 
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दोबारा सदन जुटा तो कांग्रेस की महिला विधायकों ने भाकर को चारों तरफ से घेर लिया, ताकि मार्शल उन्हें सदन से बाहर नहीं ले जा सकें। हंगामा बढ़ता देख सदन की कार्रवाई एक बार फिर से 3:59 बजे तक स्थगित करनी पड़ गई। 



इस बात पर शुरू हुआ हंगामा
पूरा मामला विधानसभा में लंच ब्रेक के बाद शुरू हुआ जब स्पीकर और नेता  प्रतिपक्ष के बीच संसदीय कार्यमंत्री जोगाराम पटेल के बेटे को सरकारी वकील बनाए जाने को लेकर तीखी नोकझोंक हो गई। जूली मामले पर चर्चा के लिए अड़ गए, जबकि स्पीकर ने कहा कि नियमों में आइए, कल व्यवस्था दूंगा। जूली ने कहा कि एक जुलाई से भारतीय न्याय संहिता लागू हो चुकी है, लेकिन सरकार ने 12 से ज्यादा सरकारी वकीलों की नियुक्ति सीआरपीसी के तहत कर दी है। ये संविधान का उल्लंघन है। इस पर सदन में चर्चा हो। मंत्री के बेटे को भी सरकारी वकील बना दिया है। जूली मामले पर चर्चा करवाना चाह रहे थे, लेकिन  स्पीकर वासुदेव देवनानी ने इस मुद्दे को आगे अनुमति देने से इनकार कर दिया। कहा- पहले लिखित में दीजिए, आप कौन से नियम के तहत इस पर चर्चा कराना चाहते हैं। इस मामले में नेता प्रतिपक्ष की स्पीकर से नोकझोंक हो गई। इसके बाद नाराज कांग्रेस विधायकों ने वेल में आकर नारेबाजी शुरू कर दी। स्पीकर ने कहा- नियमों में आइए, कल व्यवस्था दूंगा। इसी बीच मुकेश भाकर ने हंगामा करने लगे। आरोप है कि भाकर ने इस दौरान स्पीकर की तरफ उंगुली से इशारा कर दिया। इसी के बाद पूरा विवाद बढ़ गया।

सदन की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित
मुकेश भाकर को सदन से बाहर निकालने को लेकर मार्शल और कांग्रेस विधायकों के बीच जबरदस्त भिड़ंत हो गई। ऐसा मामला बहुत लंबे समय बाद सदन में देखने को मिला, जब किसी विधायकों को बाहर निकालने के लिए ऐसी नौबत आई हो। सदन तीसरी बार 3 बजकद 59 मिनट पर फिर से जुटा। सभापति संदीप शर्मा ने बीजेपी विधायक का नाम बोलने के लिए पुकारा। कांग्रेस विधायक पहले ही वेल में खड़े होकर नारेबाजी कर रहे थे। इस बीच सभापति ने मुकेश भाकर को सदन से बाहर जाने की चेतावनी दी। भाकर ने इसे अनदेखा कर दिया। इस पर सभापति ने मार्शल बुला लिए। मार्शल अंदर आकर भाकर को ले जाने लगे तो कांग्रेस विधायक और उनके बीच जबरदस्त हाथापाई हो गई। इस मामला बढ़ता देख सभापति ने सदन की कार्यवाही मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी, लेकिन कार्यवाही स्थगित होने के करीब 5 मिनट बाद तक भी मार्शल और कांग्रेस विधायकों के बीच भिड़ंत जारी रही। कई महिला कांग्रेस विधायकों ने सदन में मारपीट का आरोप लगाते हुए टूटी हुई चूड़िया लहराईं।



पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने जताया विरोध
इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कि विधानसभा में कांग्रेस विधायक मुकेश भाकर का निलंबन तथा जबरन निष्कासन फिर मार्शलों द्वारा वरिष्ठ विधायक मलहरिमोहन जमीन पर गिराना व महिला विधायक अनीता जटाविंक से बदसलूकी कर उनकी चूड़ियां तोड़ देने की मैं कड़े शब्दों में निंदा करता हूं। यह राज्य की BJP सरकार की तानाशाही सोच का नतीजा है, जिसके कारण चुने हुए जनप्रतिनिधियों के साथ ऐसा दुर्वव्यहार किया गया।
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